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आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने का महा-आदेश! RDA ने खारिज की दलीलें, बताया अवैध निर्माण

by on | 2026-07-15 22:05:16

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आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने का महा-आदेश! RDA ने खारिज की दलीलें, बताया अवैध निर्माण

रामपुर (बेबाक24): समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की महत्वाकांक्षी और विवादित परियोजना 'मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी' पर योगी सरकार का कानूनी डंडा एक बार फिर पूरी ताकत से चला है। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर बनी 38 आलीशान इमारतों को पूरी तरह से जमींदोज (गिराने) करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया है।

प्राधिकरण के इस कड़े फैसले के बाद रामपुर से लेकर लखनऊ के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। 

बिना नक्शा पास कराए किया गया निर्माण: आरडीए

अधिकारियों और रामपुर विकास प्राधिकरण से मिली जानकारी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने नियमों को ताक पर रखकर परिसर का विस्तार किया था:

  • मानचित्र की अनदेखी: आरडीए (RDA) का कहना है कि इन 38 इमारतों का निर्माण वैध 'भवन मानचित्र' (नक्शा) को मंजूर कराए बिना ही धड़ल्ले से कर दिया गया था।

  • किस कानून के तहत कार्रवाई: न्यूज़ एजेंसी पीटीआई (PTI) के मुताबिक, ध्वस्तीकरण (Demolition) का यह कड़ा आदेश उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत जारी किया गया है। आरडीए ने इस फैसले पर पहुंचने से पहले यूनिवर्सिटी प्रबंधन को बकायदा नोटिस जारी कर उनका जवाब भी मांगा था।

यूनिवर्सिटी की 'सिंगनखेड़ा गांव' वाली दलील प्राधिकरण ने की खारिज

सुनवाई के दौरान जौहर यूनिवर्सिटी के वकीलों और प्रबंधन ने आरडीए की कार्रवाई को रोकने के लिए तकनीकी दलीलें पेश की थीं, जिन्हें खारिज कर दिया गया:

  • यूनिवर्सिटी का तर्क: प्रबंधन का कहना था कि जब ये इमारतें बनाई जा रही थीं, उस समय यह पूरा इलाका (सिंगनखेड़ा गांव) रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) में नहीं आता था। इसलिए आरडीए से नक्शा पास कराने की कोई कानूनी जरूरत नहीं थी।

  • आरडीए का कड़ा रुख: रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि क्षेत्रीय जूनियर इंजीनियर (JE) की जांच रिपोर्ट के आधार पर इस कथित अवैध निर्माण की कड़ियों को जोड़ा गया। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि भले ही यह क्षेत्र बाद में आरडीए के तहत आया हो, लेकिन निर्माण के वक्त जो भी 'सक्षम प्राधिकारी' (Competent Authority) वहां मौजूद था, उससे मंजूरी लेना अनिवार्य था।

  • केवल मेडिकल कॉलेज का नक्शा वैध: जिला पंचायत के पुराने रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि वहां केवल मेडिकल कॉलेज और एकेडमिक ब्लॉक के भवनों का नक्शा ही स्वीकृत मिला। बाकी इन 38 इमारतों के लिए किसी भी विभाग से वैध मंजूरी का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

विवादों और मुकदमों में घिरी रही है यूनिवर्सिटी

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 2006 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के एक विशेष कानून के तहत हुई थी। यह आजम खान का सबसे ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता रहा है:

  • मुकदमों की बौछार: पिछले कई सालों से यह यूनिवर्सिटी किसानों की जमीन हड़पने (भूमि अतिक्रमण), नदियों के बहाव क्षेत्र को दबाने और सरकारी लीज नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़े दर्जनों आपराधिक व सिविल मुकदमों में घिरी हुई है।

  • आजम परिवार का किनारा: कानूनी शिकंजा कसता देख साल 2026 की शुरुआत में आजम खान और उनके परिवार ने इस यूनिवर्सिटी के संचालन वाले मुख्य ट्रस्ट से औपचारिक रूप से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया था।

जौहर यूनिवर्सिटी ध्वस्तीकरण आदेश: मुख्य फैक्ट्स (15 जुलाई 2026)

मुख्य पहलूमामले से जुड़े कानूनी व प्रशासनिक तथ्य
प्रशासनिक आदेश38 इमारतों को गिराने (ध्वस्त करने) का आदेश जारी।
कार्रवाई करने वाली संस्थारामपुर विकास प्राधिकरण (RDA)।
लागू कानूनी धारायूपी शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1)
अवैध निर्माण का आधारजिला पंचायत या आरडीए के रिकॉर्ड में कोई वैध नक्शा/मंजूरी न होना।
प्रबंधन की स्थितिसाल 2026 की शुरुआत में आजम खान परिवार ट्रस्ट से हट चुका है।

बेबाक24 टेक

आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ 38 इमारतों को गिराने का यह आदेश केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह यूपी की बदल चुकी राजनीतिक और कानूनी व्यवस्था का एक बड़ा संदेश है। उत्तर प्रदेश में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब इस यूनिवर्सिटी को बनाने के लिए कायदे-कानूनों को जिस तरह शिथिल किया गया, उसी प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा आज इस शैक्षणिक संस्थान को भुगतना पड़ रहा है।

बेबाक24 का मानना है कि शिक्षा के मंदिर का निर्माण हमेशा पाक-साफ और कानूनी रूप से मजबूत जमीन पर होना चाहिए। यूनिवर्सिटी की यह दलील कि निर्माण के समय यह क्षेत्र आरडीए के अधीन नहीं था, जिला पंचायत के रिकॉर्ड में नक्शा न होने के कारण पूरी तरह कमजोर साबित हुई। आजम खान का परिवार भले ही 2026 की शुरुआत में इस ट्रस्ट से अलग हो चुका है, लेकिन उनके द्वारा बोए गए नियमों के उल्लंघन के कांटे अब यूनिवर्सिटी के वजूद को ही खत्म करने पर आमादा हैं। अब देखना यह होगा कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन इस बुल्डोजर एक्शन को रुकवाने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से कोई स्टे आर्डर ला पाता है या नहीं।



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