by admin@bebak24.com on | 2026-07-04 20:17:50
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इंटरनेशनल डेस्क (बेबाक24): रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) अब एक बेहद विनाशकारी और आक्रामक मोड़ पर पहुंच चुका है। यूक्रेन ने शनिवार (4 जुलाई 2026) को रूस के उत्तर-पश्चिम में स्थित उसके दूसरे सबसे बड़े शहर और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के गृह-नगर सेंट पीटर्सबर्ग (St. Petersburg) में एक प्रमुख तेल टर्मिनल पर आधी रात को भीषण ड्रोन हमला किया।
इस बेहद संवेदनशील रणनीतिक हमले की आधिकारिक पुष्टि खुद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने अपने एक विशेष संबोधन में की है। ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन अब सीधे रूस के उस बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को निशाना बना रहा है, जो पुतिन की युद्ध मशीनरी को चलाने के लिए भारी-भरकम राजस्व (राजकोष) जुटाता है।
इस अप्रत्याशित हमले पर रूस की तरफ से भी त्वरित प्रतिक्रिया आई है। सेंट पीटर्सबर्ग के गवर्नर अलेक्ज़ेंडर बेग्लोव ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि शहर पर यूक्रेन की तरफ से एक "भीषण और बड़े पैमाने पर" ड्रोन हमला किया गया है।
नुकसान की बात मानी: गवर्नर ने आधिकारिक तौर पर माना कि हमले में सेंट पीटर्सबर्ग तेल टर्मिनल को गंभीर नुकसान पहुंचा है और वहां आग बुझाने व राहत कार्य की टीमें तैनात की गई हैं।
राहत की खबर: गनीमत यह रही कि इस भीषण धमाके और हमले में किसी भी रूसी नागरिक या कर्मचारी के हताहत (घायल या मौत) होने की कोई सूचना नहीं है।
नौसैनिक अड्डे पर भी वार: यूक्रेनी रक्षा सूत्रों का दावा है कि इस तेल टर्मिनल के साथ-साथ इसी क्षेत्र में मौजूद एक प्रमुख रूसी नौसैनिक अड्डे (Russian Naval Base) को भी लंबी दूरी के ड्रोनों के जरिए सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया है।
यूक्रेन ने हाल के महीनों में रूस के महत्वपूर्ण एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर (ऊर्जा बुनियादी ढांचे) पर अपनी लंबी दूरी के ड्रोनों (Long-range Drones) के जरिए हमलों की रफ्तार को कई गुना तेज़ कर दिया है। यूक्रेन की इस नई रणनीति का असर अब रूस की अर्थव्यवस्था पर साफ़ दिखने लगा है:
भारी किल्लत: लगातार हो रहे इन हमलों के कारण रूस के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर ईंधन और गैस की भारी कमी पैदा हो गई है।
यूक्रेन का बेबाक दावा: कीव (यूक्रेन) का दावा है कि उनके लगातार हवाई हमलों की वजह से अब तक रूस की लगभग 43 फ़ीसदी तेल रिफ़ाइन करने की कुल क्षमता पूरी तरह "ख़त्म" (तबाह) की जा चुकी है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों द्वारा इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
वैध निशाना: यूक्रेन का कूटनीतिक रुख बेहद साफ़ है कि रूसी तेल और गैस सुविधाएं उनके लिए हमला करने के लिए 'वैध कूटनीतिक और सैन्य ठिकाने' हैं, क्योंकि व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन के खिलाफ अपने इस खूनी युद्ध अभियान का पूरा खर्च इसी जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) के निर्यात से मिलने वाले पैसों से चला रहे हैं।
यूक्रेनी ड्रोनों की इस मार ने क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) को बैकफुट पर आने के लिए मजबूर कर दिया है। खुद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले हफ़्ते सार्वजनिक रूप से यह बात स्वीकार की थी कि यूक्रेनी हमलों के कारण देश के भीतर ईंधन संकट (Fuel Crisis) गहरा गया है।
इसी संकट से निपटने के लिए, शनिवार (4 जुलाई 2026) को राष्ट्रपति पुतिन ने रूस के घरेलू ईंधन बाज़ार में सप्लाई और वितरण को तत्काल बढ़ाने वाले एक विशेष आपातकालीन बिल (Emergency Fuel Bill) को मंज़ूरी दे दी है, ताकि घरेलू स्तर पर बढ़ती कीमतों और किल्लत को नियंत्रित किया जा सके।
फरवरी 2022 में जब व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर सैन्य आक्रमण शुरू किया था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि चार साल बाद युद्ध की आग खुद रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग के तेल टर्मिनलों तक पहुंच जाएगी। यूक्रेन द्वारा रूस की 43% रिफाइनिंग क्षमता को तबाह करने का दावा भले ही मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) का हिस्सा हो, लेकिन पुतिन का खुद देश में ईंधन की कमी को मानना और शनिवार को आनन-फानन में एक नए बिल को मंजूरी देना यह साबित करता है कि ज़ेलेंस्की की 'इकॉनोमिक वॉरफेयर' (आर्थिक युद्ध नीति) रूस को भीतर से खोखला कर रही है।
'बेबाक24' का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा माउंट रशमोर से "ईरान को बुरी तरह हराने" और "अमेरिका के दुश्मनों को इतिहास की गहराइयों में पहुंचाने" वाले आक्रामक बयान के तुरंत बाद यूक्रेन का सेंट पीटर्सबर्ग पर यह हमला वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यूक्रेन ने पुतिन के घरेलू नौसैनिक अड्डे और तेल डिपो को फूंककर यह दिखा दिया है कि वह पश्चिमी हथियारों और अपने स्वदेशी ड्रोनों के दम पर मॉस्को को घुटनों पर लाने की कड़वी कूटनीति पर काम कर रहा है। आने वाले दिनों में रूस इस आर्थिक और सैन्य चोट का बदला लेने के लिए कीव पर और ज्यादा घातक मिसाइल हमले कर सकता है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा संकट और गहराएगा।
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