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डोनाल्ड ट्रंप का दावा ईरान ने किया खारिज: दोहा में नहीं होगी कोई बैठक, ईरानी विदेश मंत्रालय बोला— "हम अमेरिका से बात नहीं कर रहे"

by admin@bebak24.com on | 2026-06-30 12:11:51

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डोनाल्ड ट्रंप का दावा ईरान ने किया खारिज: दोहा में नहीं होगी कोई बैठक, ईरानी विदेश मंत्रालय बोला— "हम अमेरिका से बात नहीं कर रहे"

अंतरराष्ट्रीय डेस्क (बेबाक24): अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जारी तनाव को कम करने के लिए कतर की राजधानी दोहा में होने वाली 'हाई-प्रोफाइल' शांति वार्ता को लेकर एक बहुत बड़ा कूटनीतिक तख्तापलट हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस सनसनीखेज दावे को ईरान सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मंगलवार (30 जून) को दोहा में दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठने वाले हैं।

ईरान के इस सख्त और बेबाक रुख के बाद खाड़ी देशों (Gulf Countries) में स्थायी शांति बहाली के अमेरिकी दावों को बड़ा झटका लगा है।

1. "अमेरिकी पक्ष के साथ किसी भी स्तर पर कोई वार्ता नहीं" — ईरान

बीबीसी फारसी सेवा के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप के बयान के तुरंत बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने एक आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति साफ की।

  • ट्रंप का दावा खारिज: बक़ाई ने कड़े लहजे में कहा कि आने वाले दिनों में ईरान "अमेरिकी पक्ष के साथ किसी भी स्तर पर (चाहे तकनीकी हो या कूटनीतिक) कोई वार्ता बैठक नहीं करेगा।"

  • यात्राओं में कोई संबंध नहीं: कतर में दोनों देशों के डेलिगेशन की मौजूदगी पर स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा कि कतर (दोहा) में अमेरिकी प्रतिनिधियों की यात्रा का वहां मौजूद ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। दोनों अपनी अलग-अलग प्राथमिकताओं के लिए वहां हैं।

इसके साथ ही ईरान के उप विदेश मंत्री और तकनीकी वार्ता टीम के प्रमुख काज़ेम ग़रीबाबादी ने भी साफ कर दिया कि इस हफ्ते अमेरिका के साथ ऐसी किसी भी द्विपक्षीय बैठक की कोई योजना नहीं है।

2. डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस ने क्या दावा किया था?

ईरानी अधिकारियों के ये तीखे बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस सार्वजनिक दावे के बाद आए हैं, जिसने वैश्विक मीडिया में सुर्खियां बटोर ली थीं।

  • ट्रंप का बयान: राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि खुद ईरान के विशेष अनुरोध (Request) पर मंगलवार, 30 जून को अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधि दोहा में सीजफायर और 'आर्टिकल 5' के विवाद को सुलझाने के लिए मिलेंगे।

  • ट्रंप के दूतों के नाम: व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने आधिकारिक तौर पर बताया था कि ट्रंप के बेहद भरोसेमंद और विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ़ और ट्रंप के दामाद व वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ जैरेड कुशनर इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए दोहा पहुंच रहे हैं। लेकिन ईरान के इनकार ने इस अमेरिकी योजना पर पानी फेर दिया है।

बेबाक24 टेक

यह घटना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में 'माइंड गेम्स' (मानसिक जंग) का एक बेहतरीन उदाहरण है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी 'डील-मेकर' वाली छवि को भुनाने के लिए दुनिया के सामने यह संदेश देना चाहते थे कि उनके दबाव के आगे झुककर ईरान खुद बातचीत की भीख मांग रहा है। यही वजह थी कि व्हाइट हाउस ने आनन-फानन में स्टीव विटकॉफ़ और जैरेड कुशनर जैसे भारी-भरकम नामों को दोहा भेजने का ऐलान भी कर दिया।

लेकिन ईरान ने बेहद बेबाक तरीके से ट्रंप के इस 'पीआर स्टंट' की हवा निकाल दी। ईरान के विदेश मंत्रालय का यह कहना कि "हम अमेरिकी पक्ष से किसी भी स्तर पर बात नहीं करेंगे", यह दिखाता है कि तेहरान अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य धमकियों के आगे झुकने को तैयार नहीं है। दरअसल, सारा विवाद समझौते के 'आर्टिकल 5' को लेकर है, जहां ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना एकाधिकार और टोल वसूलने का हक चाहता है। ईरान को लगता है कि अगर वह इस समय ट्रंप के बुलावे पर सीधे टेबल पर बैठ गया, तो इसे उसकी कमजोरी माना जाएगा। यह कूटनीतिक गतिरोध यह साफ करता है कि खाड़ी में युद्धविराम की डोर बेहद कमजोर है, और जब तक दोनों देश अपनी 'ईगो' (अहंकार) छोड़कर टेबल पर नहीं आते, तब तक होर्मुज स्ट्रेट में मिसाइलें बरसने का खतरा बना रहेगा।



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