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मायावती का बड़ा फैसला: आकाश आनंद बसपा से बाहर, अशोक सिद्धार्थ पर भी तीखा रुख

by admin@bebak24.com on | 2026-09-10 11:34:53

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मायावती का बड़ा फैसला: आकाश आनंद बसपा से बाहर, अशोक सिद्धार्थ पर भी तीखा रुख

लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़

बहुजन समाज पार्टी में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। बसपा प्रमुख मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने का एलान किया है। साथ ही अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मायावती ने इसे देर से उठाया गया सही कदम बताया।

मायावती ने कहा कि यदि अशोक सिद्धार्थ ने पहले ही राजनीति से दूरी बना ली होती तो पार्टी, बहुजन आंदोलन और आकाश आनंद को कई विपरीत परिस्थितियों से नहीं गुजरना पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

आकाश आनंद पर भी उठाए सवाल

मायावती ने आकाश आनंद के रवैये पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आकाश ने अशोक सिद्धार्थ से जुड़े उनके संदेश को अपने सामाजिक माध्यम पर आगे नहीं बढ़ाया, जबकि पहले वह मायावती के संदेशों को साझा कर अपनी निष्ठा दिखाते रहे हैं।

बसपा प्रमुख ने कहा कि इससे यह सवाल उठता है कि आकाश आनंद पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित को प्राथमिकता दे रहे हैं या रिश्ते-नातों को। उनके मुताबिक ऐसी स्थिति में आकाश का पार्टी के लिए पूरी तरह समर्पित होकर काम करना कठिन है।

पार्टी की जिम्मेदारियों से अब पूरी तरह मुक्त

मायावती ने स्पष्ट किया कि 3 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारियों से हटाए जाने के बाद अब उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि आकाश स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो अब वे स्वतंत्र हैं।

मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से निजी और पारिवारिक हितों तथा पद की इच्छा से ऊपर उठकर डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।

उत्तर प्रदेश पर नजर, बहुमत वापसी का लक्ष्य

बसपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं से विरोधियों की राजनीतिक रणनीतियों का मजबूती से मुकाबला करने और उत्तर प्रदेश में फिर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए जुटने की अपील की। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य मजबूत कानून-व्यवस्था और विकास के साथ ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति वाली सरकार बनाना है।

बेबाक24 का नजरिया

आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने का फैसला बसपा के लिए केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि चुनाव से पहले नेतृत्व और राजनीतिक दिशा को लेकर बड़ा संदेश है। मायावती ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि पार्टी में व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर संगठन और बहुजन आंदोलन की प्राथमिकता रहेगी। अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि इस फैसले का चुनावी मैदान में बसपा के संगठन और उसके जनाधार पर क्या असर पड़ता है।



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