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बांकीपुर उपचुनाव से पहले राजद को बड़ा झटका

by admin@bebak24.com on | 2026-07-17 21:57:22

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बांकीपुर उपचुनाव से पहले राजद को बड़ा झटका

पटना/नई दिल्ली (बेबाक२४): बिहार की सियासत में इस वक्त सबसे बड़ी हलचल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर है, लेकिन मतदान की तारीख से ठीक पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर एक ऐसा राजनीतिक भूचाल आया है जिसने लालू और तेजस्वी यादव की रणनीतियों को हिलाकर रख दिया है।

पार्टी के सबसे मुखर, पुराने और संकटमोचक प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने १६ जुलाई २०२६ को राजद के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। यह वही मृत्युंजय तिवारी हैं जो २०१० और २०१५ के कठिन दौर में भी राजद की ढाल बने रहे।

अपमान की पराकाष्ठा: "वरिष्ठ नेता भी लाचार"

मृत्युंजय तिवारी ने इस्तीफा सौंपने के बाद मीडिया के सामने अपना दर्द बयां करते हुए साफ किया कि यह फैसला एक दिन की नाराजगी का नतीजा नहीं है:

  • लगातार अपमानित करने की कोशिश: तिवारी ने आरोप लगाया कि पिछले ७-८ महीनों से पार्टी के भीतर उन्हें लगातार दरकिनार और अपमानित करने का प्रयास किया जा रहा था।

  • लालू-राबड़ी भी मजबूर: तिवारी का सबसे बड़ा और सनसनीखेज दावा यह रहा कि पार्टी के शीर्ष नेता लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी इस समय खुद को बेहद "लाचार" महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई वरिष्ठ नेताओं से अपनी शिकायतें साझा कीं, आश्वासन भी मिले, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदला।

तेजस्वी यादव 'दीमकों' से घिरे— सबसे बड़ा हमला

मृत्युंजय तिवारी ने राजद के भावी चेहरे तेजस्वी यादव की कार्यशैली और उनके इर्द-गिर्द के घेरे पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है:

  • दीमक की तरह चाट रहे हैं लोग: तिवारी ने कहा, "तेजस्वी यादव आज ऐसे 'दीमकों' से घिर चुके हैं जो पार्टी को अंदर ही अंदर चाटकर खोखला कर रहे हैं। जब कर्मठ और वफादार कार्यकर्ताओं की जगह ऐसे चाटुकारों को तरजीह दी जाएगी, तो मेरे जैसे स्वाभिमानी व्यक्ति का वहां रहना संभव नहीं है।"

  • विदेश दौरे पर तेजस्वी, बिहार में 'खेला': गौरतलब है कि जब यह राजनीतिक घटनाक्रम हुआ, तब तेजस्वी यादव देश से बाहर विदेश दौरे पर हैं। उनकी अनुपस्थिति में पार्टी के इतने पुराने चेहरे का जाना यह दिखाता है कि संगठन के भीतर संवाद की भारी कमी हो चुकी है।

बांकीपुर उपचुनाव में राजद के समीकरणों पर असर

बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले इस इस्तीफे ने राजद की चुनावी हवा को प्रभावित किया है:

  • कार्यकर्ताओं के मनोबल पर चोट: उपचुनाव के ऐन वक्त पर पार्टी के प्रवक्ता का बागी होना विपक्षी खेमे को बैठे-बिठाए बड़ा मुद्दा दे गया है।

  • परसेप्शन की लड़ाई में नुकसान: चुनावी माहौल में जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि जो नेता सालों तक टीवी चैनलों और मीडिया डिबेट्स में राजद की साख बचाता रहा, वही आज पार्टी के भीतर सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा था।

भाजपा ने फेंका पासा: क्या थामेंगे दामन?

मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे के तुरंत बाद बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने उन्हें खुली पेशकश दे दी है:

  • भाजपा का खुला आमंत्रण: पटेल ने मृत्युंजय तिवारी की तारीफ करते हुए कहा कि वे एक बेहद समर्पित और मजबूत नेता हैं। अगर वे भाजपा में शामिल होना चाहते हैं, तो पार्टी उनका खुले दिल से स्वागत करेगी।

  • तिवारी का रुख: हालांकि, मृत्युंजय तिवारी ने अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर अभी तक पत्ते नहीं खोले हैं। उन्होंने सिर्फ इतना कहा है कि वे जनता के सेवक हैं और आखिरी सांस तक सेवा करते रहेंगे।

मृत्युंजय तिवारी और राजद का सफरनामा

कालखंड/वर्षराजनीतिक भूमिका और महत्व
वर्ष २०१० से २०१५राजद के सबसे बुरे दौर में मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर पार्टी की बात मुस्तैदी से रखी।
वर्ष २०१४लालू प्रसाद यादव ने खुद उन्हें आधिकारिक तौर पर प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी।
१६ जुलाई २०२६पार्टी में लगातार उपेक्षा और 'अपमान' का आरोप लगाते हुए प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल को इस्तीफा सौंपा।

बेबाक24 टेक

मृत्युंजय तिवारी का जाना राजद के लिए केवल एक प्रवक्ता का जाना नहीं है, बल्कि यह उस आंतरिक सांगठनिक दरार की ओर इशारा करता है जो 'चाटुकारिता' बनाम 'कर्मठता' की जंग से पैदा हुई है। जब किसी क्षेत्रीय दल में सालों तक संघर्ष करने वाले जमीनी चेहरों को यह लगने लगे कि शीर्ष नेतृत्व चाटुकारों के प्रभाव में है, तो यह पार्टी के भविष्य के लिए खतरे की घंटी होती है। बांकीपुर उपचुनाव के इस नाजुक मोड़ पर हुए इस डैमेज को कंट्रोल करना अब लालू परिवार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।



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