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बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी का बड़ा दांव: चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे के बाद खुद संभाली TMC प्रदेश अध्यक्ष की कमान; मदन मित्रा और कुणाल घोष बने महासचिव

by on | 2026-07-04 20:02:37

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बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी का बड़ा दांव: चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे के बाद खुद संभाली TMC प्रदेश अध्यक्ष की कमान; मदन मित्रा और कुणाल घोष बने महासचिव

पॉलिटिकल डेस्क (बेबाक24): पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर शनिवार (4 जुलाई 2026) को एक बहुत बड़ा संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिला है। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने एक बेहद चौंकाने वाले और 'बेबाक' फैसले के तहत खुद पश्चिम बंगाल टीएमसी के राज्य अध्यक्ष (State President) का पदभार संभालने का एलान कर दिया है।

दरअसल, शनिवार को ही टीएमसी की वरिष्ठ नेता और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी को अपना आधिकारिक इस्तीफा सौंप दिया था। चंद्रिमा के इस्तीफे के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने कमान अपने हाथों में ले ली।

1. वीडियो संदेश जारी कर दी जानकारी; मदन और कुणाल की हुई 'पावरफुल' वापसी

ममता बनर्जी ने एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर पार्टी के इस नए और आक्रामक संगठनात्मक ढांचे की आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने संगठन को और अधिक आक्रामक बनाने के लिए पार्टी के दो सबसे तेज-तर्रार और कद्दावर नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है:

ममता बनर्जी (TMC प्रमुख): "तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चेयरपर्सन के तौर पर, मैं यह घोषणा करती हूं कि आज से मैं खुद पश्चिम बंगाल राज्य टीएमसी अध्यक्ष (West Bengal State TMC President) की भूमिका भी संभालूंगी। इसके साथ ही, पार्टी की इस नई कोर राज्य समिति में दो बेहद महत्वपूर्ण नेताओं— मदन मित्रा और कुणाल घोष को शामिल किया गया है। इन दोनों को इस प्रदेश समिति का नया महासचिव (General Secretary) नियुक्त किया जाता है।"

2. चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा और अंदरूनी समीकरण

शनिवार सुबह चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा ममता बनर्जी को लिखे गए पत्र और इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी थी। हालांकि, ममता बनर्जी ने इस इस्तीफे को बिना किसी देरी के स्वीकार करते हुए खुद को अध्यक्ष पद पर बिठाकर पार्टी के भीतर किसी भी संभावित गुटबाजी या असंतोष की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

मदन मित्रा और कुणाल घोष को महासचिव बनाना यह साफ संकेत देता है कि आगामी दिनों में टीएमसी राज्य के भीतर विपक्षी ताकतों (विशेषकर बीजेपी) के खिलाफ जमीनी और मीडिया के स्तर पर एक बेहद आक्रामक और जुझारू रणनीति के साथ मैदान में उतरने जा रही है।

बेबाक24 टेक

ममता बनर्जी का खुद पश्चिम बंगाल टीएमसी के प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान संभालना और साथ में मदन मित्रा व कुणाल घोष जैसे कद्दावर व मुखर चेहरों को महासचिव बनाना— यह दिखाता है कि 'दीदी' अब बंगाल संगठन पर अपना शत-प्रतिशत सीधा और अभेद्य नियंत्रण चाहती हैं। हाल के समय में पार्टी के भीतर पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी (अभिषेक बनर्जी गुट) को लेकर जो कयासबाजी मीडिया में चलती रही है, उस पर ममता ने खुद अध्यक्ष बनकर पूर्णविराम लगा दिया है। अब पार्टी का हर छोटा-बड़ा फैसला सीधे उनके दफ्तर से संचालित होगा।

'बेबाक24' का मानना है कि मदन मित्रा और कुणाल घोष की महासचिव के पद पर यह 'पावरफुल वापसी' बंगाल की राजनीति को आने वाले दिनों में और ज्यादा तीखी और आक्रामक बनाने वाली है। कुणाल घोष जहां मीडिया और नैरेटिव की लड़ाई में माहिर माने जाते हैं, वहीं मदन मित्रा की जमीनी पकड़ और कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। चंद्रिमा भट्टाचार्य के हटने के बाद ममता बनर्जी ने खुद को फ्रंट फुट पर लाकर यह साफ कर दिया है कि विपक्षी खेमा चाहे जितनी कोशिश कर ले, बंगाल के किले की रखवाली वह खुद सेनापति बनकर करेंगी।



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