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बुलडोजर एक्शन: जसदेवपुर में हाईकोर्ट के आदेश पर हटा अवैध अतिक्रमण, तालाब की जमीन कब्जामुक्त

by on | 2026-07-12 19:20:31

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बुलडोजर एक्शन: जसदेवपुर में हाईकोर्ट के आदेश पर हटा अवैध अतिक्रमण, तालाब की जमीन कब्जामुक्त

भांवरकोल (गाजीपुर)। भांवरकोल ब्लॉक के ग्राम सभा जसदेवपुर में माननीय हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद प्रशासन का चाबुक चला है। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में राजस्व और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त रूप से एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सार्वजनिक तालाब (पोखरी) की भूमि को पूरी तरह कब्जामुक्त करा दिया। कार्रवाई के दौरान मौके पर चले बुलडोजर और भारी पुलिस बल की मौजूदगी से पूरे इलाके में हड़कंप मचा रहा।

लंबे समय से चल रहा था कानूनी विवाद

​मिली जानकारी के अनुसार, जसदेवपुर ग्राम सभा की सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही थी। मामले में शिकायतकर्ता अजय कुमार राय ने तहसीलदार न्यायालय से लेकर माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट द्वारा बेदखली का आदेश जारी होने के बाद हरकत में आए प्रशासन ने भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचकर आराजी संख्या 157 (पोखरी/तालाब) से अवैध निर्माण और घेराबंदी को ध्वस्त कर दिया।

​कार्रवाई के दौरान मुख्य रूप से तहसीलदार महेंद्र बहादुर, लेखपाल रविभूषण सिंह और स्थानीय पुलिस बल मुस्तैद रहा। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने सख्त लहजे में कहा:

​"सार्वजनिक और सरकारी संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी ऐसी शिकायतों पर त्वरित और कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।"

अब बंजर भूमि पर कब्जे के आरोप, जांच की मांग तेज

​तालाब की जमीन खाली होने के बाद अब यह मामला एक नया मोड़ लेता दिख रहा है। ग्रामीणों ने वर्तमान ग्राम प्रधान मुन्ना यादव को कटघरे में खड़ा करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज आराजी संख्या 156 (बंजर भूमि) पर ग्राम प्रधान द्वारा कथित रूप से अवैध कब्जा कर पक्का निर्माण करा लिया गया है।

​इस मामले को लेकर अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह तालाब की भूमि से भेदभाव रहित कार्रवाई कर अतिक्रमण हटाया गया, ठीक उसी तर्ज पर बंजर भूमि की भी पैमाइश और जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।

नोट: हालांकि, ग्राम प्रधान पर लगे इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासनिक स्तर पर इस मामले की जांच होना अभी बाकी है।




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