ब्रेकिंग न्यूज़
पीएम मोदी ने छात्रों के लिए रोका अपना काफिला: नीट परीक्षा के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर 45 मिनट रुके
राष्ट्रीय राष्ट्रीय

भारत-दक्षिण कोरिया जुगलबंदी: वैश्विक संकट के बीच जयशंकर और चो ह्यून में बड़ी रणनीति पर बनी सहमति

by admin@bebak24.com on | 2026-06-24 18:19:33

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3172


भारत-दक्षिण कोरिया जुगलबंदी: वैश्विक संकट के बीच जयशंकर और चो ह्यून में बड़ी रणनीति पर बनी सहमति

सोल | वैश्विक उथल-पुथल और पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण माहौल के बीच भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देने की कवायद शुरू हो गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को सोल में अपने दक्षिण कोरियाई समकक्ष चो ह्यून से एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय मुलाकात की | इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, उन्नत तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, संस्कृति और पी2पी (पीपल-टू-पीपल) संपर्क जैसे कई रणनीतिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की गहन समीक्षा की गई।

​यह बैठक दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग की हालिया भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के मजबूत होते कूटनीतिक रुख को दर्शाती है।

​शिपबिल्डिंग से लेकर फिनटेक तक: इन क्षेत्रों में बढ़ेगी साझेदारी

​दोनों विदेश मंत्रियों की इस वार्ता में केवल पारंपरिक सहयोग ही नहीं, बल्कि भविष्य की आधुनिक तकनीकों पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया:

• ​शिखर सम्मेलन के फैसलों की समीक्षा: दोनों पक्षों ने राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के दौरान तय किए गए आर्थिक और वित्तीय फैसलों को तेजी से जमीन पर उतारने की प्रतिबद्धता दोहराई।

• ​नए युग की तकनीक और निवेश: चर्चा में स्टार्टअप्स, फिनटेक (वित्तीय तकनीक), और जहाज निर्माण (जहाज निर्माण उद्योग) जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग के बड़े अवसरों को रेखांकित किया गया।

• ​भारतीय पीएमओ की बड़ी पहल: कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून ने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय में इस सप्ताह 'कोरिया वीक' की मेजबानी की जा रही है。 यह भारतीय बाजार में काम करने वाली दक्षिण कोरियाई कंपनियों की चुनौतियों को दूर करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दिखाता है। उन्होंने इसके लिए भारत का आभार जताया और जल्द ही कोरिया में भारतीय कंपनियों के लिए भी एक विशेष 'राउंडटेबल बैठक' आयोजित करने का एलान किया。

​पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक प्रभाव से मिलकर निपटेंगे दोनों देश

​द्विपक्षीय मामलों के अलावा, दोनों नेताओं ने लंच के दौरान वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की।

• ​वैश्विक मंदी और पश्चिम एशिया: दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव से जो वैश्विक आर्थिक प्रभाव और सप्लाई चेन की दिक्कतें पैदा हो रही हैं, उनका मुकाबला दोनों देश मिलकर करेंगे।

• ​समान विचारधारा वाले देशों का साथ: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने शुरुआती संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि आज की संकटग्रस्त दुनिया में भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों का महत्व बहुत बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में समान विचारधारा, साझा मूल्यों और आपसी विश्वास रखने वाले देशों का एक साथ आना बेहद जरूरी है。

बेबाक24 टेक

​एस. जयशंकर की यह दक्षिण कोरिया यात्रा भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और वैश्विक स्तर पर 'रेजिलिएंट सप्लाई चेन' (मजबूत आपूर्ति श्रृंखला) बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। दक्षिण कोरिया शिपबिल्डिंग, डिफेंस और सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत तकनीकों का पावरहाउस है, और भारत को अपने विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए कोरियाई निवेश की सख्त जरूरत है। पीएमओ द्वारा भारत में 'कोरिया वीक' का आयोजन करना यह साफ करता है कि नई दिल्ली कोरियाई कंपनियों के लिए रेड टेप (नौकरशाही की बाधाओं) को हटाकर रेड कार्पेट बिछाने के लिए तैयार है।

​रणनीतिक चश्मे से देखें तो जयशंकर का यह बयान कि "दुनिया को साझा मूल्यों वाले देशों के सहयोग की जरूरत है", सीधे तौर पर चीन पर निर्भरता कम करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक नया लोकतांत्रिक ब्लॉक मजबूत करने का कूटनीतिक इशारा है। पश्चिम एशिया के तनाव से तेल और व्यापारिक मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, ऐसे में भारत और दक्षिण कोरिया जैसी दो बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं का एक सुर में बोलना वैश्विक बाजारों को एक सकारात्मक संदेश देता है। अब चुनौती यह होगी कि दोनों देश इन कागजी समझौतों को कितनी जल्दी जमीनी हकीकत में बदलते हैं।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment