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कोलकाता गोदाम हादसा: मलबे से 3 और शव बरामद, मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर हुआ 11; SIT गठित

by admin@bebak24.com on | 2026-06-25 20:21:17

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कोलकाता गोदाम हादसा: मलबे से 3 और शव बरामद, मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर हुआ 11; SIT गठित

कोलकाता: दक्षिण कोलकाता के तारातल्ला इलाके में बुधवार को हुए भीषण गोदाम हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। तीन मंजिला निर्माणाधीन गोदाम की भारी-भरकम छत (शेड) गिरने के बाद मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए लगातार दूसरे दिन (गुरुवार) भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। इस दर्दनाक हादसे में अब भी 20 लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका स्थानीय अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

गुरुवार को इलाके में हुई भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) के कारण मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के काम में एनडीआरएफ (NDRF) और स्थानीय प्रशासन को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

अधिकांश पीड़ित बिहार के मजदूर, मुख्यमंत्री ने लिया जायजा

घटना के समय निर्माणाधीन चाय गोदाम के भीतर करीब 40 मजदूर काम कर रहे थे, जो छत ढहने से अचानक मलबे के नीचे जमींदोज़ हो गए।

  • सीएम का दौरा: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार शाम को ही घटनास्थल और अस्पताल का दौरा कर पीड़ितों से मुलाकात की।

  • पीड़ितों की पहचान: मुख्यमंत्री ने मीडिया को जानकारी दी कि इस हादसे की चपेट में आए और जान गंवाने वाले अधिकांश दैनिक वेतनभोगी मजदूर बिहार के रहने वाले हैं। राज्य सरकार ने बिहार सरकार और पीड़ित परिवारों से संपर्क साधने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जांच के लिए 7-सदस्यीय SIT गठित, 7 लोग हिरासत में

इस बड़े हादसे को लेकर कोलकाता पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है:

  • विशेष जांच टीम: मामले की गहराई से जांच के लिए कोलकाता पुलिस के खुफिया विभाग के सहायक आयुक्त (Assistant Commissioner of Detective Department) के नेतृत्व में एक 7-सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।

  • लापरवाही का केस: पुलिस ने इस मामले में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही की धाराओं में केस दर्ज किया है।

  • हिरासत में सुपरवाइजर: गोदाम के निर्माण कार्य से जुड़े सुपरवाइजर समेत सात लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

30 साल की लीज पर थी कोलकाता पोर्ट की जमीन

शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस जमीन पर यह तीन मंजिला विशाल गोदाम बनाया जा रहा था, वह असल में कोलकाता बंदरगाह (Port) की है। इस जमीन को एक निजी संस्था ने 30 साल की अवधि के लिए लीज पर लिया था। यहां चाय के भंडारण के लिए एक बड़ा लॉजिस्टिक्स गोदाम तैयार किया जा रहा था। घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को इस हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।

बेबाक24 टेक

कोलकाता का तारातल्ला हादसा एक बार फिर इस कड़वी हकीकत को बयां करता है कि हमारे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास की इमारतें अक्सर गरीब मजदूरों के खून और मलबे पर खड़ी होती हैं। एक तीन मंजिला निर्माणाधीन गोदाम की छत का इस तरह भरभराकर गिर जाना कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि सीधे तौर पर 'स्ट्रक्चरल मर्डर' (प्रशासनिक हत्या) है। बिना उचित सुरक्षा ऑडिट और घटिया इंजीनियरिंग के इतने बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी कैसे मिल जाती है, यह कोलकाता नगर निगम और पोर्ट ट्रस्ट के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का यह कहना कि अधिकांश मजदूर बिहार के हैं, उस कड़वे सच को भी रेखांकित करता है कि देश के महानगरों को अपनी मेहनत से सींचने वाला प्रवासी मजदूर वर्ग आज भी सबसे असुरक्षित और लाचार है। पुलिस ने सिंडिकेट और सुपरवाइजर स्तर के 7 लोगों को हिरासत में लेकर एसआईटी तो बना दी है, लेकिन असल कार्रवाई तब मानी जाएगी जब जमीन लीज पर लेने वाली रसूखदार निजी कंपनी के मालिकों और उन भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा कसा जाए जिन्होंने इस असुरक्षित नक्शे और निर्माण को आंखें मूंदकर मंजूरी दी थी।



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