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आपदा कंट्रोल रूम में अव्यवस्था देख भड़के डीएम: बाहरी व्यक्ति मिलने और बाढ़ की गलत रिपोर्टिंग पर अफसरों को लगाई फटकार

by on | 2026-09-06 22:37:42

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आपदा कंट्रोल रूम में अव्यवस्था देख भड़के डीएम: बाहरी व्यक्ति मिलने और बाढ़ की गलत रिपोर्टिंग पर अफसरों को लगाई फटकार

कंट्रोल रूम की बदहाली और सुरक्षा में चूक पर नाराजगी

​बलिया। तहसील बैरिया स्थित आपदा कंट्रोल रूम की जमीनी हकीकत परखने पहुँचे जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह का पारा रविवार को उस वक्त चढ़ गया, जब नियंत्रण कक्ष में अव्यवस्था और लापरवाही का अंबार मिला। औचक निरीक्षण के दौरान न तो मौके पर ड्यूटी चार्ट मिला और न ही इमरजेंसी कम्युनिकेशन प्लान। हद तो तब हो गई जब संवेदनशील कंट्रोल रूम के भीतर एक अनधिकृत बाहरी व्यक्ति आराम फरमाता पाया गया। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए डीएम ने जिम्मेदार अफसरों को जमकर लताड़ लगाई और बेपरवाह व्यवस्था पर सख्त चेतावनी दी।

​निरीक्षण के दौरान कंट्रोल रूम में जनगणना ऑपरेटर नंदलाल और निर्वाचन ऑपरेटर रितेश जायसवाल तो मौजूद मिले, लेकिन वहीं बैठा एक बाहरी शख्स रमेश कुमार सिंह प्रशासन की सुरक्षा और गोपनीयता पर सवाल खड़े कर गया। पूछताछ में उसने खुद को गैर-कर्मचारी बताया, जिस पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए उसे तुरंत बाहर करने और भविष्य में अनधिकृत प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के कड़े निर्देश दिए।

​कंट्रोल रूम की बदहाली का आलम यह था कि टेबल-बेंच के शीशे टूटे हुए थे, कंप्यूटर, टेलीफोन और फाइलों पर धूल की मोटी परत चढ़ी थी। तीन शिफ्टों में चलने वाले इस अति-संवेदनशील कक्ष में कर्मचारियों की ड्यूटी का कोई अता-पता नहीं था। धूल से सने टेलीफोन को देखकर डीएम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष जताया और आपदा प्रबंधन को पूरी मुस्तैदी के साथ 24 घंटे सक्रिय रखने की हिदायत दी।

कागजों पर 19, हकीकत में 33 गांव प्रभावित: आंकड़ेबाजी पर भड़के डीएम

​कंट्रोल रूम के बाद तहसील कार्यालय पहुँचे जिलाधिकारी ने जब बाढ़ प्रभावित इलाकों का हिसाब माँगा, तो प्रशासनिक लापरवाही का एक और कारनामा सामने आया। रजिस्ट्रार कानूनगो रमेश कुमार वर्मा ने मात्र 19 गांवों के प्रभावित होने का आंकड़ा पेश किया, जबकि मौके पर 33 गांव बाढ़ की चपेट में पाए गए। सरकारी आंकड़ों में इतने बड़े अंतर और आधी-अधूरी रिपोर्टिंग पर डीएम मंगला प्रसाद सिंह का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने रजिस्ट्रार और कानूनगो को कड़ी फटकार लगाते हुए अंतिम चेतावनी जारी की।

पारदर्शिता के लिए जिम्मेदारियों का बंटवारा और कड़े निर्देश

​आंकड़ों की गड़बड़ी और ढिलाई पर नकेल कसते हुए डीएम ने त्वरित व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए:

  • गंगा व घाघरा का अलग हिसाब: रजिस्ट्रार और कानूनगो को घाघरा नदी से प्रभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया, जबकि कानूनगो जनार्दन यादव को गंगा नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी का प्रभार दिया गया।
  • डेली कंप्यूटर अपडेट: दोनों अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे प्रतिदिन ऑपरेटर के माध्यम से जमीनी रिपोर्ट का सत्यापन कराकर डेटा तत्काल सिस्टम पर अपलोड करें।

​जिलाधिकारी ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि आपदा प्रबंधन में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जनता से जुड़े मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी।



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