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"चोरी कोई और करे और सबूत कोई और दे?"— वीएचपी अध्यक्ष के पत्र पर कांग्रेस और पवन खेड़ा का तीखा हमला

by admin@bebak24.com on | 2026-07-05 21:33:41

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"चोरी कोई और करे और सबूत कोई और दे?"— वीएचपी अध्यक्ष के पत्र पर कांग्रेस और पवन खेड़ा का तीखा हमला

नेशनल डेस्क (बेबाक24): अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Donation Theft Case) का मामला अब पूरी तरह से एक बड़े राष्ट्रीय राजनीतिक और कूटनीतिक संग्राम में तब्दील हो चुका है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह के तीखे पलटवार के बाद, अब कांग्रेस (Congress) ने भी इस विवाद में सीधे एंट्री मार ली है।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार द्वारा पुलिस के जांच अधिकारी (IO) को लिखे गए पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा का एक बड़ा बयान जारी कर वीएचपी की नीयत और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

1. "हर दिन आ रहे नए सबूत, लेकिन चोरों को पकड़ना नीयत में नहीं"

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने राम मंदिर के वित्तीय प्रबंधन और सुरक्षा में हुई इस कथित चूक को लेकर केंद्र सरकार और उससे जुड़े संगठनों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने अपने बयान में कहा:

पवन खेड़ा का आधिकारिक बयान:

"अयोध्या राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के मामले में हर दिन नए आरोप लग रहे हैं और चौंकाने वाले नए सबूत सामने आ रहे हैं। पूरा देश देख रहा है कि मंदिर के भीतर क्या चल रहा है, लेकिन जांच को सही दिशा में ले जाने के बजाय ध्यान भटकाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।"

2. "प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव से सबूत मांगना हास्यास्पद"

वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने अपने पत्र में जिन विपक्षी नेताओं के बयान दर्ज करने और उनसे सबूत मांगने की वकालत की थी, उनमें कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के नाम भी प्रमुखता से शामिल हैं। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए पवन खेड़ा ने कहा:

  • अजीबोगरीब मांग: आज विश्व हिंदू परिषद के आलोक कुमार ने जांच अधिकारी को पत्र लिखकर प्रियंका गांधी जी, अखिलेश यादव जी और राम गोपाल यादव जी से चोरी के सबूत मांगने की बात की है।

  • कांग्रेस का तंज: खेड़ा ने तंज कसते हुए पूछा, "यह तो वही बात हो गई कि 'चोरी कोई और करे और सबूत कोई और दे?' मंदिर का पूरा प्रशासन, सुरक्षा और ट्रस्ट आपके पास है, चोरी आपके नाक के नीचे हुई है, और आप सबूत विपक्ष के नेताओं से मांग रहे हैं?"

3. "हिंदू समाज को बरगला कर दुकानें चलाना ही इनका मकसद है"

कांग्रेस ने इस पूरे मामले को वीएचपी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एक सोचा-समझा राजनीतिक एजेंडा करार दिया। पवन खेड़ा ने संगठन की नीयत पर सीधा प्रहार करते हुए कहा:

"सच्चाई यही है कि चोरों को पकड़ना इनकी नीयत में ही नहीं है। ये कभी नहीं चाहते कि रामलला के दरबार में चोरी करने वाले असली चेहरे बेनकाब हों। इनकी नीयत हमेशा की तरह हिंदू समाज को भावनात्मक रूप से बरगलाने की है, ताकि ये धर्म के नाम पर खुद की राजनीतिक और सांगठनिक दुकानें चला सकें।"

बेबाक24 टेक

कांग्रेस और पवन खेड़ा का यह रुख इस बात को साफ करता है कि विपक्ष अब इस मुद्दे पर रक्षात्मक होने के मूड में बिल्कुल नहीं है। वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार का पत्र कानूनी रूप से एक 'डाइवर्जन टैक्टिक' (ध्यान भटकाने वाली रणनीति) जैसा प्रतीत होता है। कानून का मूल सिद्धांत है कि जो अपराध की जगह पर मौजूद है या जिसके नियंत्रण में संपत्ति थी, जवाबदेही सबसे पहले उसी की बनती है।

'बेबाक24' का मानना है कि कांग्रेस का यह सवाल बेहद तार्किक है कि प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव या विपक्ष के अन्य नेताओं ने केवल वही बातें कहीं जो मीडिया और ट्रस्ट के आंतरिक सूत्रों (जैसे नृपेंद्र मिश्रा या संतों के बयान) से बाहर आ रही थीं। ऐसे में पुलिस के खोजी दस्ते को सबूत मंदिर के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, स्ट्रॉन्ग रूम के ऑडिट और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों से जुटाने चाहिए, न कि दिल्ली और लखनऊ में बैठे विपक्षी नेताओं के दफ्तरों से। वीएचपी का यह कदम जांच को भटकाने और इसे विशुद्ध रूप से 'सनातनी बनाम विपक्ष' का चुनावी मुद्दा बनाने की कूटनीतिक कोशिश है, जिसे कांग्रेस ने 'दुकानें चलाने' का नाम देकर सीधे खारिज कर दिया है।



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