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"चोरी कितनी हुई और कैसे हुई, यह महापाप जांच का विषय है"— रामभक्तों के नाम खुला खत लिखकर राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने दी सफाई

by admin@bebak24.com on | 2026-07-05 21:32:15

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"चोरी कितनी हुई और कैसे हुई, यह महापाप जांच का विषय है"— रामभक्तों के नाम खुला खत लिखकर राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने दी सफाई

नेशनल डेस्क (बेबाक24): अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Donation Theft Case) को लेकर जारी भीषण राजनीतिक और कूटनीतिक रार के बीच अब 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के सबसे शीर्ष वित्तीय पदाधिकारी की पहली प्रतिक्रिया सामने आ गई है। ट्रस्ट के मुख्य कोषाध्यक्ष (Treasurer) स्वामी गोविंद देव गिरी ने रविवार (5-जुलाई-2026) को 'रामभक्तों के नाम' एक विस्तृत और खुला पत्र जारी कर कथित चंदा गबन और अव्यवस्था के आरोपों पर अपनी ओर से बड़ी सफाई दी है।

पुणे से रविवार को ही अयोध्या पहुंच रहे कोषाध्यक्ष ने अपने पत्र में वित्तीय पारदर्शिता का पूरा ब्योरा पेश किया है, साथ ही इस पूरी घटना को 'महापाप' करार देते हुए निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग की है।

1. "ट्रस्ट का पूरा लेखा-जोखा ऑडिटेड है, नकद लेन-देन नहीं होता"

विपक्ष और विभिन्न संतों द्वारा मंदिर के वित्तीय प्रबंधन पर उठाए जा रहे तीखे सवालों का तकनीकी जवाब देते हुए कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने पत्र में निम्नलिखित मुख्य बिंदु रेखांकित किए:

  • पूरी तरह ऑडिटेड फंड: गोविंद गिरी ने वित्तीय शुचिता पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के कोष (फंड) का एक-एक पैसे का लेखा-जोखा पूरी तरह से ऑडिटेड (Audited) है। कोई भी अधिकृत या जिम्मेदार व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत कभी भी इसकी जांच कर सकता है।

  • सीधा बैंक ट्रांसफर: उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण और प्रबंधन से जुड़े सभी बड़े व्यय (खर्च) सीधे बैंक ट्रांसफर (Direct Bank Transfer) के माध्यम से डिजिटल रूप से किए जाते हैं। प्रशासनिक स्तर पर नकद लेन-देन (Cash Transactions) नहीं के बराबर होता है।

  • सीमित नकद दान: पत्र में उन्होंने लिखा, "मेरे कार्यकाल के दौरान मैंने खुद नकद दान या वस्तु के रूप में बहुत सीमित उपहार ही स्वीकार किए हैं, जिनका पूरा रिकॉर्ड ट्रस्ट के पास सुरक्षित उपलब्ध है।"

2. चंदा गिनने की प्रक्रिया से खुद को बताया अलग

चढ़ावा चोरी के समय और सुरक्षा में चूक के आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कोषाध्यक्ष ने कहा कि उनका निवास स्थान पुणे (महाराष्ट्र) में है और वे व्यास (धार्मिक/आध्यात्मिक) कार्यों के सिलसिले में हर महीने या डेढ़ महीने में एक बार अयोध्या आते रहते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि चंदा गिनने की दैनिक या साप्ताहिक प्रक्रिया में उनका कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं रहता है। यह पूरा कार्य स्थानीय टीमों द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और तय नियमों के अनुसार ही पूरा किया जाता है।

3. "चोरी इस पावन धरती पर महापाप, जांच एजेंसी पर भरोसा रखें"

कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए जांच के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई:

कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी का आधिकारिक स्टैंड:

"चोरी कितनी हुई, कब हुई और किस तरह से की गई, यह पूरी तरह से गहन जांच का विषय है। इस पावन भूमि पर ऐसा कृत्य एक 'महापाप' है और इसकी जांच बेहद गहराई व निष्पक्षता से होनी चाहिए। हम सभी को जांच एजेंसी पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। न्यायालय इस पर अपना काम करेगा और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए।"

पत्र के अंत में उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट से भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए अधिक सख्त निगरानी व्यवस्था (Strict Surveillance) और अत्यधिक पारदर्शी डिजिटल प्रणाली लागू करने की विशेष अपील की है।

बेबाक24 टेक

राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी का यह खुला पत्र डैमेज कंट्रोल (Damage Control) की एक बड़ी कूटनीतिक कोशिश है, लेकिन यह पत्र सफाई देने से ज्यादा ट्रस्ट के भीतर चल रही आंतरिक खींचतान और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की प्रवृत्ति को भी उजागर करता है। जब वे कहते हैं कि 'चंदा गिनने में उनका सीधा हस्तक्षेप नहीं है और वे पुणे में रहते हैं', तो वे अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय प्रशासनिक टीम और चंपत राय जैसे पदाधिकारियों के प्रबंधन पर ही सवाल खड़े कर देते हैं।

'बेबाक24' का मानना है कि इस पत्र में सबसे महत्वपूर्ण बात उनका यह स्वीकार करना है कि 'चोरी कितनी हुई, कब हुई, यह जांच का विषय है।' यानी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि रामलला के दरबार में 'चोरी' तो निश्चित रूप से हुई है (जिसे निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने 'डकैती' कहा था)। जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और अब खुद कोषाध्यक्ष इस घटना को 'महापाप' मान रहे हैं, तो सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास की उस मांग को और मजबूती मिलती है कि इस पूरे ट्रस्ट को तत्काल आरटीआई (RTI) के दायरे में लाया जाए। जब तक वित्तीय खातों और एसओपी (SOP) को सार्वजनिक ऑडिट के लिए नहीं खोला जाएगा, तब तक ऐसी 'सफाइयों' से करोड़ों रामभक्तों के मन में उपजा संदेह दूर होना मुश्किल है।



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