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अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा: 5 तेल टैंकर तबाह, ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना

by admin@bebak24.com on | 2026-09-09 12:04:00

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अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा: 5 तेल टैंकर तबाह, ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना

वॉशिंगटन | बेबाक24 न्यूज़

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष में मंगलवार को तनाव एक बार फिर बढ़ गया। अमेरिकी सेना ने ईरान के 5 तेल टैंकरों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया। इसके बाद ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।

इस घटनाक्रम के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संवेदनशील क्षेत्र बन गया है। यहां किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।

अमेरिका ने टैंकरों पर क्यों की कार्रवाई?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पिछले 2 दिनों में अमेरिकी नौसैनिक जहाज को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की 2 कोशिशें की थीं। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, दोनों हमलों में उसका जहाज सुरक्षित रहा और किसी सैनिक के घायल होने की सूचना नहीं है।

इसके बाद अमेरिका ने 5 ईरानी तेल टैंकरों पर कार्रवाई की। इनमें 4 टैंकर गल्फ ऑफ ओमान में और एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खर्ग द्वीप के पास मौजूद था।

ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर दागीं मिसाइलें

अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमला किया। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें दागी गईं।

जॉर्डन की सेना के अनुसार, ईरान की ओर से 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से 18 को वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया। बाकी 2 मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। जॉर्डन ने किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं दी।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस पर अमेरिकी लड़ाकू विमानों से जुड़े एक हैंगर और विमान सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले एक ढांचे को निशाना बनाने का दावा किया है।

कुवैत और बहरीन को भी ईरान की चेतावनी

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कुवैत और बहरीन के आसपास मौजूद तेल टैंकरों को क्षेत्र से हटने की चेतावनी दी है। ईरान का आरोप है कि दोनों देशों में अमेरिकी सेना को ठिकाने और सैन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं।

इस चेतावनी ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है। क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। युद्ध से पहले दुनिया के लगभग एक-पांचवें हिस्से का तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता था।

अमेरिकी कार्रवाई से ईरानी तेल निर्यात पर दबाव बढ़ा है, जबकि ईरान जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। इस मार्ग पर सैन्य गतिविधियां बढ़ने से तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका बनी हुई है।

तेल की कीमत फिर 100 डॉलर के करीब

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी दिखा। मंगलवार को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 99.46 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

ऊर्जा कीमतों में तेज बढ़ोतरी वैश्विक महंगाई को प्रभावित कर सकती है। अमेरिका में भी लंबे संघर्ष और महंगे ईंधन का राजनीतिक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिका ने आर्थिक दबाव भी बढ़ाया

अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई के साथ ईरान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ाया है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान के विमानन क्षेत्र से जुड़ी 2 दर्जन से अधिक कंपनियों और विमानन संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाए हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान की ओर से अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिशों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

क्या युद्ध और भड़क सकता है?

ईरान पहले ही होर्मुज क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को लेकर नए प्रतिबंधात्मक कदम उठाने की चेतावनी दे चुका है। अमेरिका की ओर से लगातार सैन्य कार्रवाई और ईरान के जवाबी हमलों से टकराव का दायरा बढ़ने का खतरा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में बड़े स्तर पर सैन्य टकराव हुआ तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति, ऊर्जा कीमतों और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।



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