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राम मंदिर के बाद अब बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में भी चढ़ावे में कथित गड़बड़ी; मंदिर समिति ने दिए जांच के आदेश

by on | 2026-07-04 13:07:11

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राम मंदिर के बाद अब बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में भी चढ़ावे में कथित गड़बड़ी; मंदिर समिति ने दिए जांच के आदेश

नेशनल डेस्क (बेबाक24): अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दान पात्रों से चढ़ावा चोरी होने का सनसनीखेज मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि देश के एक और सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल से ऐसी ही चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में भी चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी और हेरफेर के गंभीर आरोप लगे हैं।

इस संवेदनशील मामले के सोशल मीडिया पर तूल पकड़ने के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने शुक्रवार (3 जुलाई 2026) को त्वरित एक्शन लेते हुए इन कथित वित्तीय अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

1. 'आरोपों को गंभीरता से लिया, दोषी कर्मचारियों से मांगा स्पष्टीकरण' — हेमंत द्विवेदी

बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस पूरे विवाद पर मंदिर प्रशासन का रुख साफ करते हुए कड़े कदम उठाने की बात कही है:

  • जांच समिति का गठन: बीकेटीसी के अध्यक्ष ने बताया कि सोशल मीडिया पर धाम के चढ़ावे को लेकर जो भी आरोप और दावे चल रहे हैं, मंदिर समिति ने उनका स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे बेहद गंभीरता से लिया है। मामले की तह तक जाने और दूध का दूध, पानी का पानी करने के लिए एक विशेष जांच समिति (Enquiry Committee) बनाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

  • कर्मचारियों पर शिकंजा: इस कथित गड़बड़ी के संदेह के घेरे में आए संबंधित विभाग के विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों से प्रशासन ने लिखित में स्पष्टीकरण (Show Cause Notice) मांगा है।

2. 'निजी सचिव' वाले दावे का खंडन; बीकेटीसी अध्यक्ष ने दी सफाई

सोशल मीडिया पर इस वित्तीय गड़बड़ी के साथ-साथ मंदिर समिति के शीर्ष नेतृत्व को भी घेरने की कोशिश की जा रही थी, जिस पर अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्थिति स्पष्ट की:

  • दावे को बताया झूठा: इंटरनेट पर यह अफवाह फैलाई जा रही थी कि चढ़ावे की इस कथित हेराफेरी में शामिल मुख्य आरोपी कर्मचारी बीकेटीसी अध्यक्ष का 'निजी सचिव' (Private Secretary) है।

  • नियमित सरकारी कर्मचारी: हेमंत द्विवेदी ने इस दावे का सिरे से खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित विवादित व्यक्ति उनका कोई पर्सनल स्टाफ या निजी सचिव नहीं है, बल्कि वह बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) का एक नियमित और स्थायी सरकारी कर्मचारी है, जिसके खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जा रही है।

बेबाक24 टेक

पहले अयोध्या का राम मंदिर और अब उत्तराखंड के चार धामों में शीर्ष स्थान रखने वाले बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम— देश के सबसे बड़े और आस्था के सर्वोच्च केंद्रों से चढ़ावे और दान पात्रों में गड़बड़ी की खबरें आना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि सनातन समाज के भरोसे पर एक बहुत बड़ा आघात है। श्रद्धालु अपनी गाढ़ी कमाई का अंश इन पवित्र धामों के विकास और धार्मिक कार्यों के लिए दान पेटी में डालते हैं, लेकिन जब वहां के नियमित सरकारी कर्मचारी ही कथित तौर पर उस श्रद्धा पर डाका डालने लगें, तो व्यवस्था का चरमराना तय है।

'बेबाक24' का मानना है कि मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी द्वारा जांच समिति बनाना एक सही प्रशासनिक कदम है, लेकिन यह जांच महज़ एक 'कागजी खानापूर्ति' बनकर नहीं रह जानी चाहिए। राम मंदिर मामले में जिस तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने 'असाधारण गंभीरता' बरतने की बात कही थी, वही नियम यहाँ भी लागू होना चाहिए। क्या देश के इन महा-मंदिरों के दान प्रबंधन (Donation Management System) को पूरी तरह से डिजिटल, पारदर्शी और अभेद्य ऑडिट के दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए? जब तक इन कथित चोरों और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ ऐसी सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी जो एक मिसाल बने, तब तक सोशल मीडिया पर हिंदू विरोधी ताकतों को सनातन संस्थाओं को बदनाम करने का बेबाक मौका मिलता रहेगा।



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