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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामला: सभी 8 आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में; फैजाबाद बार एसोसिएशन का बड़ा फैसला— पैरवी करने वाले वकील पर लगेगा 5 लाख का जुर्माना

by admin@bebak24.com on | 2026-06-29 19:18:41

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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामला: सभी 8 आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में; फैजाबाद बार एसोसिएशन का बड़ा फैसला— पैरवी करने वाले वकील पर लगेगा 5 लाख का जुर्माना

प्रादेशिक डेस्क (बेबाक24): अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चंदे और चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं (वित्तीय हेरफेर) के मामले में कानूनी शिकंजा और कड़ा हो गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तार किए गए सभी आठ अभियुक्तों को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेज दिया है

इसी बीच, फैजाबाद बार एसोसिएशन ने भी इस मामले में एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक रुख अपनाया है, जिससे आरोपियों की कानूनी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ने वाली हैं।

1. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भ्रष्टाचार विरोधी अदालत में हुई पेशी

समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से मिली जानकारी के मुताबिक, आठों आरोपियों की पिछली तीन दिनों की शुरुआती न्यायिक हिरासत सोमवार को खत्म हो रही थी। सुरक्षा और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए:

  • अदालत की कार्रवाई: आरोपियों को शारीरिक रूप से कोर्ट लाने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए भ्रष्टाचार विरोधी अदालत (Anti-Corruption Court) के विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा के समक्ष पेश किया गया।

  • अदालत का आदेश: मामले की गंभीरता और जांच के शुरुआती चरणों को देखते हुए विशेष न्यायाधीश ने सभी आठ अभियुक्तों की न्यायिक हिरासत को अगले 14 दिनों के लिए बढ़ाने का आदेश जारी कर दिया। इससे पहले एक विशेष मजिस्ट्रेट ने सोमवार तक के लिए उन्हें तीन दिन की कस्टडी में भेजा था।

2. फैजाबाद बार एसोसिएशन का सख्त फैसला: "कोई वकील नहीं लड़ेगा आरोपियों का केस"

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ स्थानीय स्तर पर वकीलों के संगठन (बार एसोसिएशन) के फैसले से आया है। सोमवार को ही फैजाबाद बार एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण आम सभा (General Body Meeting) बुलाई गई, जिसमें राम मंदिर चंदा चोरी मामले के अभियुक्तों को लेकर सर्वसम्मति से दो बड़े और कड़े प्रस्ताव पास किए गए:

  • पैरवी का पूर्ण बहिष्कार: बार एसोसिएशन ने आधिकारिक तौर पर फैसला लिया है कि उनका कोई भी वकील अयोध्या राम मंदिर मामले के इन आठ आरोपियों की तरफ से कोर्ट में पैरवी (Defend) नहीं करेगा।

  • 5 लाख रुपये का जुर्माना और सदस्यता रद्द: एसोसिएशन ने अपने सदस्यों को कड़ी चेतावनी देते हुए प्रस्ताव पारित किया है कि यदि कोई भी वकील इस सामूहिक फैसले के खिलाफ जाकर आरोपियों का केस हाथ में लेता है या उनकी पैरवी करता है, तो उस पर 5 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा और साथ ही उसकी बार एसोसिएशन की सदस्यता हमेशा के लिए समाप्त कर दी जाएगी।

बेबाक24 टेक

राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की चोरी केवल एक वित्तीय अपराध (Financial Crime) नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों सनातनी आस्थावानों की धार्मिक भावनाओं और भरोसे पर किया गया एक बहुत बड़ा आघात है। यही वजह है कि इस मामले में कानूनी और सामाजिक दोनों ही स्तरों पर अभूतपूर्व तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

अदालत द्वारा 14 दिन की न्यायिक हिरासत बढ़ाना यह साफ करता है कि पुलिस और भ्रष्टाचार विरोधी टीम के पास आरोपियों के खिलाफ शुरुआती तौर पर पुख्ता डिजिटल या दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं। वहीं दूसरी तरफ, फैजाबाद बार एसोसिएशन का यह फैसला कि "कोई भी स्थानीय वकील इनका केस नहीं लड़ेगा", इन आरोपियों के लिए सबसे बड़ा झटका है। हालांकि, भारतीय कानून के तहत हर आरोपी को कानूनी सहायता (Legal Aid) पाने का संवैधानिक अधिकार है, और ऐसे मामलों में अंततः अदालत को खुद सरकारी वकील (लीगल एड वकील) मुहैया कराना पड़ता है। लेकिन स्थानीय वकीलों का यह ₹5 लाख का जुर्माना और बहिष्कार का दांव यह साफ दिखाता है कि समाज में इस कृत्य को लेकर किस कदर नाराजगी और आक्रोश है। मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन के लिए यह बेहद जरूरी है कि इस मामले की जांच पूरी तरह पारदर्शी हो, ताकि राम मंदिर की पवित्रता और चंदे की शुचिता पर कोई आंच न आए।



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