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मदन मित्रा की बगावत पर ममता बनर्जी का पलटवार! बोलीं— 'बागी नेताओं को अभिषेक से सीख लेनी चाहिए, वे अगले 50 साल राजनीति में रहेंगे'

by on | 2026-07-15 21:31:43

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मदन मित्रा की बगावत पर ममता बनर्जी का पलटवार! बोलीं— 'बागी नेताओं को अभिषेक से सीख लेनी चाहिए, वे अगले 50 साल राजनीति में रहेंगे'

कोलकाता (बेबाक24): कद्दावर नेता मदन मित्रा के इस्तीफे और बागी गुट में शामिल होने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए भूचाल पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने आखिरकार चुप्पी तोड़ी है। ममता बनर्जी ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए अपने भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का खुलकर बचाव किया है।

ममता बनर्जी ने बागी सुर अलाप रहे नेताओं को दो-टूक नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अभिषेक बनर्जी से सीख लेनी चाहिए। 'बेबाक24' की यह विशेष राजनीतिक रिपोर्ट:

"बागी नेताओं को अभिषेक से सीखनी चाहिए राजनीति": ममता बनर्जी

पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ उठ रही आवाजों को खारिज करते हुए ममता बनर्जी ने बागी नेताओं को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा:

  • अभिषेक से सीखें: "जो लोग बगावत कर रहे हैं, उन्हें अभिषेक बनर्जी से सीख लेनी चाहिए। अगर उन्होंने (बागी नेताओं ने) भी जमीनी हालात को बेहतर तरीके से संभाला होता, तो शायद उन्हें भी आज राहत मिल जाती।"

  • निशाना बनाने का बहाना: टीएमसी प्रमुख ने आगे कहा, "जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि अभिषेक बनर्जी सिर्फ बहाने बना रहे हैं, उन्हें यह अच्छी तरह याद रखना चाहिए कि अभिषेक केवल उन्हें आईना दिखा रहे हैं। इन बागी नेताओं की आलोचना केवल अभिषेक को निशाना बनाने का एक बहाना भर है।"

"अभिषेक अगले 50 साल तक राजनीति में रहेंगे, इसलिए डर है"

ममता बनर्जी ने बागी नेताओं के भीतर के डर को उजागर करते हुए कहा कि वे अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद और भविष्य से डरे हुए हैं:

"ये बागी नेता बहुत अच्छे से जानते हैं कि अभिषेक ने कुछ भी गलत नहीं किया है। यही वजह है कि उनके मन में गहरा डर है, क्योंकि वे जानते हैं कि अभिषेक अगले 50 साल तक सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे और पार्टी का नेतृत्व करेंगे।"

मदन मित्रा के आरोपों का सीधा जवाब

ममता बनर्जी का यह कड़ा बयान बुधवार को उनके पूर्व बेहद करीबी नेता मदन मित्रा के बागी गुट में शामिल होने के तुरंत बाद आया है।

बता दें कि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी टीएमसी गुट में शामिल होने के बाद मदन मित्रा ने अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए थे। मित्रा ने कहा था, "मैंने अभिषेक बनर्जी को सुझाव दिया था कि वे पार्टी को मजबूत करने के लिए छह महीने या एक साल के लिए पद से हट जाएं, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। पार्टी डूब रही है, लेकिन सबको छोड़कर सिर्फ अभिषेक को बचाना जरूरी समझा जा रहा है।" ममता बनर्जी के ताजा पलटवार ने साफ कर दिया है कि वे अभिषेक के नेतृत्व और फैसलों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी हैं।

टीएमसी में आर-पार: ममता बनाम बागी गुट (15 जुलाई 2026)

मुख्य मुद्दा / पक्षममता बनर्जी का स्टैंडबागी गुट (मदन-ऋतब्रत) का स्टैंड
अभिषेक बनर्जी का नेतृत्वअभिषेक ने कुछ गलत नहीं किया, वे अगले 50 साल तक राजनीति में छाए रहेंगे।अभिषेक के कारण पार्टी डूब रही है, उन्हें कुछ समय के लिए हट जाना चाहिए।
बगावत की मुख्य वजहबागी नेता अपनी नाकामी छुपाने के लिए अभिषेक को निशाना बना रहे हैं।पार्टी में अंदरूनी लोकतंत्र खत्म हो चुका है और सिर्फ एक व्यक्ति की सेवा हो रही है।
पार्टी का भविष्यबागी नेताओं को अभिषेक से कड़ा संघर्ष और राजनीति सीखनी चाहिए।व्यक्ति-पूजा और तानाशाही के खिलाफ पूरे बंगाल के लोग साथ आ रहे हैं।

बेबाक24 टेक

ममता बनर्जी के इस बयान से एक बात पूरी तरह साफ हो गई है—टीएमसी के भीतर अब 'पुराने बनाम नए' (Old vs New) के विवाद में 'दीदी' ने पूरी तरह 'नए' यानी अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है। मदन मित्रा जैसे पुराने और कद्दावर सिपाही के चले जाने के बावजूद ममता बनर्जी का अभिषेक के पीछे चट्टान की तरह खड़ा होना यह दिखाता है कि पार्टी के भविष्य के उत्तराधिकारी को लेकर उनके मन में कोई संशय नहीं है।

बेबाक24 का मानना है कि ममता बनर्जी का बागी नेताओं को 'अभिषेक से सीखने' की सलाह देना और यह कहना कि वे 'अगले 50 साल राजनीति में रहेंगे', बागी धड़े के लिए एक सीधा और कड़ा संदेश है। ममता ने स्पष्ट कर दिया है कि जिसे पार्टी में रहना है, उसे अभिषेक के नेतृत्व को स्वीकार करना ही होगा। हालांकि, मदन मित्रा और ऋतब्रत बनर्जी जैसे जमीनी नेताओं को इस तरह दरकिनार करना और उन्हें चुनौती देना आगामी स्थानीय और सांगठनिक चुनावों में टीएमसी के लिए भारी पड़ सकता है, क्योंकि नाराज कैडर को संभालना केवल बयानों से मुमकिन नहीं होगा।



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