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'वैश्विक दक्षिण की अग्रणी ताकत बने ब्रिक्स': रूसी समकक्ष से बोले वांग यी

by on | 2026-06-24 20:02:14

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'वैश्विक दक्षिण की अग्रणी ताकत बने ब्रिक्स': रूसी समकक्ष से बोले वांग यी

नई दिल्ली | भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रही ब्रिक्स (BRICS) देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की उच्च स्तरीय बैठक के इतर एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु के साथ द्विपक्षीय मुलाकात की। इस बैठक में चीनी विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक तालमेल बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि ब्रिक्स तंत्र को और अधिक मजबूत और विस्तारित किया जाना चाहिए, ताकि इसे 'वैश्विक दक्षिण' (Global South) की अग्रणी ताकत बनाया जा सके।


​भारत ने 22-23 जून (2026) को इस महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी की, जिसमें सदस्य देशों के सुरक्षा प्रमुखों ने हिस्सा लिया। भारत में चीन के राजदूत शू फेहोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस मुलाकात की अहम जानकारियां साझा की हैं।

चीन-रूस रणनीतिक समन्वय और बैठक के मुख्य बिंदु

​चीनी विदेश मंत्री और रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव के बीच हुई इस वार्ता में वैश्विक स्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों पर गहरा मंथन हुआ:

शीर्ष नेतृत्व की सहमति को लागू करना: वांग यी ने स्पष्ट किया कि चीन अपने और रूस के शीर्ष नेताओं के बीच बनी आपसी सहमति को धरातल पर उतारने और व्यापक रणनीतिक समन्वय को मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

बहुपक्षवाद और शांति का मंच: चीनी विदेश मंत्री ने ब्रिक्स को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में न्याय, शांति और बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि चीन और रूस को मिलकर इसके प्रभाव को बढ़ाना होगा।

अस्थिर दुनिया में स्थिरता लाना: चीनी राजदूत शू फेहोंग के अनुसार, इस बैठक का मुख्य फोकस समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से निपटना, वैश्विक सुरक्षा माहौल को सुदृढ़ करना और आज की अस्थिर दुनिया में अधिक से अधिक स्थिरता सुनिश्चित करना था।

​11 देशों का महाशक्तिशाली संगठन बना ब्रिक्स: आंकड़े

​इस बैठक के दौरान ब्रिक्स के लगातार बढ़ते वैश्विक और आर्थिक प्रभाव को भी रेखांकित किया गया। मूल रूप से पांच देशों से शुरू हुआ यह संगठन अब दुनिया की एक बड़ी आर्थिक धुरी बन चुका है:

​संगठन का विस्तार: ब्रिक्स की शुरुआत मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से हुई थी। वर्ष 2024 में इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को शामिल किया गया, जबकि वर्ष 2025 में इंडोनेशिया भी इस समूह का हिस्सा बन गया।

वैश्विक आबादी: यह समूह अब दुनिया की 49.5 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।

आर्थिक ताकत: वैश्विक जीडीपी (GDP) में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी तक पहुंच चुकी है।

वैश्विक व्यापार: दुनिया के कुल व्यापार का करीब 26 फीसदी हिस्सा अब ब्रिक्स देशों के नियंत्रण में है।

​बेबाक24 टेक

​नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स एनएसए बैठक के इतर वांग यी और सर्गेई शोइगु की यह मुलाकात वैश्विक भू-राजनीति में एक बड़ा संदेश देती है। चीन और रूस द्वारा ब्रिक्स को 'वैश्विक दक्षिण की अग्रणी ताकत' बनाने की बात कहना असल में पश्चिमी देशों (विशेषकर अमेरिका और जी7) के वैश्विक प्रभुत्व को खुली चुनौती देना है। 2024 और 2025 में हुए विस्तार के बाद, जिसमें इंडोनेशिया और ईरान जैसे रणनीतिक देश शामिल हुए हैं, ब्रिक्स अब महज एक आर्थिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह एक मजबूत भू-राजनीतिक ब्लॉक में तब्दील हो चुका है।

​भारत के लिए यहाँ एक बेहद बारीक कूटनीतिक संतुलन (Balancing Act) बनाने की चुनौती है। एक तरफ भारत इस समय ब्रिक्स का अध्यक्ष है और वह विकासशील देशों की आवाज बनना चाहता है, लेकिन दूसरी तरफ वह अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को भी कमजोर नहीं होने दे सकता। चीन और रूस जिस आक्रामकता के साथ ब्रिक्स के मंच से बहुपक्षवाद का कार्ड खेल रहे हैं, वह वैश्विक मंचों पर पश्चिमी प्रतिबंधों की धार को कुंद करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। 40% वैश्विक जीडीपी और आधी आबादी पर नियंत्रण रखने वाला यह संगठन आने वाले समय में नए वर्ल्ड ऑर्डर की दिशा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा।



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