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फर्जी आधार, बैंक खातों से करोड़ों की साइबर ठगी का खेल! जौनपुर पुलिस ने दबोचे गिरोह के 3 शातिर, सरगना दीपेश फरार

by on | 2026-07-17 12:27:36

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फर्जी आधार, बैंक खातों से करोड़ों की साइबर ठगी का खेल! जौनपुर पुलिस ने दबोचे गिरोह के 3 शातिर, सरगना दीपेश फरार


जौनपुर । ​उत्तर प्रदेश में साइबर अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, लेकिन कानून के हाथ भी उनके गिरेबान तक पहुँचने में देर नहीं लगा रहे। जनपद जौनपुर में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। जौनपुर पुलिस ने ऑनलाइन ठगी करने वाले एक बेहद शातिर और संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

​पुलिस ने इनके पास से 92 हजार रुपये नगद, 10 फर्जी आधार कार्ड और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। हालांकि, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड और गिरोह का सरगना अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।

रेलवे स्टेशन के पास बिछाया जाल, धरे गए शातिर

​यह बड़ी कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुँवर अनुपम सिंह के कड़े निर्देश पर की गई। अपर पुलिस अधीक्षक नगर आयुष श्रीवास्तव के कुशल निर्देशन एवं क्षेत्राधिकारी नगर गोल्डी गुप्ता के पर्यवेक्षण में साइबर अपराध थाना पुलिस लगातार सक्रिय थी।

​मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने सिटी रेलवे स्टेशन के ऊपर बने पुल के नीचे घेराबंदी की। गुरुवार की सुबह जैसे ही आरोपी वहां पहुंचे, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए तीनों को दबोच लिया।

​गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:

  • गुलशन सोनी (निवासी: थाना जफराबाद)
  • सूरज उपाध्याय (निवासी: थाना लाइन बाजार)
  • अमन सिंह (निवासी: थाना कोतवाली)

​पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों में से गुलशन और सूरज शातिर किस्म के अपराधी हैं और इनके खिलाफ पहले से भी कई गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

फर्जी आधार कार्ड से बैंक खाते खोलने का खेल, 80:20 का था कमीशन

​पुलिस की कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने जो खुलासे किए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। आरोपियों ने कुबूल किया कि वे दीपेश उर्फ दीपु नाम के सरगना के लिए काम करते हैं।

ठगी का मॉडस ऑपेरंडी (काम करने का तरीका):

  • फर्जी पहचान का खेल: यह गिरोह असली पहचान छिपाने के लिए दूसरों की तस्वीरों का इस्तेमाल कर फर्जी आधार कार्ड तैयार करता था।
  • बैंक खातों का जाल: इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के सहारे अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे ताकि ठगी की रकम सीधे इन खातों में मंगवाई जा सके।
  • कमीशन का गणित: ऑनलाइन ठगी का पैसा जैसे ही खातों में आता, ये लोग एटीएम से कैश निकालते थे। इस काली कमाई का 80 प्रतिशत हिस्सा सरगना दीपेश उर्फ दीपु को जाता था, जबकि 20 प्रतिशत हिस्सा ये तीनों आपस में बांटते थे।


पुलिस टीम की मुस्तैदी और जनता से बेबाक अपील

​पुलिस ने बरामद नगदी, फर्जी आधार कार्ड और मोबाइल फोन को सीज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस शानदार कामयाबी को अंजाम देने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक दिनेश कुमार सिंह, प्रभारी निरीक्षक सत्य प्रकाश सिंह, निरीक्षक विनोद कुमार मिश्रा, निरीक्षक देवानन्द रजक और निरीक्षक राकेश कुमार सिंह सहित साइबर अपराध थाना की टीम की मुख्य भूमिका रही।

'बेबाक 24' की जनता से अपील:

साइबर ठग बेहद शातिर हैं। जौनपुर पुलिस और 'बेबाक 24' आपसे अपील करता है कि कभी भी अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर, ओटीपी या कोई भी पहचान पत्र (जैसे आधार, पैन) किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें। यदि आप किसी भी तरह की साइबर ठगी का शिकार होते हैं, तो बिना देर किए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। सजग रहें, सुरक्षित रहें!



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