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वेनेज़ुएला में महातबाही: सदी के सबसे भयानक भूकंप से मलबे का ढेर बना ला गुआइरा, अब तक 1430 मौतों की पुष्टि, 50 हजार लापता

by admin@bebak24.com on | 2026-06-28 14:10:51

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वेनेज़ुएला में महातबाही: सदी के सबसे भयानक भूकंप से मलबे का ढेर बना ला गुआइरा, अब तक 1430 मौतों की पुष्टि, 50 हजार लापता

वेनेज़ुएला में महातबाही: सदी के सबसे भयानक भूकंप से मलबे का ढेर बना ला गुआइरा, अब तक 1430 मौतों की पुष्टि, 50 हजार लापता

ला गुएरा (वेनेज़ुएला)/लंदन: वेनेज़ुएला इस समय अपनी सदी की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदा और मानवीय त्रासदी से जूझ रहा है। बुधवार को देश में चंद सेकेंड के अंतराल पर आए दो विनाशकारी भूकंपों ने भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस महाविनाश में अब तक कम से कम 1,430 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

अस्पतालों और मलबे से हर घंटे लाशें और घायल निकाले जा रहे हैं, जिससे यह आंकड़ा और भी भयावह होने की आशंका है। सबसे डरावनी बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुमान के मुताबिक, करीब 50,000 लोग अब भी लापता हैं

1. चंद सेकेंड में बिखरी मौत: पिछले 100 साल का सबसे शक्तिशाली भूकंप

बुधवार का दिन वेनेज़ुएला के लिए काल बनकर आया, जब लगातार दो शक्तिशाली भूकंप के झटकों ने पूरी धरती को हिलाकर रख दिया।

  • 7.5 की तीव्रता: भूकंपों में से एक की तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 7.5 दर्ज की गई, जो पिछले एक दशक या एक सदी में वेनेज़ुएला में आया सबसे विनाशकारी और शक्तिशाली भूकंप है।

  • ला गुआइरा सबसे ज्यादा प्रभावित: देश की राजधानी काराकास के नजदीक स्थित तटीय राज्य ला गुआइरा इस भूकंप का मुख्य केंद्र और सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका बनकर उभरा है। यहां गगनचुंबी इमारतें और रिहायशी बस्तियां ताश के पत्तों की तरह जमींदोज हो गई हैं।

2. मलबे में जिंदगी की तलाश: न साधन हैं, न वक्त

ला गुआइरा और आसपास के इलाकों में इस समय चीख-पुकार और बेबसी का माहौल है। लोग अपने खोए हुए प्रियजनों और आशियाने के सामान की तलाश में दिन-रात कंक्रीट और लोहे का मलबा खंगाल रहे हैं।

जमीनी हालात बेहद भावुक और दर्दनाक हैं:

"चारों तरफ सन्नाटा पसरते ही लोग मलबे के पास कान लगा रहे हैं, ताकि कंक्रीट के नीचे दबी कोई हल्की सी कराह या आवाज सुनाई दे सके जो यह संकेत दे कि उनका कोई अपना अंदर अब भी जिंदा फंसा हुआ है।"

स्थानीय लोगों के पास कोई आधुनिक मशीनरी नहीं है; वे अपने हाथों और जो भी साधारण साधन मिल रहे हैं, उनकी मदद से बिना किसी सुरक्षा के अपनों को मलबे से निकालने की कोशिशों में जुटे हैं।

3. अंतरराष्ट्रीय मदद भी पड़ रही कम

वेनेज़ुएला में इस समय सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों की कमी है। देश में स्थानीय बचाव दलों (Rescuers) की संख्या मलबे और तबाही के पैमाने को देखते हुए बेहद सीमित है।

हालाँकि, इस वैश्विक आपदा को देखते हुए दुनिया के कई बड़े देश मदद के लिए आगे आए हैं:

  • मेक्सिको, स्पेन, अमेरिका और ब्रिटेन से अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और बचावकर्मियों की विशेष टीमें अत्याधुनिक उपकरणों के साथ वेनेज़ुएला पहुंच चुकी हैं।

  • राहत शिविर और मलबे को हटाने का काम युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन 50 हजार लापता लोगों की विशाल संख्या के आगे यह अंतरराष्ट्रीय मदद भी अब तक नाकाफी साबित हो रही है।

बेबाक24 टेक

वेनेज़ुएला में आया 7.5 तीव्रता का यह भूकंप केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि यह इस लैटिन अमेरिकी देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की कमजोरी और प्रशासनिक लाचारी की भी पोल खोलता है। आर्थिक संकट से जूझ रहे वेनेज़ुएला के पास ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए न तो पर्याप्त आपदा प्रबंधन बल (Disaster Management Force) है और न ही आधुनिक क्रेन और खोजी उपकरण। यही वजह है कि स्थानीय लोगों को बिना किसी सुरक्षा के खुद ही मलबे में हाथ डालना पड़ रहा है, जो बेहद खतरनाक है।

50,000 लोगों का लापता होना यह साफ करता है कि आने वाले दिनों में मलबे जैसे-जैसे साफ होंगे, मौत का यह आंकड़ा 1,430 से बढ़कर कई गुना ज्यादा हो सकता है। समय बीतने के साथ मलबे के नीचे फंसे लोगों के जिंदा बचने की उम्मीदें भी टूटती जा रही हैं। वैश्विक समुदाय को इस समय राजनीति से ऊपर उठकर वेनेज़ुएला को बड़े पैमाने पर मेडिकल, भोजन और तकनीकी सहायता भेजनी होगी, अन्यथा यह त्रासदी इस सदी के सबसे बड़े मानवीय संकट में बदल जाएगी।



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