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सियासी अखाड़ा बना 'खेल महाकुंभ': चंदे पर रार, रोजगार पर तकरार

by admin@bebak24.com on | 2025-12-20 00:00:26

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सियासी अखाड़ा बना 'खेल महाकुंभ': चंदे पर रार, रोजगार पर तकरार


​सोनभद्र। जनपद की राजनीति इन दिनों सोशल मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लहू-लुहान हो रही है। मुद्दा है रॉबर्ट्सगंज के भाजपा विधायक भूपेश चौबे का 'विधायक खेल महाकुंभ' और उसके लिए जुटाया जा रहा फंड। एक तरफ विधायक इसे प्रतिभाओं को निखारने का मंच बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ विरोधियों और स्थानीय युवाओं ने इसे 'रोजगार की अनदेखी' और 'धन की बर्बादी' का नाम देकर मोर्चा खोल दिया है।

​NCL की 'पर्ची' और सोशल मीडिया का उबाल

​विवाद की जड़ में वह तस्वीर है, जिसमें विधायक भूपेश चौबे नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) के अधिकारियों के साथ CSR फंड को लेकर चर्चा करते दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर अनुराग पांडेय नामक यूजर ने सवाल उठाया कि जो NCL "क्षेत्र में न होने" का बहाना बनाकर स्थानीय युवाओं को नौकरी देने से पल्ला झाड़ लेती है, वह विधायक के आयोजन के लिए 'तिजोरी' कैसे खोल रही है?

​सोशल मीडिया पर तंज और गुस्से की लहर है:

​राजरोशन पांडेय: "पांच साल काम नदारद, चुनाव पास आते ही आयोजनों का दिखावा।"

​उत्कर्ष पांडेय: "नौकरी मांगो तो राजनीति में जाने की सलाह दी जाती है।"

​CSR और DMF फंड के दुरुपयोग के आरोप

​बहस सिर्फ चंदे तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले के विकास के लिए आरक्षित DMF (Distict Mineral Foundation) और उद्योगों के CSR (Corporate Social Responsibility) फंड का इस्तेमाल जनहित के बजाय राजनीतिक ब्रांडिंग के लिए किया जा रहा है। युवाओं का कहना है कि अगर यही सक्रियता रोजगार सृजन और तकनीकी प्रशिक्षण केंद्रों के लिए दिखाई जाती, तो जिले की तस्वीर कुछ और होती।

​विधायक का पलटवार: "प्रतिभाओं को मौका देना हमारा लक्ष्य"

​इस पूरे विवाद पर बेबाक24 के रिपोर्टर अजय सिंह ने जब विधायक भूपेश चौबे से उनका पक्ष जाना, तो उन्होंने बड़ी बेबाकी से अपनी बात रखी।

​"हम पिछले साल की तरह इस बार भी प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मंच दे रहे हैं। इसके लिए जिले के उद्योगों से सहयोग (चंदा) लेना हमारा हक है। रही बात रोजगार की, तो जो शिक्षित और योग्य हैं, उन्हें रोजगार मिल रहा है।"

— भूपेश चौबे, विधायक, रॉबर्ट्सगंज

​निष्कर्ष: दिखावा या विकास?

​अटल बिहारी वाजपेयी शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित हो रहे इस खेल महाकुंभ ने जिले की सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। समर्थक इसे खेल भावना का उत्सव कह रहे हैं, तो विरोधी इसे केवल 'चुनावी स्टंट'। अब सवाल यह है कि क्या ये खेल आयोजन सोनभद्र की माटी के युवाओं का भविष्य संवारेंगे, या फिर ये केवल चंदे और चर्चाओं तक ही सीमित रह जाएंगे?



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