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अमर सेनानी 'जिंदा शहीद' स्व. सीताराम राय की 28वीं पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

by on | 2026-11-03 14:26:31

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अमर सेनानी 'जिंदा शहीद' स्व. सीताराम राय की 28वीं पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि


​गाजीपुर । देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा देने वाले और इतिहास के पन्नों में 'जिंदा शहीद' के रूप में अमर हुए स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व प्रधानाचार्य स्व. सीताराम राय की 28वीं पुण्यतिथि पर आज उन्हें पूरा क्षेत्र नम आंखों से याद कर रहा है।

​'करो या मरो' के आंदोलन में लिखी थी शौर्य गाथा

​प्राप्त विवरण के अनुसार, 18 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के 'करो या मरो' और 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' के आह्वान से पूरा देश सुलग रहा था। इसी क्रम में शेरपुर के वीर सपूत शिवपूजन राय के नेतृत्व में देशभक्तों का एक जत्था मोहम्मदाबाद तहसील मुख्यालय पर तिरंगा फहराने के लिए उमड़ पड़ा था। इस दौरान अंग्रेजों की क्रूर गोलीबारी में कई सपूतों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, जबकि सीताराम राय को तीन से चार गोलियां लगीं।

​जब मौत को चकमा देकर जीवित लौटे 'जिंदा शहीद'

​अंग्रेज सैनिकों ने मृत समझकर स्व. सीताराम राय के शरीर को पास की बेसो नदी में फेंक दिया था। परंतु, कुदरत को कुछ और ही मंजूर था; चमत्कारी रूप से वे जीवित बच निकले। इस अदम्य साहस और पुनर्जीवन ने उन्हें इतिहास में हमेशा के लिए 'जिंदा शहीद' के नाम से अमर कर दिया। इस घटना के बाद गाजीपुर के तत्कालीन ब्रिटिश डीएम मुनरो ने लंदन को रिपोर्ट भेजी थी कि अब भारत को आजाद करना अनिवार्य हो गया है, क्योंकि यहाँ का युवा अपनी छाती पर गोलियां खाने से भी पीछे नहीं हट रहा है।

​पौत्र मनीष कुमार राय ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

​पुण्यतिथि के इस पवित्र अवसर पर उनके पौत्र मनीष कुमार राय (ग्राम व पोस्ट- शेरपुर कलां, गाजीपुर) ने अपने दादाजी को शत्-शत् नमन करते हुए कहा कि उनका त्याग, संघर्ष और असीम देशप्रेम आने वाली हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का एक दीपस्तंभ बना रहेगा।

​॥ विनय श्रद्धांजलि ॥

“आपसी शोहरत किसे मिली है, यह तो वक्त की कहानी है,

जिसे तारीख ने 'जिंदा शहीद' पुकारा, वह शख्स नहीं, देश की अमर निशानी है।”


​गाजीपुर जिले के शेरपुर कलां गाँव में हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि और 18 अगस्त के वीर शहीदों की स्मृति में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जो आज भी नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति की अलख जगा रहे हैं।



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