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संगम की रेती पर आस्था का 'महाकुंभ', जब आसमान से बरसे फूल!

by on | 2026-01-18 17:10:26

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संगम की रेती पर आस्था का 'महाकुंभ', जब आसमान से बरसे फूल!

प्रयागराज : सनातन संस्कृति की शक्ति और अटूट आस्था का वो मंजर, जिसने आज पूरी दुनिया को टकटकी लगाने पर मजबूर कर दिया। अवसर था मौनी अमावस्या का और गवाह बना तीर्थराज प्रयागराज। जब त्रिवेणी के संगम तट पर लाखों सिर श्रद्धा से झुके, तो प्रशासन ने भी पुष्पवर्षा कर भक्तों का भव्य अभिनंदन किया।

आस्था का सैलाब: 'हर-हर गंगे' से गुंजायमान हुआ आकाश

ब्रह्म मुहूर्त की पहली किरण के साथ ही संगम की लहरों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की पावन धाराओं में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का ऐसा हुजूम उमड़ा कि जहां तक नजर जाए, बस भक्त ही भक्त नजर आए। जयकारों की गूंज और भक्ति के उल्लास ने संगम क्षेत्र को पूरी तरह शिवमय और गंगामय कर दिया।

मौन साधना और दान का महापुण्य

धार्मिक मर्यादाओं की कसौटी पर मौनी अमावस्या का दिन सबसे कठिन और फलदायी माना जाता है।

 * मौन व्रत: हजारों साधु-संतों और कल्पवासियों ने मौन रहकर अपनी साधना को सिद्ध किया।

 * महादान: स्नान के बाद घाटों पर दान-पुण्य का अटूट सिलसिला चलता रहा।

 * रिकॉर्ड भीड़: प्रशासन के आंकड़ों की मानें तो पिछले 24 घंटों में करीब 1.5 करोड़ से अधिक लोग डुबकी लगा चुके हैं, और यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।

बेबाक की टिप्पणी: यह भीड़ महज इंसानों का जमावड़ा नहीं है, बल्कि यह उस सनातन संस्कृति की जीवंत गवाही है जिसे मिटाने की कोशिशें सदियों से नाकाम रही हैं।


सुरक्षा के पुख्ता पहरे, व्यवस्था बेमिसाल

इतने बड़े जनसैलाब को संभालना प्रशासन के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था, लेकिन पुलिस और स्वयंसेवकों की मुस्तैदी ने इस 'स्नान पर्व' को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित बनाए रखा। आसमान से हुई पुष्पवर्षा ने न केवल श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि धर्म और शासन जब साथ मिलते हैं, तो नजारा अलौकिक होता है।




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