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एशियाई खेल 2026: 0.6 अंक से चूका स्वर्ण, इलावेनिल ने जीता रजत; जानें उनका सफर

by admin@bebak24.com on | 2026-09-20 13:51:47

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एशियाई खेल 2026: 0.6 अंक से चूका स्वर्ण, इलावेनिल ने जीता रजत; जानें उनका सफर

नागोया | बेबाक24 न्यूज़

आइची-नागोया एशियाई खेल 2026 में भारत को दूसरा पदक निशानेबाजी से मिला है। महिला 10 मीटर एयर राइफल की व्यक्तिगत स्पर्धा में भारतीय निशानेबाज इलावेनिल वलारिवान ने 252.4 अंक के साथ रजत पदक जीता। वह स्वर्ण पदक से सिर्फ 0.6 अंक पीछे रहीं।

अंतिम क्षणों में बदला मुकाबला

इलावेनिल ने फाइनल की शुरुआत से ही मजबूत प्रदर्शन किया और लंबे समय तक शीर्ष स्थान पर बनी रहीं। अंतिम तीन निशानों में जापान की हिनाता ताइची ने बढ़त बना ली। हिनाता ने 253.0 अंक के साथ स्वर्ण जीता, जबकि दक्षिण कोरिया की हियोजिन बान 230.4 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।

इसी स्पर्धा के फाइनल में पहुंची दूसरी भारतीय निशानेबाज सोनम मस्कर 6वें स्थान पर रहीं। उन्होंने 634.1 अंक के साथ फाइनल में जगह बनाई थी।

इलावेनिल का दूसरा रजत

इलावेनिल का इस एशियाई खेल में यह दूसरा रजत पदक है। इससे पहले उन्होंने सोनम मस्कर और विदर्सा विनोद के साथ महिला 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में भी रजत जीता था।

इस तरह भारत के दोनों पदक अब तक निशानेबाजी से आए हैं और दोनों रजत हैं।

उधार की राइफल से शुरू हुआ सफर

इलावेनिल का निशानेबाजी तक पहुंचने का सफर किसी तय योजना का हिस्सा नहीं था। 2 अगस्त 1999 को तमिलनाडु के कुड्डालोर में जन्मीं इलावेनिल का परिवार उनके बचपन में गुजरात के अहमदाबाद चला गया था।

बचपन में उनकी रुचि दौड़ और दूसरे खेलों में थी। वह धाविका रहीं और जूडो तथा बैडमिंटन भी खेला। करीब 12-13 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार एयर राइफल से अभ्यास करते एक खिलाड़ी को देखा। जिज्ञासा में उन्होंने राइफल उठाई और यहीं से निशानेबाजी का सफर शुरू हो गया।

15 साल की उम्र में बदली दिशा

2014 में इलावेनिल के माता-पिता ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें निशानेबाजी को गंभीरता से अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। 15 साल की उम्र में उन्होंने ओलंपिक पदक विजेता गगन नारंग की अकादमी में प्रशिक्षण शुरू किया।

कोच नेहा चावन के मार्गदर्शन में उन्होंने कड़ा अभ्यास किया। कई बार उनका प्रशिक्षण प्रतिदिन 10 घंटे तक चलता था। इसके साथ उन्होंने पढ़ाई भी जारी रखी और गुजरात विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

जूनियर स्तर से विश्व की शीर्ष निशानेबाज तक

2018 में इलावेनिल ने सिडनी में जूनियर विश्व कप में व्यक्तिगत स्वर्ण जीता और 631.4 अंक के साथ जूनियर विश्व रिकॉर्ड बनाया। अगले साल उन्होंने सीनियर स्तर पर भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं।

2019 में रियो डी जेनेरियो विश्व कप में 10 मीटर एयर राइफल का स्वर्ण जीतकर वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत की तीसरी महिला निशानेबाज बनीं। उसी वर्ष उन्होंने विश्व कप फाइनल में भी स्वर्ण जीता और महिला 10 मीटर एयर राइफल की विश्व रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया।

ओलंपिक अनुभव के बाद एशियाई खेलों में पदक

इलावेनिल ने टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया, हालांकि दोनों बार व्यक्तिगत पदक उनके हाथ नहीं आया। इसके बावजूद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन जारी रखा। 2022 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

2025 में उन्होंने कजाकिस्तान के श्यामकेंट में एशियाई निशानेबाजी चैंपियनशिप में व्यक्तिगत और मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।

अब आइची-नागोया एशियाई खेलों में दो रजत पदक जीतकर इलावेनिल ने अपने पदकों की सूची में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ दी है।

बेबाक24 की राय

इलावेनिल की उपलब्धि सिर्फ 0.6 अंक से स्वर्ण चूकने की कहानी नहीं है। एक संयोग से शुरू हुआ निशानेबाजी का सफर जूनियर विश्व रिकॉर्ड, विश्व नंबर-1 रैंकिंग और अब एशियाई खेलों के दो रजत पदकों तक पहुंच चुका है। उनकी यात्रा भारतीय निशानेबाजी में निरंतर प्रशिक्षण और लंबे अंतरराष्ट्रीय अनुभव के महत्व को भी दिखाती है।



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