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पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान के बीच फोन पर बातचीत: होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों की आज़ादी और ब्रिक्स सहयोग पर हुई बेबाक चर्चा

by admin@bebak24.com on | 2026-07-01 10:50:08

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पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान के बीच फोन पर बातचीत: होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों की आज़ादी और ब्रिक्स सहयोग पर हुई बेबाक चर्चा

अंतरराष्ट्रीय डेस्क (बेबाक24): पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका-ईरान वार्ता के गतिरोध और होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जारी भारी तनाव के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर मसूद पेज़ेश्कियान के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण टेलीफोनिक बातचीत हुई है। पीएम मोदी ने खुद सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' (X) पर इस उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद की जानकारी साझा की।

इस बातचीत में भारत ने स्पष्ट और बेबाक शब्दों में वैश्विक व्यापार के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट को खुला रखने की अपनी प्रतिबद्धता और चिंता को ईरान के सामने रखा है।

1. "होर्मुज़ स्ट्रेट में आवाजाही की आज़ादी दुनिया के लिए ज़रूरी" — पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति के साथ बातचीत के मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच क्षेत्र में शांति बहाली को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई है।

  • शांति की उम्मीद: पीएम मोदी ने लिखा, "पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं (तनाव) के बारे में ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर मसूद पेज़ेश्कियान से बातचीत की। दोनों पक्षों के बीच अब तक हुई कूटनीतिक प्रगति का हमने स्वागत किया और उम्मीद जताई कि लगातार किए जा रहे साझा प्रयासों से इस पूरे क्षेत्र में जल्द ही स्थायी शांति स्थापित होगी।"

  • भारत का कड़ा संदेश: बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक बिंदु उठाते हुए दोहराया कि भारत और पूरी दुनिया के आर्थिक हितों के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों और व्यापारिक आवाजाही की आज़ादी (Freedom of Navigation) बेहद महत्वपूर्ण है और इसमें किसी भी तरह का व्यवधान नहीं आना चाहिए।

2. ईरानी राष्ट्रपति ने की 'ब्रिक्स' बैठक की तारीफ; समझौतों पर दिया जोर

भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने भी इस टेलीफोनिक बातचीत की विस्तृत जानकारी देते हुए कतर (दोहा) में अमेरिका के साथ सीजफायर वार्ता रद्द होने के बीच इस बातचीत को बेहद रणनीतिक बताया।

  • ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक: राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने भारत की मेजबानी में हुए ब्रिक्स (BRICS) ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के सफल और शानदार आयोजन की जमकर सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बहुपक्षीय वैश्विक मंचों पर ईरान और भारत का आपसी सहयोग भविष्य में और अधिक मजबूत होगा।

  • ऐतिहासिक और व्यापारिक रिश्ते: ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और ईरान के संबंध सदियों पुराने ऐतिहासिक जुड़ाव और आपसी सम्मान पर टिके हैं। दोनों देशों के बीच राजनीति, अर्थशास्त्र, व्यापार, ट्रांजिट (चाबहार बंदरगाह के जरिए) और अंतरराष्ट्रीय मामलों में सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

3. "ईरान समझौते के पालन के लिए प्रतिबद्ध, दूसरा पक्ष भी ईमानदारी दिखाए"

खाड़ी देशों में जारी हालिया संघर्ष विराम वार्ताओं का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर परोक्ष रूप से निशाना साधा।

  • समझौते की शर्तें: उन्होंने युद्धविराम और संघर्ष समाप्त करने के लिए हाल ही में हुए कूटनीतिक समझौतों का जिक्र करते हुए कहा, "ईरान अपनी तरफ से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए सभी दायित्वों और वादों का पालन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हम उम्मीद करते हैं कि दूसरा पक्ष (अमेरिका और सहयोगी देश) भी समझौते की शर्तों का पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ पालन करेगा, ताकि क्षेत्र में स्थायी स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।"

  • समान सोच: उन्होंने जोर दिया कि कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत और ईरान की सोच बिल्कुल एक जैसी है, जो दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों का मुख्य आधार है।

बेबाक24 टेक

यह टेलीफोनिक बातचीत कूटनीतिक लिहाज से बेहद सटीक समय पर हुई है। एक तरफ जहां ईरान ने दोहा में अमेरिकी प्रतिनिधियों (स्टीव विटकॉफ़ और जैरेड कुशनर) के साथ बैठक के दावों को पूरी तरह खारिज कर अपनी कड़क छवि दिखाई है, वहीं दूसरी तरफ पीएम मोदी से बात कर उसने यह संदेश दिया है कि वह भारत जैसे अपने पुराने रणनीतिक साझेदारों से दूरी नहीं बनाना चाहता।

भारत के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता 'होर्मुज़ स्ट्रेट' ही है, क्योंकि भारत का अधिकांश कच्चा तेल (Crude Oil) और व्यापारिक जहाज इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरते हैं। अमेरिका-ईरान विवाद के चलते यदि ईरान इस जलडमरूमध्य (Strait) को ब्लॉक करता है या वहां टैक्स वसूलने की जिद पर अड़ा रहता है, तो भारत में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। पीएम मोदी ने पेज़ेश्कियान को 'आवाजाही की आज़ादी' का महत्व याद दिलाकर यह साफ कर दिया है कि भारत क्षेत्र में शांति तो चाहता है, लेकिन वह अपने आर्थिक हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। चाबहार पोर्ट और ब्रिक्स के मंच पर दोनों देशों का साथ आना यह दिखाता है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, भारत और ईरान के बीच का बेबाक कूटनीतिक चैनल पूरी तरह सक्रिय और मजबूत है।



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