by admin@bebak24.com on | 2026-06-29 19:37:04
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अंतरराष्ट्रीय डेस्क: मध्य पूर्व (Middle East) में लंबे समय से जारी भीषण युद्ध को रोकने के लिए 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच 14 बिंदुओं वाले एक ऐतिहासिक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर सहमति बनी थी। इस समझौते से उम्मीद जगी थी कि जंग पर हमेशा के लिए लगाम लग जाएगी, लेकिन पिछले कुछ दिनों में होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में दोनों देशों के बीच हुए नए मिसाइल और हवाई हमलों ने इस युद्धविराम को गंभीर खतरे में डाल दिया है।
तनाव की इस नई लहर के पीछे सबसे बड़ा कारण इस समझौते का 'आर्टिकल 5' (Article 5) है, जिसे लेकर दोनों देश एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 बिंदुओं वाले एमओयू के जिस 'आर्टिकल 5' को लेकर मुख्य विवाद है, उसमें होर्मुज स्ट्रेट से व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही और इस जलमार्ग के प्रबंधन को लेकर बेहद महत्वपूर्ण शर्तें तय की गई थीं। इसके आधिकारिक मसौदे के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
60 दिनों तक सुरक्षित आवाजाही: एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान अपनी ओर से हरसंभव प्रयास करते हुए 60 दिनों तक व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की व्यवस्था करेगा। इसके लिए जहाजों से कोई शुल्क (टोल) नहीं लिया जाएगा। यह व्यवस्था केवल फारस की खाड़ी से ओमान की खाड़ी तक और वहां से वापस आने वाले जहाजों पर ही लागू होगी।
30 दिनों में समुद्री बारूदी सुरंगें हटाना: व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू की जाएगी। इसके साथ ही सामरिक और सैन्य बाधाओं को हटाने तथा ईरान द्वारा समुद्री बारूदी सुरंगों (माइंस) को साफ करने की जरूरत को देखते हुए, यह पूरी व्यवस्था 30 दिनों के भीतर बहाल की जाएगी।
ओमान के साथ बातचीत: ओमान सल्तनत के साथ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान बातचीत करेगा ताकि होर्मुज स्ट्रेट के भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं का कानूनी ढांचा तय किया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान: इस विषय पर फारस की खाड़ी से लगे अन्य तटीय देशों के साथ भी चर्चा की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय कानून और होर्मुज स्ट्रेट के तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों के अनुरूप होगी।
होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण (Control) का मुद्दा हमेशा से दोनों देशों के बीच शांति वार्ताओं में सबसे बड़ी बाधा रहा है, क्योंकि वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इस आर्टिकल को लेकर तनाव बढ़ने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने इराक की राजधानी बगदाद की यात्रा के दौरान एक बयान देकर विवाद को हवा दे दी। उन्होंने कहा, "आने वाले 30 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से ईरान की निगरानी और प्रबंधन में रहेगा। सभी बाधाएं हटने के बाद इस जलमार्ग की पूरी क्षमता बहाल कर दी जाएगी। यह जिम्मेदारी केवल ईरान की है और इसमें किसी दूसरे देश की कोई भूमिका नहीं है।" ईरान का यह रुख अमेरिका और खाड़ी देशों को नागवार गुजरा।
ईरान ने इस जलमार्ग से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों से टोल (शुल्क) वसूलने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका और खाड़ी के देशों ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है, क्योंकि उनके तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से जाता है और वे इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानते हैं।
आर्टिकल 5 की अलग-अलग व्याख्याओं के कारण लागू होने के दो सप्ताह के भीतर ही यह युद्धविराम टूट गया और दोनों देशों के बीच सीधे हमले शुरू हो गए:
गुरुवार: ईरान की ओर से दागी गई एक मिसाइल होर्मुज स्ट्रेट में एक मालवाहक जहाज से टकरा गई।
अमेरिका की जवाबी कार्रवाई: इस हमले के जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा का हवाला देते हुए ईरान पर कई हवाई हमले किए।
शनिवार: ईरान ने पलटवार करते हुए कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। हालांकि, अमेरिका का दावा है कि इनमें से कोई भी हमला निशाने पर नहीं लगा और कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।
इस बड़े समझौते के लिए ईरान की एक शर्त यह भी है कि लेबनान में भी जंग पूरी तरह खत्म होनी चाहिए। हालांकि, शुक्रवार को अमेरिका की मध्यस्थता में इसराइल और लेबनान के बीच एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट हुआ था, लेकिन ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के प्रमुख ने इस समझौते को खारिज कर दिया। इसके दो दिन बाद ही इसराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह की एक 200 मीटर लंबी हथियारों वाली सुरंग को नष्ट कर दिया, जिससे क्षेत्र में तनाव और ज्यादा पेचीदा हो गया है।
तमाम हिंसक झड़पों के बाद, एक बार फिर अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खबर आई है कि दोनों पक्ष फिलहाल तनाव न बढ़ाने और जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से बिना किसी रुकावट के आने-जाने देने पर राजी हुए हैं। हालांकि, जब तक कतर (दोहा) में होने वाली आगामी तकनीकी वार्ताओं में आर्टिकल 5 की शर्तों और होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन पर अंतिम मुहर नहीं लग जाती, तब तक खाड़ी में स्थायी शांति का सपना अधूरा ही रहेगा।
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