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भारत-चीन संबंधों में नरमी के संकेत, सीमा विवाद अभी बरकरार

by on | 2026-09-19 10:35:10

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भारत-चीन संबंधों में नरमी के संकेत, सीमा विवाद अभी बरकरार

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच 2026 में संबंधों को सामान्य करने की दिशा में कुछ कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं। उच्चस्तरीय बातचीत, संपर्क बहाली और कुछ यात्राओं तथा व्यापारिक गतिविधियों में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन इन्हें सीमा विवाद के समाधान के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी।

गलवां के बाद बदले हालात

2020 की गलवां झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव आया था। इससे पहले भी 1962 के युद्ध के बाद नाथूला-चो ला, सुमदोरोंग चू, दोकलाम और तवांग समेत कई मौकों पर सीमा पर तनाव की स्थिति बनी।

इन घटनाओं के बावजूद हाल के समय में दोनों पक्षों के बीच सैन्य और कूटनीतिक संवाद फिर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। गश्त और सीमा पर शांति बनाए रखने से जुड़े प्रयासों के साथ द्विपक्षीय संपर्क बढ़ाने की कोशिश भी हुई है।

संपर्क और यात्रा बहाली के संकेत

भारत-चीन संबंधों में सुधार के संकेत कुछ व्यावहारिक कदमों में भी दिखाई दिए हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, लिपुलेख दर्रे के जरिए व्यापार और हवाई सेवाओं को फिर शुरू करने जैसी गतिविधियों ने दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने की संभावना मजबूत की है।

भारत ने चीनी पेशेवरों के लिए व्यावसायिक वीजा नियमों में भी कुछ राहत दी है। इसका उद्देश्य भारतीय उद्योगों के लिए आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता और कारोबारी संपर्क को सुगम बनाना बताया गया है।

हालांकि, सीमा पर अभी भी दोनों देशों की बड़ी सैन्य तैनाती बनी हुई है। इससे साफ है कि राजनीतिक संवाद में सुधार के बावजूद आपसी विश्वास पूरी तरह बहाल नहीं हुआ है।

सीमा विवाद सबसे बड़ी चुनौती

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद कई दशकों पुराना है। पश्चिमी क्षेत्र में अक्साई चिन, मध्य क्षेत्र के कुछ इलाकों और पूर्वी क्षेत्र में अरुणाचल प्रदेश से जुड़े दावों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद हैं।

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैन्य ढांचे और सैनिकों की स्थिति भी इस विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। चीन की ओर से सैन्य तैनाती और ढांचे कम करने से जुड़ी खबरों की पुष्टि होने पर इसे तनाव घटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

व्यापारिक संबंधों पर भी नजर

राजनीतिक मतभेदों के बावजूद चीन भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में बना हुआ है। दोनों देशों के लिए आर्थिक दबाव और बदलती वैश्विक व्यापार व्यवस्था महत्वपूर्ण चुनौती है।

ब्रिक्स के मंच पर विकासशील देशों के बीच व्यापार और वित्तीय सहयोग बढ़ाने की कोशिशों ने भी भारत-चीन संबंधों को एक व्यापक वैश्विक संदर्भ दिया है। हालांकि, आर्थिक सहयोग अपने आप में सीमा विवाद का समाधान नहीं करता।

आगे की राह

भारत और चीन के बीच मौजूदा घटनाक्रम को संबंधों में पूर्ण बदलाव के बजाय संवाद और तनाव कम करने की प्रक्रिया के रूप में देखना अधिक उचित होगा। सीमा विवाद के स्थायी समाधान के लिए दोनों पक्षों के बीच निरंतर बातचीत, सैन्य तनाव में कमी और आपसी विश्वास बहाली जरूरी होगी।

बेबाक24 की राय

भारत-चीन संबंधों में संवाद और संपर्क का बढ़ना महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, लेकिन इसे सीमा विवाद के समाधान से अलग रखकर देखना जरूरी है। आने वाले समय में असली कसौटी यह होगी कि दोनों देश सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के साथ विवादित मुद्दों पर कितनी ठोस प्रगति कर पाते हैं।



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