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‘गुप्ता-जायसवाल नहीं होते तो बंगाली नहीं बचते’: भाजपा नेता के बयान पर बंगाल में सियासी घमासान

by admin@bebak24.com on | 2026-09-07 15:52:12

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‘गुप्ता-जायसवाल नहीं होते तो बंगाली नहीं बचते’: भाजपा नेता के बयान पर बंगाल में सियासी घमासान

कोलकाता | बेबाक24 न्यूज़

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के एक बयान ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। 1946 के कोलकाता दंगों का संदर्भ देते हुए भट्टाचार्य ने दावा किया कि उस दौर में गुप्ता और जायसवाल जैसे गैर-बंगाली समुदायों ने बंगालियों का साथ दिया था। उनके इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और माकपा ने आपत्ति जताई है।

भट्टाचार्य ने रविवार को मध्य कोलकाता के बोउबाजार में आयोजित ‘खूंटी पूजा’ कार्यक्रम में यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उस समय इन समुदायों ने बंगालियों की मदद के लिए अपनी संपत्ति तक लगा दी थी। भाजपा नेता के मुताबिक, उनके सहयोग के बिना उत्तर कोलकाता के बंगाली भद्रलोक और अभिजात वर्ग का अस्तित्व बचना मुश्किल था।

दुर्गा पूजा और 1946 के दंगों का जिक्र

भट्टाचार्य ने अपने संबोधन में कोलकाता के इतिहास और सामाजिक एकता का उल्लेख करते हुए लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि कठिन दौर में गैर-बंगाली समुदायों ने बंगालियों के साथ खड़े होकर उनकी मदद की थी।

उन्होंने बांग्लादेश सीमा से सटे बंगाल के कुछ इलाकों में दुर्गा पूजा को लेकर भी चिंता जताई। भाजपा नेता ने मुर्शिदाबाद में मूर्ति बनाने वाले पिता-पुत्र हरगोबिंद दास और चंदन दास की मौत का जिक्र करते हुए कुछ आरोप लगाए, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख नहीं है।

तृणमूल ने बताया बंगालियों का अपमान

तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बंगालियों की अपनी समृद्ध पहचान, परंपरा और स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास रहा है। घोष ने कहा कि यह कहना उचित नहीं है कि किसी अन्य समुदाय के सहयोग के बिना बंगाली समाज का अस्तित्व नहीं बचता।

कांग्रेस और माकपा ने भी घेरा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने आरोप लगाया कि भाजपा ऐसे बयानों के जरिए बंगाल की विरासत और सामाजिक एकता को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर के जरिए बंगाल को एकजुट रखने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने भी भट्टाचार्य की टिप्पणी पर निशाना साधा। उन्होंने बंगाल के विभाजन और 1905 तथा 1947 की ऐतिहासिक घटनाओं का संदर्भ देते हुए भाजपा पर इतिहास को अपने राजनीतिक नजरिए से पेश करने का आरोप लगाया।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बयान के बाद अब 1946 के कोलकाता दंगों और बंगाल के सामाजिक इतिहास को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। दुर्गा पूजा से पहले उठा यह विवाद आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।



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