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लखनऊ अग्निकांड के बाद गाजीपुर प्रशासन अलर्ट, कोचिंग संचालकों को कड़ी चेतावनी

by on | 2026-06-24 18:03:35

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लखनऊ अग्निकांड के बाद गाजीपुर प्रशासन अलर्ट, कोचिंग संचालकों को कड़ी चेतावनी


​जिलाधिकारी और एसपी ने ली होटल, लॉज व कोचिंग संचालकों की बैठक; कहा- सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं

​बेसमेंट में कोचिंग संचालन पर पूरी तरह रोक, 100 से अधिक क्षमता वाले संस्थानों के लिए फायर NOC अनिवार्य

गाजीपुर । लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड और उसमें हुई जनहानि के बाद गाजीपुर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना और बड़े हादसे को रोकने के लिए बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला की अध्यक्षता एवं पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा की उपस्थिति में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले के होटल, लॉज, गेस्ट हाउस और कोचिंग संस्थानों के संचालक मुख्य रूप से मौजूद रहे।

​बैठक के दौरान प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि जनपद में किसी भी कीमत पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने कहा कि प्रशासन घटना होने के बाद की जाने वाली दंडात्मक कार्रवाई के बजाय, पहले से ही पुख्ता रोकथाम की रणनीति पर काम कर रहा है।

​ बेसमेंट में कोचिंग पूरी तरह प्रतिबंधित, दो निकास मार्ग जरूरी

​प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों के संचालन को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत अब किसी भी भवन के बेसमेंट में कोचिंग का संचालन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। इसके साथ ही प्रत्येक संस्थान में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कम से कम दो स्वतंत्र निकास मार्ग होने अनिवार्य हैं, जो किसी भी स्थिति में अवरुद्ध नहीं होने चाहिए।

​जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि 100 से अधिक छात्र क्षमता वाले सभी कोचिंग संस्थानों, होटलों और हॉस्टलों को फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा। साथ ही भवनों में अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम और वॉटर हाइड्रेंट की क्रियाशील व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

भवन स्वामियों और संचालकों पर तय होगी जिम्मेदारी

​जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने सख्त लहजे में कहा, "जनहानि की कीमत पर कोई भी व्यावसायिक गतिविधि स्वीकार्य नहीं है। छात्रों और नागरिकों की जान की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि किसी भी संस्थान की लापरवाही के कारण कोई हादसा होता है, तो संबंधित भवन स्वामी, संचालक और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर नजीर पेश की जाएगी।"

​ जर्जर वायरिंग बदलने और विद्युत लोड ऑडिट कराने के निर्देश

​बैठक में शॉर्ट-सर्किट से होने वाले हादसों को रोकने के लिए विद्युत सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और कोचिंग केंद्रों को अनिवार्य रूप से विद्युत भार (लोड) ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि भवनों की जर्जर वायरिंग को तुरंत बदला जाए और सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रत्येक मंजिल पर एमसीबी (मिनिएचर सर्किट ब्रेकर) लगाई जाए ताकि किसी भी फॉल्ट की स्थिति में बिजली स्वतः कट सके।

​ सुरक्षा के नए मानक: इनका अनुपालन होगा अनिवार्य

​प्रशासन द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन के अनुसार, सभी संबंधित संस्थानों को निम्नलिखित नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा:

फायर एनओसी: अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना।


अग्निशमन प्रणाली: प्रत्येक तल पर चालू हालत में अग्निशमन यंत्र, अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम।


क्षमता का नियमन: निर्धारित क्षमता से अधिक छात्रों को एक कमरे में बैठाने पर पाबंदी।


24×7 निगरानी: सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी कैमरों का चौबीसों घंटे क्रियाशील रहना अनिवार्य।


निकासी योजना: प्रत्येक कक्षा के बाहर आपातकालीन निकास का स्पष्ट नक्शा प्रदर्शित करना।


प्रशिक्षण: संस्थान के कर्मचारियों और छात्रों को नियमित रूप से फायर सेफ्टी का प्रशिक्षण देना होगा।



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