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अकाल तख्त का पंजाब सरकार को बड़ा अल्टीमेटम: "धार्मिक मामलों में दखल न दें", एक महीने में बेअदबी कानून संशोधित करने का आदेश

by admin@bebak24.com on | 2026-06-29 19:13:50

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अकाल तख्त का पंजाब सरकार को बड़ा अल्टीमेटम: "धार्मिक मामलों में दखल न दें", एक महीने में बेअदबी कानून संशोधित करने का आदेश

अमृतसर: पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और सिख धार्मिक नेतृत्व के बीच टकराव एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने सोमवार को पंजाब सरकार को एक कड़ा और स्पष्ट निर्देश जारी किया है। अकाल तख्त ने सरकार को बेअदबी कानून ("जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026") से जुड़ी सभी आपत्तियों को दूर करने और उसमें संशोधन करने के लिए एक महीने का समय (अल्टीमेटम) दिया है

यह ऐतिहासिक और कड़ा निर्देश अमृतसर में अकाल तख्त साहिब द्वारा बुलाए गए एक विशेष कार्यक्रम में दिया गया, जहां पंजाब के सभी सिख विधायक और कैबिनेट मंत्री व्यक्तिगत रूप से हाजिर हुए थे।

1. "एक महीने में बुलाएं विधानसभा सत्र, गुरु और सिखों के बीच न आए सरकार"

बीबीसी पंजाबी के मुताबिक, जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने साफ शब्दों में कहा कि कानून को लेकर सिख समुदाय और अकाल तख्त को जो भी गंभीर आपत्तियां थीं, उन्हें दुरुस्त करने के लिए सरकार को 30 दिन की मोहलत दी जा रही है।

जत्थेदार गरगज ने अकाल तख्त सचिवालय से संदेश देते हुए कहा:

"हमें पूरी उम्मीद है कि पंजाब सरकार जनभावनाओं का सम्मान करते हुए एक महीने के भीतर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएगी और इस कानून में जरूरी संशोधन करेगी। सरकार को सख्त हिदायत है कि वह सिखों के धार्मिक मामलों और अकाल तख्त की सर्वोच्च सत्ता में किसी भी तरह का दखल न दे। आम आदमी पार्टी इस कानून के जरिए गुरु और सिखों के बीच आने की कोशिश न करे।"

उन्होंने आगे भावुक और कड़े लहजे में कहा कि किसी को भी गुरु पंथ और गुरु ग्रंथ साहिब की मर्यादा के खिलाफ जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। सभी को सिख पंथ की ऐतिहासिक भावनाओं के अनुसार ही आचरण करना होगा।

2. स्पीकर कुलतार सिंह संधवां बोले— "सरकार के सामने रखेंगे पूरी चर्चा"

अकाल तख्त साहिब के इस कड़े रुख के बाद सचिवालय में पेश होने पहुंचे पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) कुलतार सिंह संधवां ने बाहर आकर मीडिया से बात की। उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में कहा कि अकाल तख्त परिसर के भीतर जत्थेदार साहिब और विद्वानों के साथ जो भी विस्तृत चर्चा हुई है और जो आदेश मिले हैं, उन्हें पूरी गंभीरता के साथ पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री के सामने विचार-विमर्श के लिए रखा जाएगा।

3. क्या है पूरा विवाद और वह कानून जिस पर मचा है रार?

समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) के अनुसार, अकाल तख्त ने पहले ही राज्य सरकार को आगाह किया था कि इस नए कानून की कुछ विशिष्ट धाराएं 'गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और सिख संगत की मूल धार्मिक भावनाओं के पूरी तरह खिलाफ' हैं, जिन्हें तुरंत हटाया जाना जरूरी है।

  • 13 अप्रैल को पास हुआ था विधेयक: दरअसल, इसी साल 13 अप्रैल (वैसाखी के मौके पर) पंजाब विधानसभा ने "जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026" को सर्वसम्मति से पास किया था।

  • उम्रकैद का है प्रावधान: इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी (Apostasy/Sacrilege) करने वाले दोषियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना और उनके लिए उम्रकैद (Life Imprisonment) जैसी सबसे सख्त सजा का कानूनी प्रावधान सुनिश्चित करना है।

  • विरोध का कारण: कानून सख्त होने के बावजूद, सिख संस्थाओं का आरोप है कि इसकी कुछ कानूनी बारीकियां और परिभाषाएं ऐसी हैं जो अनजाने में या जानबूझकर अकाल तख्त की पारंपरिक और सर्वोच्च धार्मिक शक्तियों को कमजोर करती हैं और सरकारी/प्रशासनिक दखल को बढ़ावा देती हैं।

बेबाक24 टेक

पंजाब की राजनीति में अकाल तख्त साहिब का हुक्मनामा (आदेश) किसी भी सरकार के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होता है। आम आदमी पार्टी सरकार ने जब 13 अप्रैल को यह बेअदबी विरोधी कड़ा कानून पास किया था, तो उसे अपनी एक बड़ी राजनीतिक और नैतिक जीत के रूप में पेश किया था। लेकिन जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज के इस ताजा अल्टीमेटम ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी सरकार को कूटनीतिक रूप से बैकफुट पर धकेल दिया है।

सिख धर्म में यह माना जाता है कि पंथ और गुरु ग्रंथ साहिब की मर्यादा से जुड़े फैसलों का अधिकार केवल और केवल अकाल तख्त और 'पंज प्यारे' के पास है, किसी निर्वाचित धर्मनिरपेक्ष सरकार या विधानसभा के पास नहीं। जत्थेदार का यह कहना कि "सरकार कानून के जरिए गुरु और सिखों के बीच आ रही है", एक बहुत बड़ा और गंभीर राजनीतिक नैरेटिव है। यदि आप सरकार एक महीने के भीतर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर संशोधन नहीं करती है, तो उसे 'सिख विरोधी' होने के आरोपों का सामना करना पड़ सकता है, जो पंजाब की जमीन पर किसी भी दल के लिए आत्मघाती होगा। विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां की अकाल तख्त पर यह पेशी यह साफ करती है कि सरकार इस मुद्दे पर किसी भी तरह का टकराव मोल लेने के मूड में नहीं है और वह अकाल तख्त की शर्तों के आगे झुकने को तैयार हो जाएगी।



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