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‘उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका, माफ करना पापा’... जूनियर डॉक्टर ने सुसाइड नोट लिख दी जान!

by on | 2026-06-29 18:27:38

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‘उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका, माफ करना पापा’... जूनियर डॉक्टर ने सुसाइड नोट लिख दी जान!

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सुश्रुत छात्रावास से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) के एक 27 वर्षीय जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ऋतविक कुंडू ने अपने कमरे में कथित तौर पर एनेस्थीसिया का ओवरडोज लेकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद से पूरे विश्वविद्यालय परिसर और मेडिकल जगत में सन्नाटा पसरा हुआ है।

​कमरे में मिली लाश, नस में लगी थी ड्रिप

​मूल रूप से पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के रहने वाले ऋतविक कुंडू बीएचयू के सुश्रुत हॉस्टल में रहते थे। बताया जा रहा है कि देर रात जब साथी डॉक्टरों ने उन्हें कई बार कॉल किया और कोई जवाब नहीं मिला, तो अनहोनी की आशंका में उन्होंने ऋतविक के कमरे का दरवाजा खोला। अंदर का नजारा खौफनाक था—ऋतविक का शव बिस्तर पर पड़ा हुआ था और उनके हाथ की नस में एनेस्थीसिया की ड्रिप लगी हुई थी, जिसके ओवरडोज के कारण उनकी जान जा चुकी थी।

​साथी छात्रों ने तुरंत इसकी सूचना प्रॉक्टोरियल बोर्ड और लंका थाना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची फोरेंसिक टीम और पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए।

​ सुसाइड नोट में छलका दर्द: "माफ करना पापा..."

​पुलिस को मृतक डॉक्टर के कमरे से एक भावुक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जो उनके भीतर चल रहे मानसिक द्वंद्व और गहरे तनाव को बयां करता है।

माता-पिता से मांगी माफी: ऋतविक ने लिखा कि वह अपने माता-पिता का आखिरी सहारा थे, लेकिन वह उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सके। उन्होंने अपने संघर्षों का जिक्र करते हुए लिखा कि उनका जीवन इतना सरल नहीं था।


प्रेमिका को न ठहराया जाए जिम्मेदार: सुसाइड नोट में ऋतविक ने अपनी गर्लफ्रेंड का खास जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि वह बहुत अच्छी लड़की है और उसने ऋतविक के लिए बहुत कुछ किया। ऋतविक ने भावुक अपील की कि उनकी मौत के लिए उस लड़की को जिम्मेदार न ठहराया जाए, बल्कि उसका ख्याल रखा जाए।


दुनिया को कहा अलविदा: उन्होंने अपने भाई, बहन और दोस्तों से भी माफी मांगते हुए सुसाइड नोट के अंत में 'अलविदा दुनिया' लिखा।


​ जांच में जुटी पुलिस, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

​लंका थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला एनेस्थीसिया के ओवरडोज से आत्महत्या का ही लग रहा है।

पुलिस का बयान: "मौके से एक हैंडरिटन सुसाइड नोट मिला है, जिसकी लिखावट की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। मृतक के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों और समय का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच की जा रही है।"

​ बेबाक नजरिया ( Bebak 24)

​यह घटना सिर्फ एक डॉक्टर की खुदकुशी नहीं है, बल्कि देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में जूनियर डॉक्टरों पर काम के अत्यधिक दबाव, मानसिक तनाव और 'अपेक्षाओं के उस बोझ' की पोल खोलती है, जिसे युवा डॉक्टर सह नहीं पा रहे हैं। देश को डॉक्टर देने वाला संस्थान आज खुद अपने एक होनहार को खोकर गमगीन है। आखिर कब तक हमारे देश के युवा इस मानसिक अवसाद की भेंट चढ़ते रहेंगे? प्रशासन और समाज को इस पर 'बेबाक' होकर सोचने की जरूरत है।

यदि आप या आपके जानने वाले किसी भी तरह के मानसिक तनाव या अवसाद से गुजर रहे हैं, तो कृपया भारत सरकार की 'किरण' हेल्पलाइन (1800-599-0019) या 'टेली-मानस' (14416) पर संपर्क करें। मदद हमेशा उपलब्ध है।



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