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टीएमसी के नाम-चिह्न पर रोक, दोनों गुटों को अलग पहचान

by on | 2026-09-18 13:28:11

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टीएमसी के नाम-चिह्न पर रोक, दोनों गुटों को अलग पहचान

कोलकाता | बेबाक24 न्यूज़

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव तक ममता बनर्जी और रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों गुट तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

निर्वाचन आयोग ने दोनों पक्षों से शुक्रवार सुबह 11 बजे तक अपने-अपने गुट के लिए अलग नाम और चुनाव चिह्न का प्रस्ताव देने को कहा है। दोनों गुटों को उपचुनाव के लिए अधिसूचित चुनाव चिह्नों की सूची में से अलग-अलग चिह्न आवंटित किए जाएंगे।

आयोग के अनुसार, उसके सामने उपलब्ध दस्तावेजों और सूचनाओं से तृणमूल कांग्रेस में दो प्रतिद्वंद्वी गुटों की स्थिति सामने आई है। दोनों पक्ष स्वयं को वास्तविक पार्टी बता रहे हैं। इसी आधार पर चुनाव चिह्न संबंधी नियमों के तहत अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में बड़े पैमाने पर टूट की स्थिति बनी। रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने अलग संगठनात्मक दावा पेश किया और अरूप रॉय को पार्टी अध्यक्ष घोषित किया। दूसरी ओर ममता बनर्जी गुट ने अपने संगठन और पदाधिकारियों को वैध बताया।

ममता बनर्जी पक्ष का कहना है कि पार्टी का संविधान पदाधिकारियों का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित करता है और पिछला संगठनात्मक चुनाव 2022 में हुआ था। इसके आधार पर उनका दावा है कि मौजूदा पदाधिकारियों का कार्यकाल 2027 तक है।

वहीं रितब्रत गुट ने राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल पहले ही समाप्त होने का दावा करते हुए अपने पक्ष में हुए संगठनात्मक फैसलों को आधार बनाया है। इसी विवाद को लेकर दोनों पक्ष निर्वाचन आयोग के सामने पहुंचे थे।

उपचुनाव पर सीधा असर

नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। दोनों गुटों ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के साथ अपने उम्मीदवार उतारे थे। आयोग के अंतरिम आदेश के बाद अब दोनों पक्षों को अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा।

ममता बनर्जी पक्ष ने आयोग के आदेश पर आपत्ति जताई है। पार्टी नेता कल्याण बनर्जी ने ममता को पार्टी की संस्थापक बताते हुए कहा कि पार्टी की वास्तविक पहचान और चुनाव चिह्न पर फैसला तथ्यों और संगठनात्मक प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।

दूसरी ओर रितब्रत बनर्जी ने निर्वाचन आयोग को सर्वोच्च संस्था बताते हुए उसके निर्णय पर भरोसा जताया है।

बेबाक24 की राय

निर्वाचन आयोग का यह आदेश फिलहाल अंतिम संगठनात्मक फैसला नहीं है, बल्कि आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम व्यवस्था है। अब दोनों गुटों के लिए नई पहचान और चुनाव चिह्न तय होना उपचुनावी मुकाबले का महत्वपूर्ण पहलू रहेगा।



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