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जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का अनशन तेज: "सफाई रोकी, पोर्टेबल टॉयलेट की भी इजाजत नहीं", सहयोगियों ने वीडियो जारी कर दिल्ली पुलिस को घेरा

by admin@bebak24.com on | 2026-06-29 13:41:05

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जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का अनशन तेज: "सफाई रोकी, पोर्टेबल टॉयलेट की भी इजाजत नहीं", सहयोगियों ने वीडियो जारी कर दिल्ली पुलिस को घेरा

नई दिल्ली: नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ आंदोलन अब प्रशासनिक गतिरोध में बदल गया है। अनशन पर बैठे देश के जाने-माने शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में आए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं।

रविवार देर रात सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर दीपके ने दावा किया कि प्रशासन प्रदर्शन स्थल पर बुनियादी मानवाधिकारों और स्वच्छता की सुविधाओं को भी जानबूझकर रोक रहा है।

1. "गंदे वॉशरूम, पानी बंद और मोबाइल टॉयलेट पर भी रोक"

अभिजीत दीपके ने वीडियो पोस्ट में जंतर-मंतर की जमीनी स्थिति बयां करते हुए प्रशासन के रवैये पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा:

"हम लगातार पुलिस से निवेदन कर रहे हैं कि सोनम वांगचुक जी अनशन पर बैठे हैं और यहां पर जो दो पब्लिक वॉशरूम हैं, वे बहुत ही ज्यादा गंदे हैं। ये लोग वहां साफ-सफाई भी नहीं करवा रहे हैं, और ऊपर से पानी का कनेक्शन भी रोक रखा है।"

दीपके ने आगे मोबाइल टॉयलेट वैन को रोकने पर आपत्ति जताते हुए कहा, "सोनम वांगचुक जी की उम्र और सेहत को देखते हुए क्या उन्हें एक पोर्टेबल टॉयलेट भी नहीं मिल सकता? लेकिन इसमें भी पुलिस कह रही है कि अनुमति नहीं है। मोबाइल टॉयलेट की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है? आखिर यह सुविधाएं किसलिए होती हैं?"

2. मांग पर अड़ी सीजेपी: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक जारी रहेगा अनशन

यह भूख हड़ताल नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ देशव्यापी गुस्से का हिस्सा है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और सोनम वांगचुक का साफ स्टैंड है कि देश के लाखों होनहार छात्रों के भविष्य के साथ हुए इस बड़े खिलवाड़ की जिम्मेदारी शीर्ष नेतृत्व को लेनी होगी। संगठन ने दोहराया है कि यह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते।

बेबाक24 टेक

लद्दाख की जमा देने वाली ठंड में 21 दिनों तक केवल पानी और नमक पर रहने वाले सोनम वांगचुक के लिए जंतर-मंतर की तपिश और प्रशासनिक बेरुखी कोई नई बात नहीं है। लेकिन देश की राजधानी के आधिकारिक प्रदर्शन स्थल पर पानी रोकना और स्वच्छता जैसी बुनियादी मानवीय जरूरतों (पोर्टेबल टॉयलेट) के लिए मना करना कानून-व्यवस्था के नाम पर की जा रही ज्यादती को दर्शाता है।

अभिजीत दीपके द्वारा जारी किया गया वीडियो यह साफ करता है कि प्रशासन इस आंदोलन को सुरक्षा या अनुमति के तकनीकी पेंच में फंसाकर कमजोर करना चाहता है। लेकिन इतिहास गवाह है कि जब आप किसी शांतिपूर्ण और नैतिक आंदोलन की बुनियादी रसद और मानवीय सुविधाएं रोकते हैं, तो जनता की सहानुभूति प्रदर्शनकारियों के साथ और मजबूत हो जाती है। सोनम वांगचुक की सेहत से खिलवाड़ करना दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकता है; इस गतिरोध को कड़ाई के बजाय बातचीत से सुलझाना ही समझदारी होगी।



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