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पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक पर भारत का कड़ा रुख: "आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश", अफगानिस्तान पर हमले की कड़ी निंदा

by admin@bebak24.com on | 2026-06-30 12:41:10

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पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक पर भारत का कड़ा रुख: "आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश", अफगानिस्तान पर हमले की कड़ी निंदा

नई दिल्ली (बेबाक24): डूरंड लाइन पार कर अफगानिस्तान के कुनार, पक्तिया और पक्तिका प्रांतों में पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा किए गए हवाई हमलों पर अब भारत सरकार ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे क्षेत्रीय शांति के लिए एक सीधा खतरा बताया है।

इस बयान के बाद दक्षिण एशियाई भू-राजनीति में पाकिस्तान एक बार फिर कूटनीतिक रूप से घिरता नजर आ रहा है।

1. "लापरवाह व्यवहार और संप्रभुता पर हमला" — भारतीय विदेश मंत्रालय

भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में अफगानिस्तान के आम नागरिकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई है।

बयान के मुख्य बिंदु:

  • निर्दोषों की मौत पर दुख: भारत ने कहा, "भारत अफगान क्षेत्र पर पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा करता है, जिनमें कई आम नागरिकों की मौत हुई है। बेहद दुखद है कि इन हमलों का शिकार बेकसूर महिलाएं और बच्चे भी बने हैं।"

  • संप्रभुता का उल्लंघन: विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि पाकिस्तान की यह खुली आक्रामक कार्रवाई अफगानिस्तान की संप्रभुता (Sovereignty) और क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा हमला है, जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत स्वीकार्य नहीं है।

2. "आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटका रहा है पाकिस्तान"

भारत ने पाकिस्तान की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति पर सीधा तंज कसते हुए उसकी रणनीतिक विफलता को उजागर किया है।

  • ध्यान भटकाने की रणनीति: नई दिल्ली ने अपने बयान में साफ शब्दों में कहा कि ये हमले पाकिस्तान के 'लापरवाह व्यवहार' (Reckless Behavior) को दिखाते हैं। पाकिस्तान अपने देश के भीतर जारी चरमपंथ और 'आंतरिक विफलताओं' से दुनिया और अपनी जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे हिंसक कदमों का सहारा ले रहा है।

  • अफगानिस्तान को समर्थन: भारत ने इसके साथ ही आतंकवाद से जूझ रहे अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपने 'अटूट और ऐतिहासिक समर्थन' को एक बार फिर दोहराया है।

3. क्या है पूरा मामला?

यह विवाद रविवार और सोमवार की दरमियानी रात तब शुरू हुआ, जब पाकिस्तानी सेना और लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर जमीनी और हवाई हमले किए।

  • पाकिस्तान का दावा: इस्लामाबाद का कहना है कि उन्होंने टीटीपी (TTP) और जमात-उल-अहरार के ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें कमांडर खान फ्रॉश सहित 29 चरमपंथी मारे गए।

  • तालिबान का दावा: दूसरी ओर, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने इन हमलों को 'कायरतापूर्ण' बताते हुए कहा कि मंडीखेल गांव जैसे रिहायशी इलाकों में बमबारी की गई, जिससे महिलाओं और बच्चों समेत लगभग 100 आम नागरिक हताहत (शहीद और घायल) हुए हैं।

बेबाक24 टेक

अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक पर भारत का यह त्वरित और बेहद कड़ा बयान रणनीतिक रूप से बहुत मायने रखता है। भारत ने बिना समय गंवाए सीधे तौर पर तालिबान शासित अफगानिस्तान के संप्रभु अधिकारों का समर्थन किया है। यह दिखाता है कि नई दिल्ली काबुल के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को मजबूत कर रही है और पाकिस्तान को इस क्षेत्र में पूरी तरह अलग-थलग (Isolate) करने की रणनीति पर काम कर रही है।

विदेश मंत्रालय का यह कहना कि "पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटका रहा है", सीधे तौर पर इस्लामाबाद की दुखती रग पर हाथ रखने जैसा है। पाकिस्तान इस समय खुद भीषण आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है, और डूरंड लाइन पर जंग छेड़ना उसकी सेना की हताशा को दिखाता है। भारत ने इस बयान के जरिए वैश्विक मंच पर यह संदेश दे दिया है कि पाकिस्तान केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि अपने सभी पड़ोसियों (चाहे वह ईरान हो या अफगानिस्तान) की स्थिरता के लिए एक 'लापरवाह और गैर-जिम्मेदार' देश बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि काबुल और नई दिल्ली की यह वैचारिक जुगलबंदी इस्लामाबाद पर कितना दबाव बनाती है।



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