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तृणमूल कांग्रेस ने भेजे नए नाम-चिह्न, आयोग के फैसले पर जताया विरोध

by admin@bebak24.com on | 2026-09-18 13:33:04

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तृणमूल कांग्रेस ने भेजे नए नाम-चिह्न, आयोग के फैसले पर जताया विरोध

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

निर्वाचन आयोग के अंतरिम आदेश के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने आगामी उपचुनाव के लिए नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प आयोग को भेज दिए हैं। पार्टी ने यह कदम आयोग के फैसले का विरोध करते हुए उठाया है। अब नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस की 28 साल पुरानी चुनावी पहचान के स्थान पर नया चिह्न दिखाई दे सकता है।

निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया था। आयोग ने दोनों पक्षों से शुक्रवार सुबह 11 बजे तक अलग नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प देने को कहा था।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने गुरुवार रात आयोग को अपना जवाब भेजा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नए विकल्प भेजते समय फैसले पर कड़ा विरोध भी दर्ज कराया गया है। आयोग अब उपचुनाव के लिए उपलब्ध चुनाव चिह्नों में से दोनों गुटों को अलग-अलग चिह्न आवंटित करेगा।

उपचुनाव के कारण तत्काल फैसला

नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। आयोग ने कहा है कि दोनों गुटों के बीच संगठनात्मक विवाद पर अंतिम निर्णय की प्रक्रिया पूरी होने में समय लग सकता है। इसलिए उपचुनाव को देखते हुए फिलहाल अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है।

28 साल पुरानी पहचान पर संकट

तृणमूल कांग्रेस की स्थापना 1998 में हुई थी। इसके बाद ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न पार्टी की प्रमुख राजनीतिक पहचान बन गया। अब पहली बार पार्टी के भीतर विभाजन के बाद इस चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगी है।

पार्टी के भीतर विवाद विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ। बागी विधायकों के एक गुट ने रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अलग संगठनात्मक दावा पेश किया, जबकि ममता बनर्जी गुट ने मौजूदा संगठन को वैध बताया। विवाद बाद में निर्वाचन आयोग तक पहुंच गया।

ममता गुट का कहना है कि पार्टी का संविधान पदाधिकारियों का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित करता है और 2022 में हुए संगठनात्मक चुनाव के आधार पर मौजूदा व्यवस्था 2027 तक प्रभावी है। दूसरी ओर, विरोधी गुट ने राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल समाप्त होने का दावा किया है।

अब आगे क्या होगा

आयोग के अंतरिम आदेश के बाद दोनों गुटों को उपचुनाव में अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना होगा। स्थायी रूप से पार्टी का नाम और मूल चुनाव चिह्न किस गुट के पास रहेगा, इस पर अंतिम फैसला आगे की प्रक्रिया के बाद होगा।

बेबाक24 की राय

आगामी उपचुनाव तृणमूल कांग्रेस के लिए केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि पार्टी की राजनीतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण चरण भी बन गया है। फिलहाल आयोग की अंतरिम व्यवस्था के कारण दोनों गुटों को नई पहचान के साथ मतदाताओं के बीच जाना होगा।



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