ब्रेकिंग न्यूज़
पीएम मोदी ने छात्रों के लिए रोका अपना काफिला: नीट परीक्षा के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर 45 मिनट रुके
राष्ट्रीय राष्ट्रीय

"भरत तिवारी का एनकाउंटर गलत था, दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई"— तेरहवीं के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे बिहार के मंत्री अशोक चौधरी

by admin@bebak24.com on | 2026-07-05 21:29:07

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3099


"भरत तिवारी का एनकाउंटर गलत था, दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई"— तेरहवीं के बाद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे बिहार के मंत्री अशोक चौधरी

राज्य ब्यूरो (बेबाक24): बिहार में हुए एक कथित पुलिस एनकाउंटर (Police Encounter) को लेकर राज्य की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी ने रविवार (5 जुलाई 2026) को इस मामले पर बेहद संवेदनशील और कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए मंत्री चौधरी ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि यह एनकाउंटर पूरी तरह 'गलत' था और इसमें संलिप्त पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

1. "भरत तिवारी का अधिकारियों को धमकाना गलत था, लेकिन एनकाउंटर जायज नहीं"

मंत्री अशोक चौधरी रविवार को विशेष रूप से मृतक भरत तिवारी के पैतृक आवास पहुंचे थे, जहां हाल ही में उनकी तेरहवीं (शोक सभा) संपन्न हुई थी। शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने के बाद मीडिया के कैमरों के सामने मंत्री ने घटनाक्रम का निष्पक्ष विश्लेषण करते हुए दोटूक बात कही:

  • परिजनों का दावा (खिलौना पिस्तौल): मंत्री अशोक चौधरी ने बताया, "भरत तिवारी की परसों ही तेरहवीं खत्म हुई है। उनके परिवार वालों का अब यह कहना है कि घटना के वक्त उनके हाथ में जो हथियार था, वह असली रिवॉल्वर नहीं था (बल्कि नकली या खिलौना पिस्तौल थी)।"

  • धमकाने की निंदा: हालांकि, मंत्री ने मृतक के आचरण को पूरी तरह क्लीन चिट नहीं दी। उन्होंने कहा, "जिस दलित-पिछड़ों के अधिकारों के लिए उन्हें (भरत तिवारी को) इतने आवेश और गुस्से में आना पड़ा, वह तरीका कतई सही नहीं था। किसी भी परिस्थिति में सरकारी पदाधिकारियों को डराना, धमकाना या उन पर रौब गालिब करना पूरी तरह 'गलत था'।"

  • एनकाउंटर पर सख्त रुख: सरकारी अमले को धमकाने की निंदा करने के बावजूद, अशोक चौधरी ने पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह अनुचित ठहराया। उन्होंने बार-बार दोहराया, "अधिकारियों को धमकाना गलत था, लेकिन इसके बावजूद उनका एनकाउंटर किया जाना भी पूरी तरह गलत था। मैं यह बात पूरी जिम्मेदारी के साथ बार-बार कह रहा हूं।"

2. "कार्रवाई निश्चित है, इसे जातिवाद के चश्मे से न देखें"

बिहार के राजनीतिक गलियारों में इस एनकाउंटर को लेकर अब जातीय और सामाजिक गोलबंदी शुरू हो गई है, जिस पर कैबिनेट मंत्री ने अपनी गहरी चिंता व्यक्त की:

  • जातिवाद का रंग: मंत्री चौधरी ने अफसोस जताते हुए कहा कि इस दुखद घटना और मौत को अब कुछ राजनीतिक तत्वों द्वारा जबरन 'जात-पात' (जातिवाद) से जोड़कर देखा जा रहा है, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। न्याय किसी जाति का मोहताज नहीं होता।

  • अधिकारियों पर गिरेगी गाज: उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था और सरकार की निष्पक्षता का भरोसा दिलाते हुए स्पष्ट किया, "इस पूरे एनकाउंटर मामले की उच्च स्तरीय जांच के आधार पर, इसमें शामिल और दोषी पाए जाने वाले सभी पुलिस पदाधिकारियों व अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई तो जरूर होगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।"

बेबाक24 टेक

बिहार जैसे राज्य में जहां पुलिसिया कार्रवाई और एनकाउंटर पर अमूमन सरकारें चुप्पी साध लेती हैं या पुलिस का बचाव करती हैं, वहां नीतीश कैबिनेट के एक बेहद कद्दावर मंत्री अशोक चौधरी का सरेआम कैमरे पर आकर यह कहना कि 'एनकाउंटर गलत था'— एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित कूटनीतिक यू-टर्न है। यह बयान साफ तौर पर दर्शाता है कि जमीन पर इस घटना को लेकर जनता और विशेषकर ब्राह्मण व अन्य समाजों में भारी आक्रोश है, जिसे भांपते हुए सत्ताधारी जेडीयू बैकफुट पर आ गई है।

'बेबाक24' का मानना है कि मंत्री अशोक चौधरी ने यहां एक बेहद महीन संतुलन बनाने की कोशिश की है। एक तरफ जहां उन्होंने अधिकारियों को धमकाने की प्रवृत्ति को गलत बताकर 'प्रशासनिक मनोबल' को टूटने से बचाया, वहीं दूसरी तरफ 'एनकाउंटर को गलत' बताकर पीड़ित परिवार और जनता के गुस्से को शांत करने की कोशिश की है। अगर परिवार का यह दावा सच साबित होता है कि भरत तिवारी के पास असली रिवॉल्वर नहीं थी, तो यह आत्मरक्षा (Self-Defense) के नाम पर पुलिस द्वारा की गई सीधी और क्रूर हत्या का मामला बनता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अब यह साफ करना होगा कि साल 2026 के सुशासन के दावों के बीच क्या बिहार पुलिस 'ट्रिगर हैप्पी' (Trigger-happy) होकर कानून को अपने हाथ में ले रही है? दोषियों पर त्वरित कार्रवाई ही अब सरकार की बची-खुची साख को बचा सकती है।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment