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विजय माल्या का दर्द: बोले- कॉकरोच होता तो शायद जिंदगी बेहतर होती

by admin@bebak24.com on | 2026-09-10 11:40:00

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विजय माल्या का दर्द: बोले- कॉकरोच होता तो शायद जिंदगी बेहतर होती

लंदन | बेबाक24 न्यूज़

भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कारोबारी विजय माल्या ने एक बार फिर अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताया है। लंदन में रह रहे माल्या ने अपने ऊपर लगे आरोपों और भारत न लौटने के सवालों पर सफाई देते हुए दावा किया कि बैंकों को 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम लौटाई जा चुकी है।

बोले- इंसान होने से बेहतर कॉकरोच होता

माल्या ने सामाजिक माध्यम पर लगातार कई संदेश साझा किए। उन्होंने अपने खिलाफ हुए कथित अन्याय का जिक्र करते हुए कटाक्ष किया कि परिस्थितियों को देखते हुए कभी-कभी उन्हें लगता है कि यदि वह कॉकरोच होते तो शायद उनकी जिंदगी बेहतर होती।

उनका कहना है कि लगातार उन्हें भगोड़ा और धोखाधड़ी करने वाला बताना उचित नहीं है, जबकि उनके दावे के मुताबिक बैंकों का बकाया पैसा वापस किया जा चुका है।

14,000 करोड़ की वसूली पर क्या कहा?

माल्या ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से बंबई उच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे का हवाला दिया। उनका दावा है कि इस दस्तावेज में 2021 के दौरान 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बैंकों को दिए जाने की बात कही गई थी।

उन्होंने लोगों से अपील की कि उनके बयानों के बजाय अदालत में दाखिल दस्तावेजों को देखा जाए। हालांकि, माल्या के इन दावों और उनकी कानूनी स्थिति पर अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगा।

भारत लौटने पर भी दी सफाई

माल्या ने भारत नहीं लौटने के सवाल पर कहा कि वह 1992 से ब्रिटेन के स्थायी निवासी हैं और वर्तमान में कानूनी कारणों से ब्रिटेन छोड़ नहीं सकते। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें भारत आने से इनकार करने वाला भगोड़ा बताना सही नहीं है।

वहीं, फरवरी 2026 में बंबई उच्च न्यायालय ने माल्या की ओर से राहत मांगने पर कड़ा रुख अपनाया था। अदालत ने कहा था कि जो व्यक्ति जानबूझकर न्यायिक प्रक्रिया से बच रहा हो, वह समानता के आधार पर राहत का दावा नहीं कर सकता।

मामला अब भी कानूनी प्रक्रिया में

माल्या के खिलाफ भारत में आर्थिक अपराध से जुड़ी कार्रवाई और उनकी वापसी का मामला लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में है। ऐसे में उनके ताजा बयान उनके पक्ष का दृष्टिकोण सामने रखते हैं, लेकिन इससे उनके खिलाफ जारी न्यायिक कार्रवाई अपने आप समाप्त नहीं होती।

बेबाक24 का नजरिया

विजय माल्या ने बैंकों को रकम लौटाए जाने और खुद को गलत तरीके से पेश किए जाने का दावा किया है। लेकिन किसी व्यक्ति की कानूनी स्थिति केवल उसके सार्वजनिक बयानों से तय नहीं होती। इस मामले में अदालतों के फैसले, सरकारी अभिलेख और लंबित कानूनी प्रक्रिया ही यह निर्धारित करेंगे कि माल्या के दावों का वास्तविक कानूनी प्रभाव क्या है।



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