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"हमें देश में न कोई सिंघम चाहिए और न पुष्पा"— जश्न में फायरिंग मामले में बिहार के बीजेपी विधायक राजू सिंह को 4 साल की जेल, दिल्ली की कोर्ट की सख्त टिप्पणी

by admin@bebak24.com on | 2026-07-05 21:18:36

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"हमें देश में न कोई सिंघम चाहिए और न पुष्पा"— जश्न में फायरिंग मामले में बिहार के बीजेपी विधायक राजू सिंह को 4 साल की जेल, दिल्ली की कोर्ट की सख्त टिप्पणी

राजनीतिक डेस्क (बेबाक24): दिल्ली की एक विशेष अदालत ने शनिवार (4 जुलाई 2026) को बिहार के साहेबगंज से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक और पूर्व राज्य पर्यटन मंत्री राजू कुमार सिंह को एक कड़ा संदेश देते हुए चार साल के साधारण कारावास (Simple Imprisonment) की सजा सुनाई है। यह फैसला साल 2018 में नए साल के जश्न के दौरान की गई 'हर्ष फायरिंग' (Celebratory Firing) में एक महिला की मौत के हाई-प्रोफाइल मामले में आया है।

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने 34 पन्नों के ऐतिहासिक फैसले में देश में बढ़ते 'गन कल्चर' और बाहुबल की तीखी आलोचना करते हुए ऐसी सख्त टिप्पणियां कीं, जिनकी गूंज अब पूरे राजनीतिक और कानूनी गलियारों में सुनाई दे रही है।

1. क्या है पूरा मामला? (31 दिसंबर 2018 की वो खौफनाक रात)

यह पूरा विवाद करीब साढ़े सात साल पुराना है, जब नए साल के स्वागत के जश्न में कानून के रखवाले ही कानून की धज्जियां उड़ा रहे थे:

  • फार्महाउस में पार्टी: 31 दिसंबर 2018 की रात दिल्ली के पॉश इलाके फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में नए साल (New Year 2019) की पार्टी चल रही थी। इस पार्टी में विधायक राजू कुमार सिंह भी बतौर मेहमान शामिल थे।

  • अंधाधुंध हर्ष फायरिंग: पार्टी के दौरान हवा में रुतबा और धौंस दिखाने के लिए विधायक ने अपनी पिस्तौल से अंधाधुंध गोलियां चलाईं।

  • महिला की मौत: इस हर्ष फायरिंग के दौरान वहां मौजूद एक अन्य महिला मेहमान अर्चना गुप्ता को गोली लग गई। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी।

2. 25 लाख रुपये का भारी जुर्माना और मुआवजे का आदेश

विशेष जज विशाल गोगने ने विधायक राजू कुमार सिंह पर 25 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जुर्माने की यह पूरी राशि मृतका अर्चना गुप्ता के पीड़ित परिवार को मुआवजे (Compensation) के तौर पर दी जाएगी।

अदालत ने अपने फैसले में विधायक की तरफ से सजा में किसी भी तरह की नरमी या रियायत बरतने की अपील को सिरे से खारिज कर दिया।

3. "कानून के शासन में हमें सिंघम या पुष्पा नहीं चाहिए"— कोर्ट की बड़ी बातें

अदालत ने राजनीतिक रसूख और हथियारों के प्रदर्शन को लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बताया। जज ने अपने आदेश में फिल्म और बाहुबल संस्कृति पर सीधा प्रहार किया:

  • सिंघम और पुष्पा पर टिप्पणी: फैसला सुनाते हुए जज विशाल गोगने ने कहा, "कानून के शासन वाले देश में हमें न तो कोई सिंघम चाहिए और न ही कोई पुष्पा। समाज फिल्मों के काल्पनिक और बाहुबली किरदारों से नहीं, बल्कि देश के संविधान और स्थापित कानूनों से चलता है।"

  • सत्ता का अहंकार: कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा साफ प्रतीत होता है कि विधायक राजू सिंह उस वक्त पूरी तरह 'सत्ता के अहंकार' में चूर थे और अंधाधुंध फायरिंग के जरिए वहां मौजूद लोगों पर अपना राजनीतिक और सामाजिक रुतबा दिखाना चाहते थे।

  • बाहुबलियों की एंट्री: अदालत ने आगाह किया कि इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना और जानलेवा हरकतें समाज में अवैध हथियारों के चलन को बढ़ावा देती हैं और भारतीय राजनीति में 'बाहुबलियों' की एंट्री की सबसे बड़ी वजह बनती हैं।

बेबाक24 टेक

दिल्ली की अदालत का यह फैसला उन तमाम नेताओं, बाहुबलियों और रसूखदारों के मुंह पर एक करारा तमाचा है जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं। अक्सर शादियों और पार्टियों में रसूख दिखाने के लिए की जाने वाली 'हर्ष फायरिंग' कई हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ देती है। एक जनप्रतिनिधि (विधायक) और पूर्व मंत्री होने के नाते राजू कुमार सिंह की जिम्मेदारी कानून व्यवस्था को बनाए रखने की थी, न कि दिल्ली के फार्महाउस में सरेआम गोलियां चलाकर किसी बेगुनाह की जान लेने की।

'बेबाक24' का मानना है कि जज विशाल गोगने की यह टिप्पणी कि 'हमें देश में न सिंघम चाहिए न पुष्पा'— बेहद प्रासंगिक है। जब रील लाइफ के बाहुबल को रीयल लाइफ में राजनेता अपना स्टेटस सिंबल बना लेते हैं, तो अर्चना गुप्ता जैसी निर्दोष नागरिक उसकी शिकार बनती हैं। 4 साल की जेल और 25 लाख का यह जुर्माना एक नजीर बनना चाहिए ताकि साल 2026 के इस आधुनिक दौर में सत्ता के नशे में चूर कोई भी 'माननीय' दोबारा हवा में गोली चलाने से पहले सौ बार सोचे।



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