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"यह संप्रभुता का आत्मसमर्पण है": हिज़्बुल्लाह ने इसराइल के साथ 'फ्रेमवर्क समझौते' को ठुकराया, जंग जारी रखने का ऐलान

by admin@bebak24.com on | 2026-06-28 14:04:09

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"यह संप्रभुता का आत्मसमर्पण है": हिज़्बुल्लाह ने इसराइल के साथ 'फ्रेमवर्क समझौते' को ठुकराया, जंग जारी रखने का ऐलान

बेरूत/तेहरान: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में शांति बहाली की अमेरिकी कोशिशों को एक और बड़ा झटका लगा है। लेबनान और इसराइल के बीच अमेरिका की मध्यस्थता से तैयार हुए 'फ्रेमवर्क समझौते' को चरमपंथी संगठन हिज़्बुल्लाह ने पूरी तरह ख़ारिज कर दिया है। हिज़्बुल्लाह के महासचिव शेख़ नईम कासिम ने शनिवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए इसे लेबनान की संप्रभुता का उल्लंघन और इसराइली कब्ज़े को वैध बनाने की साज़िश करार दिया है।

इस राजनीतिक घमासान के बीच, ज़मीनी स्तर पर भी संघर्ष विराम (सीज़फायर) की धज्जियां उड़ती दिख रही हैं और दक्षिणी लेबनान में इसराइली हमले दोबारा शुरू हो गए हैं।

1. हिज़्बुल्लाह को समझौते पर क्या है आपत्ति?

ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, शेख़ नईम कासिम ने अमेरिकी फ्रेमवर्क को "अपमानजनक, शर्मनाक और संप्रभुता का आत्मसमर्पण" बताया है। उन्होंने इस समझौते का विरोध करने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें कहीं:

  • हथियार डालने की शर्त मंज़ूर नहीं: समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान से इसराइली सैनिकों की वापसी के बदले हिज़्बुल्लाह के हथियार डालने की शर्त रखी गई है। कासिम ने इसे "बेहद ख़तरनाक प्रस्ताव" बताते हुए कहा कि यह लेबनानी क्षेत्रों के स्थायी विलय का मार्ग आसान करेगा।

  • इस्लामाबाद समझौते का हवाला: हिज़्बुल्लाह प्रमुख का दावा है कि ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में जो समझौता (MoU) हुआ था, उसमें बिना किसी शर्त के 60 दिनों के भीतर इसराइली सेना की पूरी वापसी की गारंटी दी गई थी। वर्तमान समझौता लेबनान की प्रतिरोधक शक्ति को ख़त्म कर देगा।

2. समझौते के अगले ही दिन इसराइल का ड्रोन हमला

एक तरफ जहाँ कागज़ों पर सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ज़मीन पर बारूद बरस रहा है। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, अमेरिका की मध्यस्थता वाले सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होने के ठीक एक दिन बाद शनिवार को एक इसराइली ड्रोन ने दक्षिणी लेबनान के नबातीह क्षेत्र को निशाना बनाया

इस ताज़ा हवाई हमले ने पहले से ही नाज़ुक स्थिति में चल रहे संघर्ष विराम को पूरी तरह ख़तरे में डाल दिया है।

3. ईरान-अमेरिका MoU और लेबनान का पेंच

क्षेत्रीय राजनीति के विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच पिछले दिनों हुए व्यापक समझौते (MoU) में लेबनान का मुद्दा सबसे अहम था। हिज़्बुल्लाह का स्पष्ट कहना है कि जब तक इसराइल पूरी तरह लेबनान से बाहर नहीं निकल जाता, तब तक उनका सैन्य प्रतिरोध (जंग) जारी रहेगा। हिज़्बुल्लाह के इस कड़े रुख के बाद अब अमेरिका और लेबनान सरकार के बीच हुआ यह त्रिपक्षीय सुरक्षा ढांचा खटाई में पड़ता नज़र आ रहा है।

बेबाक24 टेक

लेबनान में इसराइल और अमेरिका जिस 'शांति' का खाका खींच रहे थे, वह हिज़्बुल्लाह की सहमति के बिना केवल एक कागज़ी टुकड़ा बनकर रह गया है। हिज़्बुल्लाह को यह बखूबी अहसास है कि दक्षिणी लेबनान से अपनी पकड़ छोड़ना और हथियार डालना उसके अस्तित्व को ही ख़त्म कर देगा। यही वजह है कि शेख़ नईम कासिम सीधे अमेरिका-ईरान के 'इस्लामाबाद समझौते' की आड़ लेकर इस नए फ्रेमवर्क को रिजेक्ट कर रहे हैं।

दूसरी तरफ, समझौते के ठीक अगले दिन इसराइल का नबातीह पर ड्रोन हमला करना यह साबित करता है कि बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार भी सैन्य दबाव कम करने के मूड में नहीं है। जब तक ज़मीन पर गोलीबारी पूरी तरह नहीं रुकती और हिज़्बुल्लाह जैसी ज़मीनी ताक़त को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाता, तब तक मिडिल ईस्ट में किसी भी स्थायी शांति की उम्मीद करना बेमानी है। यह ताज़ा घटनाक्रम आने वाले दिनों में सीमा पर एक नए और भीषण सैन्य टकराव का कारण बन सकता है।



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