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जालौन के वकील की हत्या: 10 लाख की सुपारी, अपहरण के बाद दबाया गला

by admin@bebak24.com on | 2026-11-03 12:54:55

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जालौन के वकील की हत्या: 10 लाख की सुपारी, अपहरण के बाद दबाया गला

जालौन | बेबाक24 न्यूज़

उत्तर प्रदेश के जालौन में कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार (68) की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, 32 बीघा जमीन के विवाद में उनकी हत्या कराने के लिए 10 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। इस साजिश में मैनपुरी के रहने वाले और फिलहाल कानपुर में रह रहे ठेकेदार इंद्रजीत यादव का नाम सामने आया है। पुलिस ने इंद्रजीत समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कथित सुपारी लेने वाले मोनू यादव की तलाश जारी है। उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

जमीन विवाद में रची गई हत्या की साजिश

पुलिस के अनुसार, 32 बीघा यानी करीब 6 हेक्टेयर जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद में ठेकेदार इंद्रजीत यादव ने कानपुर के वरुण विहार निवासी मोनू यादव को अधिवक्ता की हत्या के लिए 10 लाख रुपये देने का सौदा किया था।

जांच में सामने आया है कि मोनू ने कानपुर के तीन कथित शूटरों सर्वेश शुक्ला, आशीष विश्वकर्मा और केशव कटियार के जरिए 31 अक्टूबर को गयादीन अहिरवार का अपहरण कराया। पुलिस ने तीनों शूटरों और सुपारी देने के आरोपी इंद्रजीत यादव को गिरफ्तार कर लिया है।

अपहरण के बाद ही दबा दिया था गला

पुलिस के मुताबिक, अधिवक्ता को कार में बैठाने के बाद आरोपी करीब एक किलोमीटर तक उरई की ओर गए। इसके बाद उन्होंने अचानक कार कानपुर की तरफ मोड़ दी। गयादीन अहिरवार ने इसका विरोध किया तो मोनू और एक अन्य आरोपी ने उनका मुंह दबा दिया, जबकि तीसरे आरोपी ने उनका गला कस दिया। इससे वह अचेत हो गए।

इसके बाद आरोपी उन्हें कानपुर के गुजैनी थाना क्षेत्र में नहर के पास ले गए। पुलिस का कहना है कि वहां कार से जैक निकालकर उनके सिर पर कई वार किए गए, जिससे उनकी मौत हो गई। वारदात के बाद शव नहर में फेंक दिया गया। रविवार सुबह पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर शव बरामद किया।

व्हाट्सएप बातचीत से खुली साजिश की कड़ी

पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद रावत के अनुसार, मोनू के पिता अजय के मोबाइल फोन से इंद्रजीत और मोनू के बीच घटना से पहले और बाद की व्हाट्सएप बातचीत मिली है। पुलिस इसी बातचीत को हत्या की साजिश और सुपारी दिए जाने से जुड़ा अहम साक्ष्य मान रही है।

पुलिस के मुताबिक, मोनू ने इंद्रजीत और शूटरों के बीच संपर्क कराया था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। मोनू के पिता अजय की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने साजिश में सहयोग करने के आरोप में उन्हें भी गिरफ्तार किए जाने की बात कही है।

पुलिस पर फायरिंग, दो आरोपी घायल

अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. ईशान सोनी के मुताबिक, अपहरण में इस्तेमाल स्विफ्ट डिजायर कार को सोहरापुर के जंगलों में छिपाया गया था। सोमवार को कालपी पुलिस और स्वाट टीम आरोपियों को लेकर मदारीपुर रोड स्थित खन्ना फार्म के पास पहुंची थी। यहां घटना में इस्तेमाल सामान की बरामदगी के दौरान सर्वेश शुक्ला और आशीष विश्वकर्मा ने छिपाकर रखे तमंचों से पुलिस टीम पर गोली चला दी।

पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों आरोपियों के पैर में गोली लगी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। मौके से 2 तमंचे, 5 कारतूस, घटना में इस्तेमाल स्विफ्ट डिजायर कार, खून से सना पाना रिंच और जैक बरामद किए गए हैं।

अधिवक्ताओं में आक्रोश, 5 करोड़ मुआवजे की मांग

गयादीन अहिरवार की हत्या के विरोध में कालपी समेत कई जिलों के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। कालपी में सोमवार को वकीलों ने काम नहीं किया और अगले 2 दिनों तक भी न्यायिक कार्य से विरत रहने का फैसला लिया।

जिला बार संघ की आमसभा में मृतक के परिवार को 5 करोड़ रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई गई। हरदोई, कन्नौज, कानपुर देहात, औरैया, महोबा और कानपुर में भी अधिवक्ताओं ने विरोध जताते हुए अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की।

बेटियों ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल

अंतिम संस्कार के दौरान गयादीन अहिरवार की बेटियों संघमित्रा और मणि मित्रा ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोपियों को फांसी की सजा दिलाने की मांग करते हुए कहा कि यदि अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती, तो आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं।

प्रशासन ने अंतिम संस्कार के दौरान किसी तरह का विवाद न हो, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई थी। मौके पर एसडीएम विनय कुमार मौर्य, एएसपी डॉ. ईशान सोनी, सीओ जालौन एके सिंह समेत कई थानों की पुलिस मौजूद रही।

बेबाक24 टेक

एक वरिष्ठ अधिवक्ता, जो चौथी बार बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए थे, उनका दिनदहाड़े अपहरण और फिर दूसरे जिले में हत्या कर दिया जाना कानून-व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े करता है। इस मामले में 10 लाख रुपये की कथित सुपारी, कई आरोपियों की भूमिका और हत्या के बाद शव को नहर में फेंकने की बात पुलिस जांच में सामने आई है।

लेकिन सबसे अहम सवाल यह है कि क्या जमीन के विवाद में किसी व्यक्ति की हत्या की साजिश इतनी आसानी से अंजाम तक पहुंच सकती है? पुलिस ने गिरफ्तारियां की हैं, लेकिन मुख्य आरोपी मोनू की गिरफ्तारी और साजिश में शामिल हर व्यक्ति की भूमिका उजागर होना अभी बाकी है। अधिवक्ताओं का आक्रोश भी केवल एक परिवार के लिए न्याय की मांग नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसे का सवाल है। अब जांच की निष्पक्षता, सभी आरोपियों की जवाबदेही और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना जरूरी है।



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