ब्रेकिंग न्यूज़
पीएम मोदी ने छात्रों के लिए रोका अपना काफिला: नीट परीक्षा के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर 45 मिनट रुके
अंतरराष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय

मिडिल ईस्ट में बढ़ा महायुद्ध का खतरा: ईरान का बड़ा पलटवार, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें

by on | 2026-06-28 13:16:52

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3109


मिडिल ईस्ट में बढ़ा महायुद्ध का खतरा: ईरान का बड़ा पलटवार, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें

तेहरान/कुवैत सिटी: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा ईरान के भीतर किए गए हवाई हमलों के जवाब में अब ईरान ने सीधे अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) ने रविवार सुबह कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सेना के कई रणनीतिक ठिकानों पर 'बैलिस्टिक मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों' से भीषण हमला करने का दावा किया है।

इस हमले की पुष्टि कुवैत की सेना ने भी की है, जिसके बाद खाड़ी देशों में हाई-अलर्ट घोषित कर दिया गया है।

1. 'ज्वाइंट ऑपरेशन' के तहत अमेरिकी बेस पर बरसे बारूद

बीबीसी फारसी सेवा के मुताबिक, IRGC ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि यह हमला एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया 'संयुक्त अभियान' (Joint Operation) था। ईरान के निशाने पर मुख्य रूप से दो बड़े अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे:

  • कुवैत: अमेरिकी सेना का प्रमुख अली अल-सलेम एयरबेस (Ali Al-Salem Air Base)

  • बहरीन: बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (5th Fleet) का मुख्यालय और उससे जुड़े 8 अन्य महत्वपूर्ण ठिकाने।

ईरान का दावा है कि उनके ड्रोनों और बैलिस्टिक मिसाइलों ने तय ठिकानों पर सटीक प्रहार किया है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों या पेंटागन की तरफ से इस हमले में हुए नुकसान या किसी के हताहत होने पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

2. कुवैती सेना ने की हमलों की पुष्टि, एयर डिफेंस एक्टिव

इस बीच, कुवैत की सेना के जनरल स्टाफ ने देश पर हुए इस मिसाइल और ड्रोन हमले की आधिकारिक पुष्टि की है। कुवैती सैन्य मुख्यालय के अनुसार:

"देश के अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम (वायु रक्षा प्रणाली) पूरी तरह एक्टिव हैं और आसमान में ही 'दुश्मन' की मिसाइलों व ड्रोनों को इंटरसेप्ट करके उनका कड़ा मुकाबला कर रहे हैं।"

3. 'इस्लामाबाद समझौता' टूटने की कगार पर, होर्मुज स्ट्रेट पर कड़ा पहरा

IRGC ने अपने बयान में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि हाल ही में अमेरिका ने उनकी नौसेना और एक तटीय जहाज के बीच हुए मामूली आमने-सामने को बहाना बनाकर ईरान की 5 तटीय चौकियों पर हमला किया था, जिसका बदला लेना जरूरी था।

ईरान ने चेतावनी भरे लहजे में कहा:

  • होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण: 'इस्लामाबाद समझौते' के तहत होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात को नियंत्रित करने की पूरी जिम्मेदारी ईरान की है।

  • कड़ी कार्रवाई की धमकी: IRGC अब से इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले उन सभी जहाजों के खिलाफ बेहद कठोर रुख अपनाएगी, जिन्हें वह 'नियमों का उल्लंघनकर्ता' मानेगी।

  • समझौता रद्द करने की चेतावनी: ईरान ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका की तरफ से युद्धविराम का उल्लंघन इसी तरह जारी रहा, तो इस्लामाबाद समझौते की आगे की सभी प्रक्रियाएं तुरंत प्रभाव से रोक दी जाएंगी।

बेबाक24 टेक

ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन में सीधे अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना यह साफ संकेत है कि अब यह लड़ाई 'प्रॉक्सी संगठनों' (जैसे हूती या हिज्‍बुल्लाह) के हाथों से निकलकर सीधे संप्रभु देशों के बीच आर-पार की जंग में तब्दील हो चुकी है। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा (5th Fleet) पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ताकत का सबसे बड़ा केंद्र है, और उस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागना अमेरिका को सीधे युद्ध के लिए ललकारने जैसा है।

ईरान ने रणनीतिक रूप से 'इस्लामाबाद समझौते' और 'होर्मुज स्ट्रेट' का कार्ड खेला है। दुनिया का एक-तिहाई तेल इसी स्ट्रेट से होकर गुजरता है; अगर ईरान यहां प्रतिबंध कड़े करता है या जहाजों को निशाना बनाता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। कुवैत द्वारा हमलों की पुष्टि करना दिखाता है कि खतरा कितना वास्तविक है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अस्तित्व मिटाने' वाली धमकी के बाद ईरान का यह आक्रामक पलटवार खाड़ी देशों को एक ऐसे मोड़ पर ले आया है, जहां से शांति की वापसी फिलहाल नामुमकिन नजर आ रही है।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment