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यूपी विधानसभा चुनाव 2027: सीट शेयरिंग पर कांग्रेस का बड़ा दांव, क्या सपा के 'गढ़' में आधी हिस्सेदारी ले पाएंगे अजय राय ?

by on | 2026-06-29 15:23:48

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यूपी विधानसभा चुनाव 2027: सीट शेयरिंग पर कांग्रेस का बड़ा दांव, क्या सपा के 'गढ़' में आधी हिस्सेदारी ले पाएंगे अजय राय ?

लखनऊ/वाराणसी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। एनडीए खेमे में जहां सीटों को लेकर अंदरूनी गुणा-गणित जारी है, वहीं विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन में औपचारिक बातचीत से पहले ही नूराकुश्ती और दबाव की राजनीति चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस के नए नवेले यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सूबे में पैर रखते ही ऐसा बयान दे दिया है, जिसने समाजवादी पार्टी (सपा) के थिंक टैंक को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

​राजेंद्र पाल गौतम ने साफ तौर पर 'बराबर की हिस्सेदारी' का राग अलापते हुए सपा से आधी सीटों पर चुनाव लड़ने की व्यक्तिगत इच्छा जता दी है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आखिरी फैसला शीर्ष नेतृत्व करेगा, लेकिन उनके इस बयान ने गठबंधन के भीतर भावी रार के संकेत दे दिए हैं।

​150 सीटों पर कांग्रेस की नजर, पर 'साइकिल' की रफ्तार पर ब्रेक लगाना आसान नहीं

​पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो कांग्रेस आगामी चुनाव में प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से कम से कम 150 सीटों पर अपना दावा ठोकने की रणनीति बना रही है। इसके पीछे कांग्रेस के अपने तर्क और पुराने आंकड़े हैं:

2017 का हवाला: कांग्रेस का कहना है कि जब 2017 में सपा सत्ता में थी, तब भी गठबंधन के तहत उसे 105 सीटें मिली थीं।


2024 का जोश: लोकसभा चुनाव 2024 में 'यूपी के लड़कों' की जोड़ी को जो जनसमर्थन मिला, उसके बाद कांग्रेस खुद को सूबे में मजबूत मान रही है।


लेकिन पेंच कहां फंसा है?

समाजवादी पार्टी के रणनीतिकार कांग्रेस को 70 से 80 सीटों से ज्यादा देने के मूड में कतई नहीं दिख रहे हैं। सपा का मानना है कि जमीन पर मुख्य लड़ाई उसकी और भाजपा की है, इसलिए वह बड़े भाई की भूमिका से पीछे नहीं हटेगी।

​मायावती पर कांग्रेस 'सॉफ्ट', नए सियासी समीकरणों की सुगबुगाहट?

​यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने केवल सीटों पर ही बात नहीं की, बल्कि बसपा प्रमुख मायावती को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। गौतम ने मायावती को 'बहुजन समाज की बड़ी नेता' बताते हुए उनका सम्मान करने की बात कही और साथ ही दमनकारी ताकतों के खिलाफ एकजुट होने का न्योता भी दे डाला। उन्होंने तंज भरे लहजे में यह भी कहा कि "पता नहीं उनकी क्या मजबूरी है"

​गौतम का यह दलित कार्ड और मायावती के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर यूपी की राजनीति में नए समीकरणों की तरफ इशारा कर रहा है।



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