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राम मंदिर चढ़ावा मामला: पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह से पूछताछ, गोविंददेव गिरि की नियुक्ति पर उठाए सवाल

by admin@bebak24.com on | 2026-09-06 21:04:42

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राम मंदिर चढ़ावा मामला: पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह से पूछताछ, गोविंददेव गिरि की नियुक्ति पर उठाए सवाल

अयोध्या | बेबाक24 न्यूज़

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह का बयान दर्ज किया है। पुलिस ने वीडियो कॉल के माध्यम से करीब 20 मिनट तक उनसे पूछताछ की। इस दौरान 2021 से अब तक की वित्तीय गतिविधियों और चढ़ावे की गणना में कथित गड़बड़ी से जुड़े सवाल पूछे गए।

यह एसआईटी उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर गठित की गई है। इससे पहले 27 जुलाई को भी महिपाल सिंह तत्कालीन एसआईटी के सामने अपना बयान दर्ज करा चुके हैं।

चढ़ावे की गणना में गड़बड़ी का आरोप

पूछताछ के दौरान महिपाल सिंह ने नकदी की गिनती में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। उनका दावा है कि रजिस्टर में दर्ज नोटों के बंडलों और वास्तविक रूप से पात्रों में रखी गई नकदी की संख्या में अंतर किया जाता था।

उन्होंने इस प्रक्रिया में बैंक कर्मचारियों और रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका होने का भी आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

महिपाल सिंह ने मंदिर निर्माण से जुड़े खर्चों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। एसआईटी उनके बयान में सामने आए तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर रही है।

गोविंददेव गिरि की नियुक्ति पर भी सवाल

महिपाल सिंह ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने पूर्व कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि को महासचिव बनाए जाने पर सवाल उठाया।

उनका कहना है कि जिस अवधि में गोविंददेव गिरि कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, उसी दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले सामने आए थे। इन दावों की जांच एसआईटी के स्तर पर की जानी बाकी है।

पुरानी जांच रिपोर्ट भी जांच के दायरे में

लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित पिछली एसआईटी अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप चुकी है, लेकिन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। इसके बाद उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर लखनऊ क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक के नेतृत्व में नई एसआईटी गठित की गई।

महिपाल सिंह का वीडियो कॉल के माध्यम से दर्ज बयान भी अब जांच का हिस्सा होगा। आवश्यकता पड़ने पर जांच में सामने आए तथ्यों और बयान को न्यायिक कार्यवाही में प्रस्तुत किया जा सकता है।



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