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8वां वेतन आयोग: चेन्नई में शुरू हुआ मंथन, 7% सालाना इंक्रीमेंट की मांग से बढ़ सकती है कर्मचारियों की कमाई

by on | 2026-09-07 16:36:32

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8वां वेतन आयोग: चेन्नई में शुरू हुआ मंथन, 7% सालाना इंक्रीमेंट की मांग से बढ़ सकती है कर्मचारियों की कमाई

चेन्नई | बेबाक24 न्यूज़

केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन और भत्तों से जुड़े 8वें वेतन आयोग की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से चेन्नई में शुरू हो गई। दक्षिण भारत में पहली बार हो रही इस बैठक में वेतन निर्धारण, फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ता, सालाना वेतन वृद्धि और स्थानांतरण-पदस्थापन से जुड़े नियमों पर कर्मचारी संगठनों से चर्चा की जा रही है।

चेन्नई में 7 और 8 सितंबर को बैठक के बाद 9 सितंबर को पुडुचेरी में कर्मचारी संगठनों के साथ सीधा संवाद होगा। सबसे ज्यादा चर्चा सालाना इंक्रीमेंट को मौजूदा 3% से बढ़ाकर 6 से 7% करने की मांग पर है।

7% इंक्रीमेंट की मांग क्यों महत्वपूर्ण?

केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल मूल वेतन पर 3% सालाना वृद्धि मिलती है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए इसमें पर्याप्त बढ़ोतरी की जरूरत है।

राष्ट्रीय संयुक्त परामर्शदात्री तंत्र, अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ और डाक कर्मचारी संगठनों ने सालाना वृद्धि को 6% करने की मांग रखी है। वहीं, अखिल भारतीय नई पेंशन योजना कर्मचारी महासंघ ने इसे 7% करने का प्रस्ताव दिया है।

7% वृद्धि से कितना बदल सकता है वेतन?

वेतन वृद्धि का प्रभाव लंबी अवधि में काफी बड़ा हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, वर्तमान वेतन संरचना में लेवल 1 कर्मचारी का न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 है। 3% सालाना वृद्धि के साथ 10 साल में यह करीब ₹23,500 तक पहुंचता है।

वहीं लेवल 8 के कर्मचारी का मौजूदा मूल वेतन ₹47,600 है। यदि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.15 तय होता है तो मूल वेतन बढ़कर करीब ₹1,02,340 हो सकता है।

इसके बाद 10 साल के दौरान सालाना वृद्धि की दर 3%, 5% और 7% होने पर अनुमानित वार्षिक वेतन में बड़ा अंतर दिखाई देता है। दिए गए अनुमान के मुताबिक 7% वृद्धि की स्थिति में 10 साल बाद वार्षिक वेतन करीब ₹22.58 लाख तक पहुंच सकता है, जबकि 3% की दर से यह लगभग ₹16.02 लाख रहने का अनुमान है।

हालांकि, ये केवल अनुमानित गणनाएं हैं। अंतिम वेतन वृद्धि फिटमेंट फैक्टर और आयोग की सिफारिशों के साथ सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी।

एचआरए और स्थानांतरण नियम भी एजेंडे में

कर्मचारी संगठन केवल इंक्रीमेंट बढ़ाने की मांग तक सीमित नहीं हैं। बैठक में मकान किराया भत्ता (एचआरए) बढ़ाने और स्थानांतरण तथा पदस्थापन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने की मांग भी रखी जा रही है।

फिटमेंट फैक्टर और महंगाई भत्ते की गणना से जुड़े मुद्दे भी इस चर्चा के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

आगे क्या होगा?

चेन्नई और पुडुचेरी की बैठकों में कर्मचारी संगठनों से मिले सुझावों के आधार पर 8वां वेतन आयोग अपनी सिफारिशों को आगे बढ़ाएगा। अभी 7% सालाना इंक्रीमेंट कोई तय बढ़ोतरी नहीं, बल्कि कर्मचारी संगठनों की मांग है।

आयोग की अंतिम सिफारिश और उसके बाद केंद्र सरकार के निर्णय से ही यह स्पष्ट होगा कि कर्मचारियों के मूल वेतन और वार्षिक आय में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी।



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