by admin@bebak24.com on | 2026-07-01 10:41:13
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अंतरराष्ट्रीय डेस्क (बेबाक24): अमेरिका की आव्रजन (इमिग्रेशन) नीति को पूरी तरह बदलने की कोशिशों में जुटे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) से एक बहुत बड़ा कानूनी झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप के उस बेहद विवादित कार्यकारी आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है, जिसके जरिए वे 'जन्मसिद्ध नागरिकता' (Birthright Citizenship) के अधिकार को सीमित या समाप्त करना चाहते थे।
सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने खुली नाराजगी और निराशा जाहिर की है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 'फॉक्स न्यूज़' (Fox News) के एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया और अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी।
अदालत के फैसले पर तंज: जेडी वेंस ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जन्मसिद्ध नागरिकता के अधिकार को बरकरार रखने के फैसले को "बेहद निराशाजनक" करार दिया।
व्हाइट हाउस पीछे नहीं हटेगा: उपराष्ट्रपति वेंस ने स्पष्ट और बेबाक शब्दों में कहा कि ट्रंप प्रशासन इस कानूनी झटके के बाद भी चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस की अमेरिकी इमिग्रेशन नीति में आमूलचूल बदलाव करने की कोशिशें पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहेंगी और सरकार इस मामले में अपने सभी उपलब्ध कूटनीतिक और कानूनी विकल्पों (Legal Options) पर आगे भी काम करती रहेगी।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल (Second Term) की शुरुआत के पहले ही दिन आव्रजन पर कड़ा प्रहार करते हुए एक बड़ा कार्यकारी आदेश जारी किया था।
अवैध प्रवासियों को निशाना: इस आदेश के तहत प्रावधान किया गया था कि अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे या केवल अस्थायी वीज़ा (जैसे टूरिस्ट या स्टूडेंट वीज़ा) पर मौजूद माता-पिता से पैदा होने वाले बच्चों को अमेरिका की स्वतः जन्मजात नागरिकता नहीं मिलेगी।
निचली अदालतों ने भी रोका था: ट्रंप के इस आदेश को प्रवासियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठनों ने तुरंत कोर्ट में चुनौती दी थी। पहले अमेरिका की निचली अदालतों ने इस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाई, जिसके बाद ट्रंप प्रशासन ने अपील करते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का रुख किया था। लेकिन अब शीर्ष अदालत ने भी निचली अदालतों के फैसले को सही ठहराते हुए ट्रंप के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन (14th Amendment) के तहत 'जूस सोली' (Jus Soli) यानी धरती के अधिकार का नियम लागू है।
इसके मुताबिक, कोई भी बच्चा जो अमेरिकी धरती या उसके अधिकार क्षेत्र में जन्म लेता है, वह स्वतः ही अमेरिका का कानूनी नागरिक बन जाता है, चाहे उसके माता-पिता की नागरिकता या कानूनी स्थिति कुछ भी क्यों न हो। ट्रंप प्रशासन इसी संवैधानिक व्यवस्था को खत्म करना चाहता था।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला डोनाल्ड ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' और कट्टर आव्रजन विरोधी एजेंडे के मुंह पर एक बहुत बड़ा कानूनी तमाचा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि जन्मसिद्ध नागरिकता के कारण अमेरिका में अवैध प्रवासियों की संख्या बाढ़ की तरह बढ़ रही है (जिन्हें वे 'एंकर बेबीज' कहते हैं), लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की मूल भावना की रक्षा करते हुए यह साफ कर दिया है कि राष्ट्रपति की शक्तियां संविधान से ऊपर नहीं हो सकतीं।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का यह कहना कि वे "सभी कानूनी विकल्पों पर काम जारी रखेंगे", केवल अपनी कोर-वोटर कोर (दक्षिणपंथी मतदाताओं) को संतुष्ट करने का एक राजनीतिक पैंतरा है। सच यह है कि सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम फैसले के बाद अब ट्रंप प्रशासन के पास इस नियम को बदलने का केवल एक ही रास्ता बचता है— और वह है अमेरिकी संविधान में संशोधन करना। लेकिन वर्तमान अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के गणित को देखते हुए संविधान संशोधन करना ट्रंप के लिए लगभग असंभव है। यह फैसला उन लाखों प्रवासियों, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय आईटी पेशेवर (जो एच-1बी जैसे अस्थायी वीजा पर हैं) भी शामिल हैं, के लिए एक बहुत बड़ी और बेबाक राहत लेकर आया है, क्योंकि अब उनके अमेरिका में पैदा होने वाले बच्चों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
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