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आधी रात को 'कानून' को जेब में रख घूमे दबंग, दालमंडी में जेसीबी चलाकर जमींदोज कर दी घड़ी कारोबारी की दुकान!

by on | 2026-09-09 20:57:29

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आधी रात को 'कानून' को जेब में रख घूमे दबंग, दालमंडी में जेसीबी चलाकर जमींदोज कर दी घड़ी कारोबारी की दुकान!

 वाराणसी: कमिश्नरेट पुलिस की नाक के नीचे, शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक इलाके दालमंडी में मनबढ़ों और दबंगों के दुस्साहस का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानून-व्यवस्था के इकबाल पर सीधा प्रहार किया है। जब पूरा शहर सो रहा था, तब दबंगों ने खुलेआम जेसीबी गरजवाकर एक घड़ी कारोबारी की दुकान को जमींदोज कर दिया। मामला जब अदालत और एडीएम (प्रशासन) के समक्ष विचाराधीन था, तब आधी रात के अंधेरे में मौके की स्थिति बदलने का यह दुस्साहस सवाल खड़े करता है कि क्या बनारस में अब खाकी का खौफ खत्म हो चुका है?

एडीएम कोर्ट में चल रही थी सुनवाई, रातों-रात मिटा दिया वजूद

खजुरी (रजा कालोनी) निवासी पीड़ित व्यापारी मोहम्मद शहनवाज सिद्दीकी की मानें तो 8 सितंबर की रात विपक्षियों ने कानून और पुलिस प्रशासन की साख को ठेंगा दिखाते हुए उनकी दुकान पर जेसीबी चलवा दी। पीड़ित का सीधा आरोप है कि विपक्षी शोएब अहमद, नवाज खाँ, मोहम्मद रोमान खाँ और उनके गुर्गों ने प्रशासनिक प्रक्रिया को ठेंगा दिखाने और जमीन पर कब्जा जमाने की नीयत से इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।

धमकियां, तोड़फोड़ और दुस्साहस की पुरानी कहानी

यह कोई पहली बार नहीं है जब कारोबारी को निशाना बनाया गया हो। पीड़ित के मुताबिक:

  • 8 अप्रैल 2026: पहले दुकान की दक्षिणी दीवार तोड़कर घड़ियां और नकदी साफ कर ली गई।
  • लगातार दबाव: मरम्मत कराने की कोशिश करने पर व्यापारी को जान से मारने और अंजाम भुगतने की धमकियां दी जाती रहीं।
  • अपराधिक पृष्ठभूमि: आरोपी पक्ष पर पहले से थाना चौक और थाना कैंट में कई गंभीर मामले दर्ज होने के आरोप हैं।

सीपी से गुहार: गैंगस्टर एक्ट लगे, सीसीटीवी फुटेज जब्त हो

घटना के बाद से सहमे पीड़ित व्यापारी ने पुलिस आयुक्त (CP) और थाना चौक प्रभारी को शिकायती पत्र देकर इंसाफ की गुहार लगाई है। पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि:

  • ​घटनास्थल का तत्काल निरीक्षण और वीडियोग्राफी कराई जाए।
  • ​आसपास के CCTV फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य तुरंत जब्त किए जाएं।
  • ​आरोपियों का आपराधिक इतिहास खंगालकर उन पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हो और गैंग चार्ट बनाया जाए।
  • ​लगातार मिल रही धमकियों को देखते हुए पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराई जाए।

बेबाक सवाल:

दालमंडी जैसे घने इलाके में आधी रात को भारी-भरकम जेसीबी पहुंच जाती है, पूरी दुकान ढहा दी जाती है और गश्त करने वाली पुलिस को भनक तक नहीं लगती? अब देखना यह है कि बनारस कमिश्नरेट पुलिस इस खुली चुनौती का जवाब किस तरह देती है—आरोपियों पर खाकी का हंटर चलता है या जांच की फाइलों में मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है!



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