by admin@bebak24.com on | 2026-07-11 14:22:30
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वॉशिंगटन/मस्कट ब्यूरो (बेबाक24): मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़े शब्दों में अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि या तो ईरान सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार करे या फिर विनाशकारी नतीजों भुगतने के लिए तैयार रहे।
अमेरिकी हमलों, जिसमें चाबहार का कंट्रोल टावर भी क्षतिग्रस्त हुआ था के बाद हालांकि दोनों ओर से सीधी गोलीबारी तो थमी है, लेकिन कूटनीतिक मोर्चे पर 'होर्मुज़ स्ट्रेट' दोनों महाशक्तियों के लिए नाक का सवाल बन गया है। शनिवार 11 जुलाई 2026 को ओमान में होने वाली महा-वार्ता से पहले अमेरिकी कूटनीति और ट्रंप के सख्त रुख का 'बेबाक24' विस्तृत विश्लेषण:
अमेरिकी खुफिया और मीडिया रिपोर्ट्स (CBS न्यूज़) के मुताबिक, ईरानी नेतृत्व ने बंद कमरों में ट्रंप के सलाहकारों के सामने यह स्वीकार किया है कि इस सप्ताह कमर्शियल जहाजों (वाणिज्यिक जहाजों) पर हुई गोलीबारी एक "बड़ी गलती" थी।
कट्टरपंथियों पर डाला जिम्मा: ईरान ने इस हमले का दोष अपने ही देश के एक आंतरिक कट्टरपंथी गुट पर मढ़ दिया है, जिसके बारे में उसका दावा है कि वह सरकार के नियंत्रण से बाहर है और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को पटरी से उतारना चाहता है।
अमेरिकी अधिकारी का बयान: व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, "ईरानी फिर से बातचीत की मेज पर लौटे और उन्होंने माना कि 'हमसे गलती हो गई, आइए बातचीत जारी रखते हैं।'"
ईरान की निजी ढुलमुल नीति के विपरीत, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर सीधे शब्दों में ईरान को घेरा:
डोनाल्ड ट्रंप: "ईरान के इस्लामी गणराज्य ने हमसे बातचीत जारी रखने का अनुरोध किया है। हम इसके लिए सहमत हो गए हैं, लेकिन अमेरिका ने उन्हें पूरी स्पष्टता के साथ बता दिया है कि जून में हुआ युद्धविराम अब पूरी तरह ख़त्म हो चुका है।"
ईरान सार्वजनिक रूप से वैश्विक मंच पर घोषणा करे कि 'होर्मुज़ स्ट्रेट' पूरी तरह खुला है और वह वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारी रोकेगा।
ईरान दुनिया के सामने अपनी गलती स्वीकार करे, अन्यथा उसे गंभीर सैन्य और आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे।
शनिवार को ओमान (Oman) में होने वाली इस रणनीतिक बातचीत के लिए अमेरिका ने अपनी सबसे आक्रामक और कद्दावर टीम को मैदान में उतारा है। इस वार्ता का नेतृत्व करेंगे:
जेडी वेंस (अमेरिकी उप राष्ट्रपति)
मार्को रुबियो (अमेरिकी विदेश मंत्री)
स्टीव विटकॉफ (पश्चिम एशिया मामलों के विशेष दूत)
जेरेड कुशनर (डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और मध्य पूर्व मामलों के रणनीतिकार)
इस बीच, तनाव को पूरी तरह युद्ध में बदलने से रोकने के लिए कतर का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी शुक्रवार को तेहरान पहुंचा है, ताकि समुद्री व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन का कोई रास्ता निकाला जा सके।
| विवाद का मुद्दा | अमेरिकी स्टैंड (US Position) | ईरानी स्टैंड (Iran Position) |
| सुरक्षित मार्ग (Safe Route) | अमेरिका द्वारा ओमान के समुद्री मार्ग का समर्थन, जहाँ 3 जहाजों को निशाना बनाया गया। | ईरान का दावा कि केवल उसके समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाला मार्ग ही "सुरक्षित" है। |
| प्रबंधन व टैक्स (Control & Fee) | अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग के नियम लागू हों, नेवी की सुरक्षा रहे। | 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' बनाकर गुजरने वाले जहाजों से "सेवा शुल्क" (टैक्स) वसूलने की तैयारी। |
जून 2026 में हुए 14 बिंदुओं वाले ऐतिहासिक एमओयू (MOU) के बाद यह उम्मीद जगी थी कि खाड़ी क्षेत्र में शांति बहाल होगी, लेकिन इस सप्ताह की झड़पों ने पूरे क्षेत्र को फिर से बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति हमेशा से 'शांति बल के माध्यम से' की रही है। ईरान को बातचीत की मेज पर रखने के बावजूद "युद्धविराम ख़त्म" होने की घोषणा करना, ट्रंप की एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल है ताकि ईरान पर अधिकतम दबाव बनाया जा सके।
बेबाक24 का मानना है कि ईरान इस समय चौतरफा घिरा हुआ है; उसके परमाणु ठिकाने (बुशहर पावर प्लांट) और चाबहार जैसे महत्वपूर्ण पोर्ट अमेरिकी हमलों से जख्मी हैं। ईरान का यह बहाना कि "हमले उसके नियंत्रण से बाहर के गुट ने किए", अमेरिका को शांत करने के लिए काफी नहीं है। यदि शनिवार को ओमान की वार्ता में जेडी वेंस और जेरेड कुशनर की टीम के साथ ईरान का कोई ठोस लिखित या सार्वजनिक समझौता नहीं होता है, तो होर्मुज़ जलसंधि में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के 20 से ज्यादा जंगी जहाज ईरान की अर्थव्यवस्था (तेल निर्यात) को पूरी तरह 'लॉकडाउन' कर सकते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान अपनी संप्रभुता और झुके हुए आत्मसम्मान के बीच क्या कूटनीतिक समझौता करता है।
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