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मणिपुर में फिर भड़की हिंसा; धान के खेत में किसान की गोली मारकर हत्या, मैतेई समुदाय के घरों में लगाई आग; सेना और पुलिस ने 2 मुख्य आरोपियों को किया गिरफ्तार

by admin@bebak24.com on | 2026-07-12 21:40:23

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मणिपुर में फिर भड़की हिंसा; धान के खेत में किसान की गोली मारकर हत्या, मैतेई समुदाय के घरों में लगाई आग; सेना और पुलिस ने 2 मुख्य आरोपियों को किया गिरफ्तार

इम्फाल/गुवाहाटी ब्यूरो (बेबाक24): मणिपुर में शांति बहाली की तमाम कोशिशों के बीच एक बार फिर हिंसा और तनाव का दौर लौट आया है। राज्य के कांगपोकपी जिले में शनिवार दोपहर संदिग्ध उग्रवादियों ने एक 53 वर्षीय आदिवासी किसान की दिनदहाड़े गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी। यह वारदात उस वक्त अंजाम दी गई जब किसान अपनी पत्नी के साथ धान के खेत में काम कर रहा था।

इस हत्याकांड के कुछ ही देर बाद इलाके में प्रतिशोध की आग भड़क उठी और मैतेई समुदाय के कई खाली घरों को आग के हवाले कर दिया गया। स्थिति को बेकाबू होने से रोकने के लिए भारतीय सेना, सीआरपीएफ (CRPF) और मणिपुर पुलिस ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है। 'बेबाक24' की ग्राउंड ज़ीरो से विशेष रिपोर्ट:

खेत में काम कर रहे किसान पर अंधाधुंध फायरिंग

कांगपोकपी पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, मृतक किसान की पहचान गोवाजंग गांव निवासी हाओलाल सिंगसिट (53 वर्ष) के रूप में हुई है।

  • मौके पर ही मौत: शनिवार दोपहर जब हाओलाल अपनी पत्नी के साथ धान के खेत में काम कर रहे थे, तभी घात लगाए बैठे हथियारबंद हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। शरीर में कई गोलियां लगने के कारण हाओलाल ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

  • बाल-बाल बची पत्नी: हमले के वक्त उनकी पत्नी भी खेत में ही मौजूद थीं, लेकिन उन्होंने सूझबूझ दिखाई और किसी तरह गोलियों की बौछार के बीच से भागकर अपनी जान बचाई। यह गांव (गोवाजांग) ट्विलांग इलाके में कुकी समुदाय का आखिरी छोर पर बसा गांव है, जिसके चलते अब पूरे इलाके में भारी दहशत का माहौल है।

मैतेई गांव में आगजनी: खाली घरों को बनाया निशाना

किसान की हत्या की खबर फैलते ही दोपहर करीब 2 बजे हिंसा भड़क गई। उपद्रवियों ने कांगपोकपी जिले के कांटो सबल (Kanto Sabal) गांव, जो कि एक मैतेई (Meitei) बहुल इलाका है, पर धावा बोल दिया। उपद्रवियों ने वहां बने खाली घरों में आग लगाना शुरू कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी तनाव और अफरा-तफरी फैल गई।

सुरक्षाबलों का बड़ा एक्शन: गांव के मुखिया समेत 2 गिरफ्तार

आगजनी और हिंसा की इस वारदात के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई की। मणिपुर पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया है:

  • संयुक्त टीम की छापेमारी: मणिपुर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और भारतीय सेना की संयुक्त टीमों ने पूरे इलाके को घेरकर धरपकड़ शुरू की।

  • मुख्य आरोपी गिरफ्तार: सुरक्षाबलों ने इस हिंसा और आगजनी के मामले में लीमाखोंग एरिया प्रोटेक्शन कमिटी के चेयरमैन और हेंगजांग गांव के मुखिया कम्मंग ल्होवम (65 वर्ष) तथा खुनखो कुकी गांव के पैगिन हैंगशिंग (30 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस इस साजिश में शामिल अन्य उपद्रवियों की पहचान के लिए सीसीटीवी और स्थानीय इनपुट्स खंगाल रही है।

मणिपुर हिंसा ताजा अपडेट: एक नजर में

घटना का मोर्चावर्तमान स्थिति और विवरणप्रशासनिक कार्रवाई
किसान हत्याकांडखेत में काम कर रहे हाओलाल सिंगसिट की मौत; पत्नी सुरक्षित।कांगपोकपी पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर हमलावरों की तलाश शुरू की।
मैतेई गांव में आगजनीकांटो सबल गांव में खाली घरों को फूंकने की कोशिश, तनाव चरम पर।सेना और पैरामिलिट्री फोर्सेज ने इलाके में फ्लैग मार्च कर स्थिति को संभाला।
गिरफ्तारियांकम्मंग ल्होवम (65, विलेज हेड) और पैगिन हैंगशिंग (30) गिरफ्तार।हिंसा में शामिल अन्य उपद्रवियों की शिनाख्त के लिए धरपकड़ जारी।

बेबाक24 टेक

मणिपुर की यह ताजा घटना दर्शाती है कि राज्य में हिंसा की आग बुझी नहीं है, बल्कि वह राख के नीचे सुलग रही है। जब भी स्थिति थोड़ी सामान्य होने लगती है, उग्रवादी किसी न किसी बहाने से दोबारा जातीय संघर्ष को हवा दे देते हैं। धान के खेत में काम कर रहे एक निहत्थे किसान की हत्या करना और उसके बाद दूसरे समुदाय के घरों को फूंकना यह साबित करता है कि उपद्रवियों के मन से कानून का खौफ खत्म हो चुका है।

बेबाक24 का मानना है कि सेना और पुलिस ने एक गांव के मुखिया समेत दो प्रमुख लोगों को गिरफ्तार करके एक सही और सख्त संदेश दिया है कि पद या उम्र चाहे जो हो, हिंसा फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन, सरकार को यह समझना होगा कि केवल गिरफ्तारियों से दीर्घकालिक शांति नहीं आ सकती। जब तक कुकी और मैतेई दोनों समुदायों के बीच जमीनी स्तर पर संवाद स्थापित नहीं होता और बॉर्डर व भीतरी इलाकों में उग्रवादियों के हथियारों की सप्लाई लाइन पूरी तरह नहीं काटी जाती, तब तक मणिपुर का यह जख्म बार-बार हरा होता रहेगा।



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