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"साइलेंट किलर" बनी यूरोपीय हीटवेव: 21 जून के बाद 1,300 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें, WHO चीफ टेड्रोस ने दी चेतावनी

by admin@bebak24.com on | 2026-06-29 13:43:22

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"साइलेंट किलर" बनी यूरोपीय हीटवेव: 21 जून के बाद 1,300 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें, WHO चीफ टेड्रोस ने दी चेतावनी

जेनेवा/पेरिस: जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का सबसे भयावह रूप इस समय यूरोप में देखने को मिल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस गेब्रियेसस ने चेतावनी दी है कि यूरोप में गर्मियों की शुरुआत में आई अभूतपूर्व और भीषण हीटवेव (लू) सैकड़ों लोगों की मौत की वजह बन रही है।

रविवार को पूरे यूरोपीय महाद्वीप में तापमान के कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए। जर्मनी, पोलैंड और चेक रिपब्लिक में पारा ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है, जिसके बाद गर्मी का यह जानलेवा दौर अब पूर्वी यूरोप की ओर बढ़ रहा है।

1. 'साइलेंट किलर' से 1,300 से अधिक मौतें — टेड्रोस गेब्रियेसस

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (Twitter) पर एक आधिकारिक पोस्ट साझा करते हुए डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस गेब्रियेसस ने यूरोप के हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने बताया:

"21 जून के बाद से ही पूरे यूरोप में उच्च तापमान (High Temperature) से जुड़े 1,300 से ज़्यादा अतिरिक्त मौतों के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। गर्मी से होने वाले शारीरिक तनाव को अक्सर 'साइलेंट किलर' कहा जाता है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि यूरोप के घर, दफ़्तर और स्कूल ऐसे अत्यधिक तापमान को झेलने के लिए तैयार नहीं किए गए हैं।"

टेड्रोस ने दुनिया को आगाह करते हुए कहा कि यूरोप इस समय पृथ्वी का सबसे तेज़ी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है, जहां तापमान बढ़ने की रफ़्तार वैश्विक औसत की तुलना में दोगुनी है।

2. फ्रांस में घरों में होने वाली मौतों में 40% का उछाल

इस हीटवेव का सबसे घातक असर फ्रांस में देखने को मिला है। रविवार सुबह फ्रांस के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक:

  • अपेक्षा से अधिक मौतें: बीते बुधवार से लेकर अब तक फ्रांस में सामान्य मृत्यु दर की अपेक्षा करीब 1,000 अधिक मौतें दर्ज की गई हैं।

  • बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित: इन अतिरिक्त मौतों में सबसे बड़ी संख्या 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों की है, जिनका शरीर इस भीषण गर्मी और हीट स्ट्रोक को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है।

  • घरों में दम तोड़ रहे लोग: एयर कंडीशनिंग (AC) और उचित वेंटिलेशन की कमी के कारण घरों के भीतर होने वाली मौतों की संख्या में अचानक 40 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बेबाक24 टेक

यूरोप से आ रही ये खबरें इस मुगालते को तोड़ती हैं कि जलवायु परिवर्तन केवल गरीब या विकासशील देशों की समस्या है। दुनिया के सबसे आधुनिक और विकसित महाद्वीपों में से एक होने के बावजूद यूरोप का इस तरह भीषण गर्मी के आगे सरेंडर कर देना यह दिखाता है कि वहां का बुनियादी ढांचा (Infrastructure) केवल ठंड को झेलने के लिए डिजाइन किया गया था, गर्मी के लिए नहीं।

WHO चीफ टेड्रोस का इसे 'साइलेंट किलर' कहना बिल्कुल सटीक है। जब घरों के भीतर मौतें 40% बढ़ जाएं, तो समझ जाना चाहिए कि कंक्रीट के जंगल अब 'गैस चैंबर' और 'भट्टियों' में तब्दील हो रहे हैं। वैश्विक औसत से दोगुनी रफ्तार से गर्म हो रहा यूरोप यदि अब भी केवल कूटनीतिक बैठकों और कागजी कार्बन-क्रेडिट समझौतों में उलझा रहा, तो आने वाले सालों में 'यूरोपीय समर' (गर्मियां) पर्यटन के लिए नहीं, बल्कि सामूहिक त्रासदियों के लिए जानी जाएंगी। यह भारत जैसे देशों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे अपने शहरी नियोजन (Urban Planning) को समय रहते पर्यावरण के अनुकूल ढालें।



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