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दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हवा का कहर, दिल्ली का एक्यूआई 451 पार

by admin@bebak24.com on | 2026-11-03 12:53:50

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दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हवा का कहर, दिल्ली का एक्यूआई 451 पार

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर की हवा जहरीली हो गई है। मंगलवार सुबह 8 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 451 दर्ज किया गया, जबकि नोएडा के सेक्टर-62 में यह 404 तक पहुंच गया। दिल्ली के रोहिणी, पंजाबी बाग और बवाना समेत कई इलाकों में भी एक्यूआई 400 के पार रहा। प्रदूषण के गंभीर स्तर पर पहुंचने से लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है और नियंत्रण के लिए ग्रेप-2 के प्रतिबंध लागू किए गए हैं।

दिल्ली के कई इलाकों में हालात गंभीर

दिल्ली के निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। रोहिणी में एक्यूआई 429, पंजाबी बाग में 424 और बवाना में 408 दर्ज किया गया। ये तीनों इलाके गंभीर श्रेणी में रहे।

वहीं, पटपड़गंज में एक्यूआई 379, आरके पुरम में 374, आईटीओ में 373, अक्षरधाम के आसपास 373, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 355, ओखला फेज-2 और चांदनी चौक में 352 तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में 328 दर्ज किया गया।

कुछ इलाकों में स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर रही। दिल्ली हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर एक्यूआई 287, आनंद विहार में 279, उत्तम नगर में 274 और आईएमडी लोधी रोड पर 226 दर्ज किया गया।

नोएडा में भी हवा की गुणवत्ता बिगड़ी

नोएडा के कई क्षेत्रों में भी प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति तक पहुंच गया है। सेक्टर-62 में एक्यूआई 404 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में है। सेक्टर-39 में यह 365 और सेक्टर-150 में 343 रहा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दिल्ली के साथ-साथ नोएडा के निवासियों को भी प्रदूषित हवा का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रेप-2 के प्रतिबंध लागू, सीमाओं पर जांच तेज

दिल्ली में एक्यूआई 300 के पार पहुंचने के बाद वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) के दूसरे चरण के प्रतिबंध लागू किए गए हैं।

प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नियंत्रण और उत्सर्जन संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश और हरियाणा से लगी दिल्ली की सीमाओं पर पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है। वाहनों की जांच भी तेज कर दी गई है।

बेबाक24 टेक

दिल्ली-एनसीआर में हर साल सर्दियों से पहले प्रदूषण का बढ़ना अब एक मौसमी समस्या भर नहीं, बल्कि शासन और प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। दिल्ली का औसत एक्यूआई 451 और नोएडा के सेक्टर-62 में 404 तक पहुंचना बताता है कि समस्या केवल कुछ प्रदूषित इलाकों तक सीमित नहीं रही।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रदूषण का संकट हर साल लगभग इसी समय सामने आता है, तो स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं निकल पाया? सीमाओं पर वाहनों की जांच और अस्थायी प्रतिबंध जरूरी हो सकते हैं, लेकिन क्या इतना भर पर्याप्त है? निर्माण कार्यों की धूल, वाहनों का उत्सर्जन और अन्य प्रदूषण स्रोतों पर लगातार नियंत्रण के बिना हालात बदलना मुश्किल है। साफ हवा कोई मौसमी सुविधा नहीं, नागरिकों का बुनियादी अधिकार है।



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