by admin@bebak24.com on | 2026-07-04 20:11:27
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पॉलिटिकल डेस्क (बेबाक24): पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कमान खुद अपने हाथों में लेने के तुरंत बाद ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं को लेकर एक बेहद भावुक और राजनीतिक रूप से आक्रामक बयान जारी किया है। शनिवार को एक विशेष संदेश में ममता बनर्जी ने उन सभी जमीनी कार्यकर्ताओं और नेताओं का आभार व्यक्त किया, जो केंद्रीय एजेंसियों के कथित दबाव और मुश्किल दौर के बावजूद मजबूती से पार्टी के साथ खड़े हैं।
इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर 'वोटों की डकैती' और ईवीएम में बड़े पैमाने पर हेरफेर करने के बेहद गंभीर और बेबाक आरोप लगाए हैं।
शनिवार को चंद्रिमा भट्टाचार्य के अचानक इस्तीफे के बाद पैदा हुए राजनीतिक हालातों के बीच ममता बनर्जी ने सीधे अपने जमीनी कार्यकर्ताओं (ग्रेसरूट वर्कर्स) को संबोधित किया:
ममता बनर्जी (TMC प्रमुख): "मैं आम लोगों, हमारे समर्पित ज़मीनी कार्यकर्ताओं और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) से जुड़े उन सभी जांबाज लोगों के प्रति अपनी गहरी एकजुटता, सलाम, बधाई और शुभकामनाएं व्यक्त करती हूं, जो आज भी तमाम मुश्किलों के बाद पार्टी के साथ वफादारी से डटे हुए हैं। मैं विशेष रूप से उन लोगों को सलाम करती हूं, जिन्होंने भारी दबाव के बावजूद बीजेपी का दामन थामकर अपनी मूल पार्टी (TMC) के साथ कोई विश्वासघात नहीं किया।"
पिछले कुछ दिनों से बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रमों पर खुद शांत रहने को लेकर भी ममता बनर्जी ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा:
मौन का कारण: "पिछले कुछ दिनों से आपने देखा होगा कि मेरी पार्टी के तमाम वरिष्ठ सहयोगी और प्रवक्ता लगातार मीडिया में अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन मैंने खुद बहुत कम बोला है। इसका कारण यह है कि कभी-कभी मुझे महसूस होता है कि 'मौन' सबसे अधिक बोलता है (Silence speaks louder than words)।"
ताकत जुटाने की रणनीति: कूटनीतिक हलकों में ममता के इस मौन को संगठन के भीतर एक बड़े फेरबदल और नई रणनीति तैयार करने के तौर पर देखा जा रहा था, जिसकी परिणति शनिवार को उनके खुद प्रदेश अध्यक्ष बनने के रूप में सामने आई।
अपने संदेश के सबसे आक्रामक हिस्से में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के हालिया सत्ता समीकरणों को लेकर बीजेपी को कटघरे में खड़ा किया:
"हम सभी यह अच्छी तरह जानते हैं कि बीजेपी लोकतांत्रिक तरीके से नहीं, बल्कि वोटों में भारी धांधली करके सत्ता में आई है। उन्होंने सरेआम ईवीएम (EVM) में हेरफेर किया, हमारे वोट चोरी किए और मतों की गिनती (Counting Process) की पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी की है।"
उन्होंने राज्य के मौजूदा हालातों पर चिंता जताते हुए आगे कहा:
"आज बंगाल में ऐसा भय और आतंक का माहौल फैला दिया गया है कि जो लोग हमारा समर्थन करते हैं, जो आज भी टीएमसी के झंडे के साथ खड़े हैं, उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। हज़ारों की संख्या में हमारे सीधे-साधे कार्यकर्ताओं को दिनदहाड़े निशाना बनाया जा रहा है, प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि उनके ख़िलाफ़ न तो कोई वैध कानूनी मामला है और न ही किसी अदालत का कोई कड़ा आदेश।"
शनिवार को चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा स्वीकार कर खुद बंगाल टीएमसी के अध्यक्ष पद का कांटों भरा ताज पहनना और तुरंत बाद कार्यकर्ताओं के लिए "सलाम और एकजुटता" का संदेश जारी करना— यह दिखाता है कि ममता बनर्जी अब 'करो या मरो' (Do or Die) के मोड में आ चुकी हैं। बीजेपी के हाथों सत्ता गंवाने (या विपक्ष में आने) के बाद जिस तरह टीएमसी के भीतर दलबदल और बिखरने का खतरा मंडरा रहा था, उस पर ममता ने वफादारी का इमोशनल कार्ड खेलकर ब्रेक लगाने की कोशिश की है। कार्यकर्ताओं को "सलाम" कहना असल में उन नेताओं को चेतावनी है जो पाला बदलने की फिराक में हैं।
'बेबाक24' का मानना है कि ममता बनर्जी का ईवीएम हेरफेर और वोट चोरी का आरोप लगाना पराजय के बाद विपक्ष का एक पुराना और स्थापित कूटनीतिक नैरेटिव है, लेकिन इसके पीछे की असली कड़वी हकीकत यह है कि तृणमूल कांग्रेस को इस वक्त जमीनी स्तर पर अपने बिखरे हुए कैडर को समेटने की सख्त जरूरत है। मदन मित्रा और कुणाल घोष को महासचिव बनाकर और खुद कमान अपने हाथ में लेकर ममता ने यह साफ कर दिया है कि वह डरकर पीछे हटने वाली नेता नहीं हैं। बंगाल की सड़कों पर अब टीएमसी और सत्ताधारी बीजेपी के बीच यह संघर्ष आने वाले दिनों में और ज्यादा तीखा, हिंसक और बेबाक होने वाला है।
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